जानिए इंसानी दिमाग में उपजे कीड़े का कैसे करें इलाज ?

दिमाग में कीड़े का उत्पन्न होना काफी बड़ी समस्या है, दिमाग में कीड़े होने की बीमारी को न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस भी कहते है। और ये कीड़ा कैसे क्यों और किन कारणों से हमारे दिमाग में उत्पन्न होता है और साथ ही क्या इसका इलाज मिलना संभव है या नहीं इसके बारे में आज के लेख में चर्चा करेंगे ;

क्या है दिमागी कीड़ा ?

  • दरअसल दिमागी कीड़ा या यह बीमरी एक इन्फेक्शन है, जो तब होता है जब हमारे शरीर में टीनिया सोलियम परजीवी का लार्वा या अंडे हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते है। 
  • सरल भाषा में कहें तो जब कोई व्यक्ति टेपवर्म के अंडे निगल लेता है, तो यह न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस संक्रमण का कारण बनता है। ये अंडे मांसपेशियों और मस्तिष्क के टिशू में घुस जाते है और वहां सिस्ट का निर्माण करते है। 
  • जब ये अंडे मस्तिष्क में सिस्ट बना देते है, तो इससे न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस की स्थिति पैदा हो जाती है।

दिमाग में कीड़े के उत्पन्न होने के क्या कारण है ?

  • ‌‌‌दिमाग के अंदर कीड़े पड़ने का प्रमुख कारण, अशुद्व भोजन को खाना या आमतौर पर अशुद्व फल और सब्जी को खाना है। वहीं आपको बता दे की इन अशुद्ध भोजन और फल के साथ टेपवर्म के कीड़े चिपके होते है, जो हमारे पेट के अंदर सबसे पहले एंटर करते है और उसके बाद रक्तवाहिनी के सहारे हमारे दिमाग तक कूंच करते है।
  • यदि आप चाहते है की आपके दिमाग में टेपवर्म के कीड़े न उपजे तो इसके लिए आपको ‌‌‌दूषित पानी का सेवन नहीं करना चाहिए। 
  • ‌‌‌फल और सब्जियों का सेवन बिना धोए करने से भी आपके दिमाग में ये कीड़े उत्पन्न हो जाते है। 
  • यदि आप किसी ‌‌‌संक्रमित व्यक्ति के साथ रहते है तो भी इस कीड़े के उत्पन्न होने के काफी चान्सेस है। 
  • ‌‌‌बिना हाथ धोए भोजन करने से भी ये कीड़े उत्पन्न होते है। 
  • ‌‌सूअर और अन्य जानवरों का मांस खाने से भी ये कीड़े आपके दिमाग में जन्म लेने लगते है।

अगर उपरोक्त कार्य करने की वजह से आपके दिमाग में भी कीड़ा उत्पन्न हो गया है, तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट का चयन करना चाहिए।

क्या है टेपवर्म का कीड़ा ?

  • टेपवर्म कीड़े की बात करें तो ये एक तरह का पैरासाइट है, जो अपने पोषण के लिए दूसरों पर आश्रित रहने वाला जीव है। इसलिए ये शरीर के अंदर पाया जाता है, ताकि उसे खाना मिल सके। 
  • वहीं इसमें रीढ़ की हड्डी नहीं होती है। साथ ही इसकी 5000 से ज़्यादा प्रजातियां पाई जाती है। ये एक मिमी से 15 मीटर तक लंबे हो सकते है।

इलाज क्या है दिमाग में उत्पन्न हुए कीड़े का ?

