What is the definition of Parkinson’s disease?

Parkinson’s disease is a condition in which the nervous system and the other parts of the body are controlled by the nerves. Symptoms start slowly. The first symptom is a barely noticeable tremor in just one hand. Tremors are typical, but the disorder also causes stiffness and slowing movement. The condition is not curable, but there are many different treatment options. If you are looking for the treatment of Parkinson’s disease, then meet the best neurologist in Punjab

What is the definition of Parkinson’s disease? 

Parkinson’s disease is a progressive disorder that is caused by degeneration of nerve cells in the part of the brain called the substantia nigra, which controls movement. These nerve cells die or become impaired, losing the ability to produce an important dopamine chemical.

Cause of Parkinson’s disease. 

There are several reasons that are responsible for Parkinson’s disease. 

  • Genes: Researchers have identified specific genetic changes that can cause Parkinson’s disease. But these are uncommon except in rare cases with many family members affected by Parkinson’s disease.
  • Environmental triggers: Exposure to certain toxins or environmental factors may increase the risk of later Parkinson’s disease, but the risk is small.
  • Presence of Lewy bodies: Clumps of specific substances within brain cells are microscopic markers of Parkinson’s disease. These are called Lewy bodies, and researchers believe these Lewy bodies hold an essential clue to the cause of Parkinson’s disease.
  • Alpha-synuclein found within Lewy bodies: Many substances are found within Lewy bodies, scientists believe that an important one is the natural and widespread protein called alpha-synuclein, also called a-synuclein.           
  • Medications: Several medications can cause a parkinsonism-like effect. The Parkinson’s-like effects are often temporary if you stop taking the medication that caused them before the effects become permanent. However, the effects can linger for weeks or even months after you stop taking the medication.

Symptoms of Parkinson’s disease

During Parkinson’s disease, people experience different symptoms.             

  • Stiff muscles: You can have muscle stiffness anywhere in your body. Your range of motion is restricted and unpleasant due to the stiff muscles.
  • Faulty balance and posture: You might start to slouch. Parkinson’s disease may cause you to stumble or lose your equilibrium.
  • Loss of movement that comes naturally: Your capacity to make involuntary gestures, such as smiling, blinking, or waving your arms while walking, may have diminished.
  • Speech varies: You can slur your words, speak slowly or rapidly, or hesitate to say anything. Your speech might contain different speech patterns; instead, it might be more varied.
  • Composing modifications: Writing could get challenging, and your writing could look cramped.

 

Treatment of Parkinson’s disease for the future

There are different treatment plans for Parkinson’s disease. 

Medicines: Different types of drugs that are beneficial for treating Parkinson’s disease. 

  • Adding dopamine: Medications like levodopa can increase the available levels of dopamine in your brain. 
  • Stimulating dopamine: Dopamine agonists are medications that have a dopamine-like effect. Dopamine is a neurotransmitter that causes cells to act a certain way when a dopamine molecule latches onto them. 

Experimental treatments

  • Stem cell transplants: These add new dopamine-using neurons into your brain to take over for damaged ones.
  • Neuron-repair treatments repair damaged neurons and encourage new neurons to form.
  • Gene therapies and gene-targeted treatments: These treatments target specific mutations that cause Parkinson’s disease.

 To treat Parkinson’s disease, contact the best Neurosurgeon in Ludhiana at the Neurociti Hospital.

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    अधरंग अटैक आने से पहले कैसे करे खुद का बचाव?

    आज के समय की बात करे तो भाग-दौड़ भरी ज़िन्दगी में हर एक व्यक्ति व्यस्त रहता। उसके इसी व्यस्त जीवन का असर उसके दिमाग पर भी पड़ता है, जो दिमाग के दौरे के रूप में बाहर निकल कर आता है। इसके अलावा आज के आर्टिकल में हम अधरंग या दिमाग का दौरा क्या है इसके बारे में बात करेंगे ;

    अधरंग या दिमागी अटैक क्या है ?

    अधरंग अटैक के बारे में हम निम्न में बात करेंगे ;

    • अधरंग को कई बार दिमाग का अटैक भी कहते हैं। यह दिमाग में खून के बहाव के रुक जाने के कारण या दिमाग में खून की नाड़ियां फट जाने के कारण भी हो सकता है। कई बार यह दिमाग के ठीक ढंग से काम न करने के कारण भी होता है।

    अधरंग कितने प्रकार के होते है ?

    • अधरंग मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं। पहला सूखा अधरंग और दूसरा खूनी अधरंग। 
    • सूखे अधरंग की बात करे तो ये दिमाग में खून के जम जाने के कारण होता है। तो वही खूनी अधरंग दिमाग की नाड़ियों के फट जाने के कारण होता है।

    यदि आपको या आपके किसी करीबी को खूनी और सूखे अधरंग का अटैक पड़ चूका है, तो फ़ौरन बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना के सम्पर्क में आए।

    अधरंग की निशानी क्या है ?

    • अधरंग निशानी की बात करे तो अचानक एक तरफ चेहरे, बाजू, टांग की कमजोरी, बोलने या बोलते हुए को समझने में मुश्किल का आना, खुद का संतुलन खो बैठना, असाधारण सिर दर्द अधरंग की पहली निशानी है। 

    अधरंग अटैक के क्या कारण है ?

    • आज के समय की बात करे तो खान-पान से लेकर रहन-सहन बिल्कुल बदल चुका है। लाइफ स्टाइल चेंज होने से बहुत-सी बीमारियां व्यक्ति के शरीर में अग्रसर हुई है। 
    • इसके अलावा अधरंग अटैक के कारणों की बात करे तो उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारियां, शूगर व धूम्रपान करना इसके प्रमुख कारण हैं।

    अधरंग या दिमागी अटैक से कैसे करे खुद का बचाव ?

    • यदि व्यक्ति अपने जीवन शैली में सुधार लाएं तो 80 फीसदी तक अधरंग होने के खतरे को टाला जा सकता है।
    • इसके अलावा जब किसी व्यक्ति को अधरंग का अटैक हो जाए तो उसे 2 से 3 घंटे के अंदर अच्छे स्ट्रोक सेंटर में पहुंचना चाहिए ताकि मरीज को बचाया जा सके। क्युकि समय ही इस बीमारी को रोकने का बहुमूल्य विकल्प है।
    • तो वही अधरंग के बचाव व इसको रोकने के तरीके की बात करे तो स्वच्छ खाना, तंदरुस्त शरीर, धूम्रपान न करना, अधिक शराब न पीना, मोटापे पर नियंत्रण रख के आप इस समस्या से खुद का बचाव कर सकते है।

    सुझाव :

    बहुत से लोगों के दिमाग में यह बात घूमती है की अधरंग या दिमागी अटैक का कोई इलाज नहीं है। पर आपको बता दे पहले ऐसा था पर आज के समय में इसका बेहतरीन इलाज किया जाता है। इसके अलावा यदि आप अधरंग अटैक की समस्या से ग्रस्त है, तो न्यूरोसीटी हॉस्पिटल के डॉक्टर से जरूर मुलाकात करे और अपनी समस्या के बारे में खुल के यहाँ के अनुभवी डॉक्टरों से बात करे।

    निष्कर्ष :

    अधरंग या दिमागी अटैक क्या है इसके बारे में हम उपरोक्त आपको जानकारी दे चुके है, यदि आपमें भी ऐसी समस्या है तो बिना समय बर्बाद की किए किसी अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट के सम्पर्क में आए, क्युकि इस अटैक में समय का बहुत मत्वपूर्ण स्थान है। इसलिए आपको उपरोक्त बातो का ध्यान रखना है, नहीं तो ये समस्या आपकी जान पर भी बन सकती है।

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      What is Parkinson’s Diseases and Treatment