  • अगर आप समय रहते न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस के लक्षणों को पहचानकर एक अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श करते है, तो आप इस इन्फेक्शन से आसनी से छुटकारा पा सकते है। वहीं जब आप डॉक्टर के पास जाते है, तो वह मस्तिष्क में सिस्ट की जांच के लिए कुछ सरल टेस्ट का सुझाव दे सकते है। 
  • आमतौर पर दिमाग में कीड़े का पता लगाने के लिए डॉक्टर के द्वारा MRI या CT ब्रेन स्कैन कराने की सलाह दी जाती है। कुछ मामलों में संक्रमण के निदान के लिए कुछ ब्लड टेस्ट भी किये जाते है, लेकिन संक्रमण हल्का होने पर स्पष्ट रूप से इन टेस्ट से पता नहीं चल पाता है। इसलिए ब्रेन स्कैन टेस्ट की सलाह अधिक दी जाती है।
  • एक बार दिमाग में कीड़े का निदान होने के बाद डॉक्टर इलाज के लिए आपको कुछ दवाएं दे सकते है, जिनमें एंटी-पैरासिटिक दवाइयां होती है।
  • हालांकि, स्थिति गंभीर होने पर कुछ मामलों में डॉक्टर सर्जरी की मदद से भी सिस्ट को हटा सकते है। लेकिन आमतौर पर डॉक्टर दवाओं की मदद से ही सफलतापूर्वक इसका इलाज करने में सक्षम होते है। 

कुछ मामलों में दिमाग में उत्पन्न हुए कीड़े की सर्जरी की जाती है अगर आपको भी सर्जरी करवाने की सलाह डॉक्टर दे रहें है, तो इसके लिए आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोसर्जन का चयन करना चाहिए।

दिमागी कीड़े के इलाज के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

आप दिमागी कीड़े का इलाज न्यूरो सिटी हॉस्पिटल से भी करवा सकते है, बस इसके लिए आपको अपने रोग के लिए सतर्क होने की जरूरत है। 

निष्कर्ष :

दिमाग में उत्पन्न हुआ कीड़ा काफी खतरनाक होता है इसलिए जरूरी है की अगर आपको शुरुआती दौर में ही पता चल जाए तो इसके लिए आपको डॉक्टर के सम्पर्क में आना चाहिए।

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    अधरंग अटैक आने से पहले कैसे करे खुद का बचाव?

    आज के समय की बात करे तो भाग-दौड़ भरी ज़िन्दगी में हर एक व्यक्ति व्यस्त रहता। उसके इसी व्यस्त जीवन का असर उसके दिमाग पर भी पड़ता है, जो दिमाग के दौरे के रूप में बाहर निकल कर आता है। इसके अलावा आज के आर्टिकल में हम अधरंग या दिमाग का दौरा क्या है इसके बारे में बात करेंगे ;

    अधरंग या दिमागी अटैक क्या है ?

    अधरंग अटैक के बारे में हम निम्न में बात करेंगे ;

    • अधरंग को कई बार दिमाग का अटैक भी कहते हैं। यह दिमाग में खून के बहाव के रुक जाने के कारण या दिमाग में खून की नाड़ियां फट जाने के कारण भी हो सकता है। कई बार यह दिमाग के ठीक ढंग से काम न करने के कारण भी होता है।

    अधरंग कितने प्रकार के होते है ?

    • अधरंग मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं। पहला सूखा अधरंग और दूसरा खूनी अधरंग। 
    • सूखे अधरंग की बात करे तो ये दिमाग में खून के जम जाने के कारण होता है। तो वही खूनी अधरंग दिमाग की नाड़ियों के फट जाने के कारण होता है।

    यदि आपको या आपके किसी करीबी को खूनी और सूखे अधरंग का अटैक पड़ चूका है, तो फ़ौरन बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना के सम्पर्क में आए।

    अधरंग की निशानी क्या है ?

    • अधरंग निशानी की बात करे तो अचानक एक तरफ चेहरे, बाजू, टांग की कमजोरी, बोलने या बोलते हुए को समझने में मुश्किल का आना, खुद का संतुलन खो बैठना, असाधारण सिर दर्द अधरंग की पहली निशानी है। 

    अधरंग अटैक के क्या कारण है ?

    • आज के समय की बात करे तो खान-पान से लेकर रहन-सहन बिल्कुल बदल चुका है। लाइफ स्टाइल चेंज होने से बहुत-सी बीमारियां व्यक्ति के शरीर में अग्रसर हुई है। 
    • इसके अलावा अधरंग अटैक के कारणों की बात करे तो उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारियां, शूगर व धूम्रपान करना इसके प्रमुख कारण हैं।

    अधरंग या दिमागी अटैक से कैसे करे खुद का बचाव ?