      PARKINSON’S DISEASES

      Parkinson’s disease is a brain disorder affecting the nervous system. Parkinson’s disease impacts the person’s controlling system and causes loss of ability, like shaking the body. Its symptoms show low dopamine levels in the brain, which causes loss of sense of smell and the nervous system. There are some signs of having Parkinson’s disease, which include shaking legs and hands, loss of controlling ability, sleeping problems, mood changes, and depression, etc. Parkinson’s disease does not belong to a genetic disease. It’s a combination of environmental factors and genetics. If you are experiencing such signs, consult the best neurologist Ludhiana

      DIAGNOSIS

      Parkinson’s disease is easy to find according to signs or symptoms. There are not so many tests like blood. Only scan a brain and check medical history.  Doctor examines the disease and prescribes medicine. If the problems still persist, doctors recommend surgery, But brain scans are not very useful in finding Parkinson’s disease. Sometimes Parkinson’s disease diagnosis takes time. A doctor recommends following a regular appointment after they discover a condition. Consult the best neurosurgeon Ludhiana to help cure a disease. 

      TREATMENT

      PARKINSON’s disease is controlled by medicine but not fully cured. Doctors suggest a healthy life change routine lifestyle, exercise, and physical therapy to reduce stress. It helps to control the nervous system if, in case advanced, they suggest surgery.  

      MEDICATION

      Low dopamine is the cause of Parkinson’s disease. Dopamine cant take it directly. That is why doctors suggest some medicine that helps to relieve the symptoms and increase the dopamine in the brain. Dopamine can indirectly enter the brain.

      Carbidopa and levodopa 

      Who suffer from Parkinson’s disease, levodopa is the best medicine for this disease. Levodopa directly enters the brain and is converted to dopamine. This medicine helps to manage those symptoms. And they have some side effects like nausea and light headaches. Carbidopa and levodopa combine medicine to relieve the effect of dose after surgery, and doctors suggest a small quantity can have a good impact on the brain. If you have an empty stomach, it’s beneficial in Parkinson’s disease. 

      COMT Inhibitors 

      When you take levodopa medicine, a catechol O methyltransferase inhibitor, a chemical releases a chemical called catechol O methyltransferase. COMT uses levodopa, which works effectively in the brain 

      monoamine oxidase B  inhibitors 

      It helps dopamine to work and breaks the chemical. It has side effects like dizziness, fainting, stomach pain, and nausea. 

      SURGICAL PROCEDURE 

      Doctors suggest surgery to control the symptoms if the medicine does not work effectively. Parkinson’s disease sometimes needs surgical procedure to improve the quality of life—surgery like deep brain stimulation and transplantation. Dopamine helps balance brain chemicals and restore cells. After surgery, they control all abilities and relieve those symptoms for a long time. 

      Deep brain stimulation

      Deep brain stimulation is part of surgery. This surgery relieves symptoms but is not very useful to cure Parkinson’s disease. Surgeons insert a thin metal wire in the brain and send an electrical pulse in the wire to the brain. It helps to reduce the symptoms that negatively impact surgery, like infection and brain hemorrhage. Deep brain surgery helps to stabilize a medicine reaction and improve ability.

       Complementary treatment 

      Complementary treatment is like physical therapy or activity. It’s an alternative therapy to help reduce symptoms of Parkinson’s disease, like meditation herbs and healthy food, and the right medicine to improve quality of life. 

       Parkinson’s disease is a brain disease that affects individuals quality of life. If you are experiencing any of these symptoms, such as shaking hands and legs, you can seek help at Neurociti Hospital.

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        क्या मिर्गी महिलाओं में गर्भावस्था को प्रभावित कर सकती है?
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        सिरदर्द एक आम बीमारी है जो हमारे दैनिक जीवन को बाधित कर…

        क्या है पार्किंसंस रोग की समस्या व इसके इलाज के लिए कौन-से हॉस्पिटल है बेहतरीन ?