    • यदि व्यक्ति अपने जीवन शैली में सुधार लाएं तो 80 फीसदी तक अधरंग होने के खतरे को टाला जा सकता है।
    • इसके अलावा जब किसी व्यक्ति को अधरंग का अटैक हो जाए तो उसे 2 से 3 घंटे के अंदर अच्छे स्ट्रोक सेंटर में पहुंचना चाहिए ताकि मरीज को बचाया जा सके। क्युकि समय ही इस बीमारी को रोकने का बहुमूल्य विकल्प है।
    • तो वही अधरंग के बचाव व इसको रोकने के तरीके की बात करे तो स्वच्छ खाना, तंदरुस्त शरीर, धूम्रपान न करना, अधिक शराब न पीना, मोटापे पर नियंत्रण रख के आप इस समस्या से खुद का बचाव कर सकते है।

    सुझाव :

    बहुत से लोगों के दिमाग में यह बात घूमती है की अधरंग या दिमागी अटैक का कोई इलाज नहीं है। पर आपको बता दे पहले ऐसा था पर आज के समय में इसका बेहतरीन इलाज किया जाता है। इसके अलावा यदि आप अधरंग अटैक की समस्या से ग्रस्त है, तो न्यूरोसीटी हॉस्पिटल के डॉक्टर से जरूर मुलाकात करे और अपनी समस्या के बारे में खुल के यहाँ के अनुभवी डॉक्टरों से बात करे।

    निष्कर्ष :

    अधरंग या दिमागी अटैक क्या है इसके बारे में हम उपरोक्त आपको जानकारी दे चुके है, यदि आपमें भी ऐसी समस्या है तो बिना समय बर्बाद की किए किसी अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट के सम्पर्क में आए, क्युकि इस अटैक में समय का बहुत मत्वपूर्ण स्थान है। इसलिए आपको उपरोक्त बातो का ध्यान रखना है, नहीं तो ये समस्या आपकी जान पर भी बन सकती है।

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      What is neurological disorder? Types of disorders

      Neurological disorders affect the nervous system, which includes brain function and peripheral system. Because the brain starts developing before birth, it continuously develops throughout childhood and adulthood. But most brain cells develop before birth. That cell is called a nerve cell. Nerve cells control part of the body’s function. Psychiatrists provide the best  treatment to patients and also with friendly and personal care so patients feel comfortable getting treatment. 

      Neurological disorder

      Neurological disorders are the disorders of the brain that affect not only the brain but overall quality of life. Many people suffer from neurological disorders. But still, they do not know they are suffering from a neurological disorder. After knowing those symptoms, such as headache, stroke, and dementia, they understand neurological disorders.

       Type of neurological Disorders 

      • Alzheimer disease 
      • Multiple system atrophy
      • Rett syndrome 
      • Traumatic brain injury 
      • Stroke 
      • Migraine 
      • Spinal cord injury 
      • Dementia 
      • Multiple sclerosis

      Alzheimer disease

      Neurodegenerative disease, also known as Alzheimer’s condition, has brain cells damaged. Then people suffering from that condition affect learning, thinking, and memory. 

      Multiple system atrophy

      When nerve cells are damaged in the brain, multiple system atrophy is rare in the nervous system. 

      Rett syndrome

      Rett syndrome is a disorder caused by neurodevelopmental disorders. But in the genetic case, it was a rare chance to have this order. Rett syndrome suffers from mental and physical disability. Mostly this disorder is common in women.

      Traumatic brain injury 

      Children and adults both suffer from traumatic brain injury. This injury in brain external factors affects brain functions, so your brain does not work correctly. 

      Stroke

      Stroke means poor blood flow in the brain caused by cell death. Two types of stroke: the first one is hegemonic and ischaemic. Hypertension, high blood pressure, drinking alcohol, smoking, and diabetes are the hegemonic reasons. It affects blood vessels. Ischemic stroke comes when the blood supply in the brain is interrupted.  

      Parkinson disease  

      Parkinson’s disease, which people have, does not control body functions such as shaking and stiffness and does not control movement through the nervous system. 