        आज के समय में पार्किंसंस रोग एक ऐसी समस्या है, जिसमे शरीर का संतुलन बनाए रखने और अन्य शारीरिक गतिविधियां करने में व्यक्ति को समस्या का सामना करना पड़ता है। यह बढ़ती उम्र के साथ होने वाला रोग है, जिसे मृत्यु के सबसे अहम 15 कारणों की सूची में शामिल किया गया है। देखा जाए तो इस बीमारी के बारे में लोगों को ज्यादा मालूम नहीं है, इसलिए आज के लेख में हम पार्किंसंस रोग की समस्या से कैसे खुद का बचाव कर सकते है, और साथ ही ये समस्या है क्या ? इसके बारे में भी चर्चा करेंगे ;

        पार्किंसंस रोग क्या है ?

        • पार्किंसंस रोग केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का एक न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग है। इस बीमारी में दिमाग में डोपामाइन नामक रसायन का उत्पादन बंद हो जाता है, जिसके चलते शरीर का संतुलन बनाए रखने में समस्या होती है। साथ ही चलने में समस्या, शरीर में अकड़न व कंपन जैसी समस्याएं भी होने लगती है।
        • एक रिपोर्ट के अनुसार, पार्किंसन रोग 60 साल की उम्र के बाद होता है, लेकिन कुछ 5 से 10 प्रतिशत मामलों में यह 50 के आसपास भी हो सकता है। बताया जाता है कि पार्किंसंस रोग का जोखिम पुरुषों में महिलाओं के मुकाबले 50 प्रतिशत ज्यादा होता है। यह रोग आनुवंशिक भी हो सकता है, लेकिन ऐसा हर बार हो जरूरी नहीं है। 

        वहीं मुख्य रूप से इसके दो प्रकार होते है।

        • “प्राइमरी या इडियोपेथिक”, इसमें न्यूरोन्स के खत्म होने की वजह का पता नहीं होता।
        • “सेकंडरी या एक्वायर्ड”, में रोग का कारण पता होता है, जैसे ड्रग्स, संक्रमण, ट्यूमर, विषाक्ता आदि।
        • पार्किंसंस रोग की समस्या के शुरुआती दौर से बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट का चयन करना चाहिए।

        पार्किंसंस रोग की समस्या का शिकार कौन लोग होते है ? 

        • इस बीमारी के होने और विकसित होने के लिए उम्र सबसे बड़ा जोखिम कारक है, ज्यादातर लोग जो इस बीमारी से पीड़ित है, उनकी उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक है।
        • महिलाओं की तुलना में पुरुषों को यह बीमारी ज्यादा होती है।
        • कुछ प्रतिशत लोग आनुवंशिकता के कारण भी इस रोग की चपेट में आ सकते है।
        • सिर में चोट लगने या किसी बीमारी के कारण भी व्यक्ति पार्किंसंस रोग का शिकार हो सकता है।
        • फलों और सब्जियों पर कीटनाशक रसायनों का छिड़काव करने से भी इस बीमारी के होने का खतरा रहता है।

        पार्किंसंस रोग के कारण क्या है ? 

        • धूम्रपान का सेवन करना।
        • मोटापे की समस्या का सामना करना।
        • शारीरिक गतिविधियों में कमी का आना।
        • भोजन में अत्यधिक नमक का सेवन करना।
        • बढ़ती उम्र भी इसके प्रमुख कारण में शामिल है।
        • आनुवंशिकता भी इसके एक कारण में शामिल है।
        • शराब का सेवन करना।
        • तनाव और थायराइड की समस्या का सामना करना।
        • गुर्दे से जुड़ा पुराना रोग भी इसके कारण में शामिल है।

        पार्किंसंस रोग के लक्षण क्या है ?

        • शरीर के किसी भाग में कंपन का होना, खासकर हाथ में। 
        • मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या। 
        • शरीर को संतुलित रखने में समस्या का सामना करना। 
        • शारीरिक गतिविधियां, जैसे, चलना व करवट बदलने आदि में धीमेपन का आना। 
        • आवाज में नरमाहट का आना। 
        • आंखों को झपकाने में दिक्कत का सामना करना। 
        • खाना या पानी निगलने में समस्या का सामना करना। 
        • मूड स्विंग जैसे कि अवसाद आदि की समस्या। 
        • बार-बार नींद खुलने की समस्या का सामना करना। 
        • बेहोशी का छाना। 
        • शारीरिक संबंधों में कम रुचि रखना। 
        • आंत और मूत्राशय की गतिविधियों में गड़बड़ी का सामना करना। 
        • थकान महसूस करना। 
        • किसी भी कार्य में रुचि का कम होना। 
        • कब्ज की समस्या का सामना करना। 
        • कम या उच्च रक्तचाप की समस्या का होना।