      Migraine  

      Migraine is a neurovascular condition in which people suffer severe headaches. Mostly it aches one side of the head. Headaches occur by nausea and photophobia. 

      Spinal cord injury 

      Spinal cord injury can be traumatic or non-traumatic.

      Multiple sclerosis 

      This condition primarily affects more women compared to men. That is a neurological disorder because multiple sclerosis is an autoimmune. Which conditions include intention tremor and cerebellar dysarthria.

      How many people are affected by neurological disorders

      Billions of people worldwide suffer from many disorders. More than 5 million people die because of stroke. Many countries are affected by neurological disorders such as age, sex, income, or education. Thirty million have Alzheimer’s disease. Most people suffer from migraine disorder. Doctors invent new technology to cure these diseases effectively. Some doctors treat it through drugs. If you want to know about neurological disorders. Every year the Psychiatrists organizes counseling for people who understand these disorders. 

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        What are neurological disorders? How do they affect heart health?

        Many heart and nervous system diseases are common causes of death in individuals nowadays, as neurological diseases negatively affect the heart and other organs in the cardiovascular system. In case of any heart disease, only choose the Heart Hospital as you want to get treated by experts as the heart plays a vital role and is so sensitive it needs extra care.  

        Who treats and diagnoses the heart?  

        If you recognize any symptoms related to heart disease, you must seek the guidance of the Best Cardiologist.
        for early diagnosis and treatment. A cardiologist is qualified enough to spot the illness after performing specific examinations and clinical tests.  

        What types of neurological disorders escalate the risks of Cardiovascular disease?

        Even after taking medications for brain disorders, the risk of heart disease will still grow if you face Depression, anxiety, post-traumatic stress disorder, schizophrenia, autism, and epilepsy. There is a strong connection of nerves that transmit the action from the brain to the core, which is why Psychiatric disorders affect the heart. 

        Many studies and researchers have said and presented that All Psychiatric disorders do adversely regulate diseases related to the heart. In most cases, Psychiatric disorders trigger Arrhythmia, which affects the heartbeat rate and causes irregular rhythms. 

        Explain the condition of Arrhythmia. 

        It is a condition when the heart beats so irregularly, which happens due to the electrical signals that coordinate the heartbeat. When it works in a non-uniform manner, it is considered Arrhythmia. Sometimes this condition also becomes a life-threatening disease. 

        When the heart beats 50 and 100 beats per minute, it is considered normal, but, When the heart beats faster than usual, The resting heart rate is more significant than 100 beats a minute. In this condition, it is known as (tachycardia), and the opposite is when it beats so slowly as The resting heart rate is less than 60 beats a minute.is known as (bradycardia). 

        This condition can become a hurdle in daily activities and sometimes damages the heart, but you can control this situation by changing your lifestyle. 

        Symptoms of  Arrhythmia 

        You need a consultation session with an expert cardiologist if you ever experience the symptoms mentioned below. There are not many particular symptoms for this disease, but if you are experiencing fluttering in the chest, racing heartbeat and slow heart beat irregularly, Chest pain, and Shortness of breath more often than usual. 

        Suppose you have also experienced Anxiety, Fatigue, Lightheadedness or dizziness, Sweating and Fainting (syncope), or near fainting. In that case, the Psychiatric disorders you are dealing with are indeed affecting your mental health. 

        A drop in the pulse is a condition when a person Collapses in seconds, and the person’s breathing and pulse will stop. Pulse drop is also a type of Arrhythmia that is called ventricular fibrillation, which can cause a dramatic drop in blood pressure and this situation, a person needs emergency CPR (cardiopulmonary resuscitation) that only a trained physician and a heart doctor can do for someone who is trained in giving CPR.  

        Conclusion

        So if you are also dealing with any neurological; disease and discomfort with breathing, you must contact a cardiologist available at Deepak heart institute, as they are well-known for their fantastic services and life-saving techniques to help thousands of patients with severe heart problems. 

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          दिमाग की कमजोरी के लक्षणों को जानकर कैसे पाए इसका चुटकियों में इलाज ?

          बढ़ते काम की वजह से लोगों में दिमाग की कमजोरी की समस्या देखने को मिल रहीं है, दिमाग की कमजोरी किन कारणों से लोगों में नज़र आती है और लक्षणों की मदद से हम कैसे दिमाग की कमजोरी के इलाज के बारे में जानकारी हासिल कर सकते है इसके बारे में आज के लेख में बात करेंगे ;

          दिमाग में कमजोरी के कारण क्या है ?

          • यह बीमारी किसी भी उम्र में किसी भी व्यक्ति को अपना शिकार बना सकती है, लेकिन इस बीमारी का खतरा सबसे ज्यादा उन लोगों में अधिक पाया जाता है, जिन्हें धूम्रपान या तंबाकू की आदत होती है और जो लोग मधुमेह, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज आदि बिमारी का सामना कर रहें है। 
          • इसके अलावा जो लोग व्यायाम नहीं करते, ज्यादा घी का सेवन, तेल खाने वालों में, मोटे लोगो में, तली हुई व चर्बीयुक्त पदार्थ अधिक खाने वालों और ज्यादा शराब पीने वाले लोगों में भी यह परेशानी अधिक पाई जाती है। 
          • वहीं कुछ अनुभवी डॉक्टरों का कहना है की आनुवंशिकता और तनाव भी इस बिमारी के कारणों में शामिल है।

          लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट की मदद से आप दिमाग में कमजोरी के सटीक कारणों के बारे में जानकारी हासिल कर सकते है।

          क्या है दिमाग की कमजोरी ?

          • दिमाग को सही ढंग से काम करने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन चाहिए होता है, यदि दिमाग की कोशिकाओं तक ऑक्सीजन या अन्य पोषक तत्वों की प्रयाप्त मात्रा नहीं पहुंचती है, तो मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जो दिमागी कमजोरी के रूप में सामने आती है। 
          • यदि दिमाग के किसी प्रमुख हिस्से में रक्त पहुंचाने वाली कोशिका में थक्का जम जाए तो भी आपको दिमागी कमजोरी की समस्या का सामना करना पड़ता है।  
          • जब भी दिमाग का दौरा पड़ता है, तो एक मिनट के भीतर ही सभी प्रभावित कोशिकाएं दम तोड़ने लगती है।

          दिमाग में कमजोरी के लक्षण क्या है ?

          • मांसपेशियों की कमजोरी जिसे नसों की कमजोरी के ही लक्षण में गिना जाता है। दरअसल, इससे शरीर में तालमेल की कमी नजर आती है और ऐसा इसलिए होता है क्युकि दिमाग से शरीर के सभी अंग जुड़े होते है। जब ब्रेन में कमजोरी होती है, तो मांसपेशियों का तालमेल बिगड़ने लगता है।
          • अचानक से सिरदर्द या लगातार सिरदर्द का होना दिमाग की नसों की कमजोरी के लक्षण में शामिल है। और ऐसा इसलिए होता है क्युकी दिमाग में कमजोरी के कारण ब्लड सर्कुलेशन और ऑक्सीजन का सर्कुलेशन सही मायने में दिमाग को ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पाता है। 
          • नसों की कमजोरी के कारण कई बार झुनझुनी महसूस होती है। इसके अलावा कई बार ऐसा महसूस होता है कि शरीर ने अचानक से अपना आपा खो दिया हो।
          • दिमाग में कमजोरी के कारण कई बार हमारे पीठ में भी दर्द की समस्या को हमारे द्वारा देखा जाता है। 
          • ब्रेन की नसों में कमजोरी होने से कई दफा शरीर में झटके या दौरे आते है। इसके अलावा बोलचाल और याददाश्त से जुड़ी समस्याएं भी देखने को मिलती है। यदि आपके द्वारा भी उपरोक्त लक्षणों का सामना किया जा रहा है, तो इससे बचाव के लिए आपको बेहतरीन डॉक्टर या लुधियाना में बेस्ट न्यूरोसर्जन के संपर्क में आना चाहिए।

          दिमाग की नसों को मजबूत करने के लिए क्या खाए ?