        अगर आपके शरीर में गंभीर लक्षण नज़र आए और इन लक्षणों का उपचार सर्जरी के माध्यम से संभव हो तो इसके लिए आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोसर्जन का चयन करना चाहिए।

        पार्किंसंस रोग के कितने स्टेज है ?

        इसके स्टेज को कुछ अनुभवी डॉक्टरों के द्वारा पांच भागों में विभाजित किया गया है, जैसे ;

        1. इसके पहले स्टेज में, पार्किंसंस सबसे हल्के रूप में होता है। आपको पहले स्टेज में कोई भी लक्षणों का अनुभव नहीं हो सकता है जो ध्यान देने योग्य है। यह भी हो सकता है कि वे अभी तक आपके दैनिक जीवन और कार्यों में न आए।
        2. दूसरे स्टेज में स्टेज 1 से स्टेज 2 तक की प्रगति में महीनों या साल का समय भी लग सकता है। हर व्यक्ति को दूसरी स्टेज में अलग अनुभव होते है। इस मध्यम स्तर पर, आप कुछ लक्षणों का अनुभव कर सकते है, जैसे –
        • मांसपेशियों में जकड़न की समस्या। 
        • झटके की समस्या। 
        • चेहरे के भावों में बदलाव का आना।
        • सब कुछ हिलता हुआ या धुंधला दिखाई देना। 
        1. तीसरे स्टेज, में व्यक्ति को पार्किंसंस के लक्षण महसूस होते है। जबकि आपको नए लक्षणों का अनुभव होने की संभावना नहीं है, वे अधिक ध्यान देने योग्य हो सकते है। वे आपके सभी दैनिक कार्यों को करने में भी बाधा डाल सकते है।
        2. चौथे स्टेज, में व्यक्ति को वॉकर या सहायक उपकरण के बिना खड़े होने में भी कठिनाई का अनुभव हो सकता है। इस दौरान व्यक्ति की प्रतिक्रियाएं और मांसपेशियों की गति भी काफी धीमी हो जाती है। इसलिए इस तरह के मरीज को अकेले नहीं छोड़ना चाहिए।
        3. पांचवे स्टेज, में जोकि यह आखिरी स्टेज है पार्किंसंस रोग का इसलिए इसमें मरीज को गंभीर लक्षण देखने को मिलते है। असंभव नहीं तो खड़ा होना मुश्किल होगा। एक व्हीलचेयर की आवश्यकता होने की संभावना होगी। इसके अलावा, इस स्तर पर, पार्किंसंस वाले व्यक्ति, भ्रम और मतिभ्रम का अनुभव कर सकते है। रोग की ये जटिलताएं बाद के चरणों में शुरू हो सकती है।

        पार्किंसंस रोग में क्या करें और क्या न करें ?

        क्या करें ; 

        • व्यायाम करें क्योंकि यह पार्किंसंस रोग से निपटने में काफी मदद कर सकता है।
        • सकारात्मक दृष्टिकोण, दृढ़ इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प रखें।
        • यदि आवश्यक हो तो चलने की छड़ी का प्रयोग करें।
        • गर्म और ठंडे खाद्य पदार्थों का अलग-अलग सेवन करें।
        • फाइबर का सेवन बढ़ाएं।
        • शॉवर के अंदर शॉवर चेयर का इस्तेमाल करें।

        क्या न करें ;

        • परिस्थितियों के प्रति कठोर रहें।
        • यह मानना ​​बंद कर दें कि सब कुछ खराब है।
        • खुद को आइसोलेट रखें। 
        • बहुत अधिक मीठे खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ ना खाएं। 
        • बहुत अधिक सोडियम, ट्रांस वसा, कोलेस्ट्रॉल और संतृप्त वसा का सेवन करें। 
        • कुर्सी या बिस्तर से अचानक उठ खड़े हों।

        पार्किंसंस रोग के इलाज के लिए बेहतरीन हॉस्पिटल !

        पार्किंसंस रोग को नज़रअंदाज़ करना काफी खतरनाक हो सकता है आपके लिए, क्युकि इस रोग में व्यक्ति का ठीक से चल पाना काफी मुश्किल होता है और ऐसी समस्या में शरीर भी ठीक से कार्य करने में असमर्थ होता है। 

        अगर पार्किंसंस रोग के दौरान आपके लक्षण भी गंभीर नज़र आए तो इससे बचाव के लिए आपको न्यूरो सिटी हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए। वहीं इस हॉस्पिटल का चयन इसलिए करना चाहिए क्युकि यहाँ पर अनुभवी डॉक्टरों के द्वारा मरीज़ों का इलाज आधुनिक उपकरण की मदद से किया जाता है।

        निष्कर्ष :

        पार्किंसंस रोग गंभीर समस्या है इसलिए इसके शुरुआती के लक्षण नज़र आने पर आपको इसके इलाज के लिए डॉक्टर का चयन करना चाहिए। और स्थिति ज्यादा न बिगड़े इसके लिए आपको समय-समय पर डॉक्टरों के द्वारा बताई गई दवाइयों का सेवन करते रहना चाहिए। और इस रोग में किसी भी तरह की दवाई का सेवन खुद से न करें।

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          Everything you should know about the symptoms and causes of Parkinson’s disease

          Parkinson’s Disease

          Parkinson’s disease is one of the progressive conditions which affect body movement. The symptoms occur with time, and sometimes it’s not even known that the individual has the problem. In this situation, tremors are typical, and there will be problems of slow movement and stiffness in the body. The initial stages might show some expression or not at all. In some cases, the Neurologist in Ludhiana can suggest you undergo surgical treatment to make a difference to your condition or control the part of the brain which is triggering the problem.

          What are the symptoms of Parkinson’s Disease?

          For every individual, the signs and symptoms are different. Usually, the symptoms can be on one body part, or they might be worse on one part of the body. Some of the common signs and symptoms are:

          • Tremor
          • Rigid muscles
          • Slowed movement
          • Loss of automatic movement
          • Speech changes
          • Impaired balance & posture

          If you have this condition, then make sure to consult one of the known Neuro Hospital in Ludhiana to effectively manage your health and get the most effective treatment plan.

          What are the causes of Parkinson’s disease?

          Patients with Parkinson’s disease will have some nerve cells which begin to break down with time. In many cases, the neurons are lost due to the chemical passenger present in the brain. Due to the same, there is impaired movement, abnormal brain activity, and many other symptoms. Some of the possible factors are genes and environmental triggers.

          What are the possible complications of Parkinson’s disease?

          Many additional issues can result in this issue, and some of them are:

          • Having a problem to think about means cognitive issues are affected. The problem of dementia is not being able to get treated through medications.
          • Moreover, there are emotional changes that happen in the body. If the treatment is gotten on time, it’s possible to get it under control.
          • The individuals often have a problem swallowing, and it usually occurs when the condition gets worse. Saliva may get collected in the mouth, making you drool more.
          • Apart from that, there is a problem with chewing and eating food like normal, which is why poor nutrition and even choking in some cases.

          What are the ways to prevent the chances of having Parkinson’s disease?

          The reason behind Parkinson’s disease is not known. This is why the way problem can be prevented hasn’t come to light. But one piece of the research has shown that those who have enough caffeine intake through coffee, cola, or tea will have reduced chances of having Parkinson’s disease. No doubt there is no clarity that it makes a difference as there is not enough evidence pointing towards the same.

          Are you in doubt about what to do next?

          Schedule your initial consultation at NeuroCiti Hospital to get the best possible care to make your brain health get the proper care it deserves. If there’s any issue, you will be told about the same on time.

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