          • दिमाग की नसों को मजबूत करने के लिए ऐसे ढेर सारे फूड्स है, जो प्राकृतिक रूप से दिमागी शक्ति को बढ़ाने का काम करते है। 
          • फूड्स की बात करें तो इसमें घी, जैतून का तेल, अखरोट, भीगे हुए बादाम, किशमिश, खजूर और ताजे फल शामिल है। इसके अलावा दालें, बीन्स, पनीर और मटर भी दिमाग को तेज बनाने का काम करती है।

          दिमाग की कमजोरी से कैसे करें खुद का बचाव ?

          • इस बिमारी को दूर करने के लिए मांसपेशियों में होने वाले खिंचाव को कम करके गतिहीनता को दूर किया जाता है, इसलिए जरूरी है की आप रोज़ाना एक्सरसाइज़ करें। 
          • लेकिन यह उपाय मरीज को पूरी तरह ठीक नहीं कर पाते, इसलिए डॉक्टर रोगी की हालत व गतिहीनता को देखकर उपचार करते है। 
          • चीनी व नमक का कम उपयोग भी दिमाग को मजबूत बनाता है। 
          • इस बीमारी से बचाव के लिए आप पौष्टिक चीजों का सेवन करें और ख़राब खाने की चीजों से दुरी बनाए। 

          यदि आप चाहते है की आपका दिमाग मजबूत हो जाए तो इसके लिए आप न्यूरो सीटी हॉस्पिटल के अनुभवी सर्जन के सम्पर्क में जरूर आए। लेकिन इस हॉस्पिटल का चयन तभी करें जब आपके लक्षण बहुत ज्यादा गंभीर हो जाए।

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            न्यूरो सम्बंधित समस्याओं का सामना करना काफी मुश्किल है, लोगों के लिए इसके अलावा इस समस्या से कैसे हम खुद का बचाव कर सकते है और किन बातो का ध्यान रखना इसमें जरूरी होता है इसके बारे में बात करेंगे इसलिए इसको जानने के लिए आर्टिकल के साथ अंत तक जरूर से बने रहें;

            क्या है न्यूरो सम्बंधित बीमारियां ?

            • न्यूरोलोजी संबंधी बीमारियों में आमतौर पर बोलने में अंतर का आना, शारीरिक असंतुलन, शरीर में अकड़न, कमजोरी, याददाश्त में कमी, उठने, बैठने चलने में परेशानी, शरीर में कंपन, मांसपेशियों का कठोर होना निगलने में कठिनाई आदि लक्षण पाए जाते हैं। न्यूरो संबंधी अधिकांश बीमारियों का इलाज प्रारंभिक अवस्था में पाना संभव होता है।
            • तो तंत्रिका विकार या न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर आमतौर पर नर्वस सिस्टम को प्रभावित करने वाले वायरल, जीवाणु, कवक और परजीवी संक्रमण के कारण होते हैं, जिन्हें न्यूरो सम्बंधित बीमारियां की श्रेणी में शामिल किया जाता है तो वहीं नर्वस सिस्टम की बीमारियों में अल्जाइमर रोग, डिमेंशिया, मिर्गी, सेरेब्रोवास्कुलर बीमारियां जैसे माइग्रेन, स्ट्रोक और अन्य सिरदर्द शामिल होते हैं। 

            यदि आपको भी न्यूरो सम्बंधित समस्याओं या बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है तो इससे निजात पाने के लिए बेस्ट न्यूरोसर्जन लुधियाना का चयन करें।

            न्यूरो सम्बंधित समस्याओं के लक्षण क्या है ?

            • सिर, गर्दन, पीठ या शरीर के विभिन्न अंगों में दर्द का होना।  
            • अंगों का फड़कना, या झुनझुनी और कमजोरी का होना। 
            • आंखों की रोशनी का कमजोर होना, चक्कर आना और बोलने या निगलने में परेशानी का सामना करना। 
            • दौरे पड़ना, अंगों का मरोड़ना और बार-बार बेहोश होना। 
            • मांसपेशियों में अकड़न, कपकपी, याददाश्त या मानसिक क्षमता का कमजोर होना आदि।

            अगर आप भी इन लक्षणों से परेशान है तो समय रहते किसी बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना का चयन करें।

            न्यूरो सम्बंधित समस्याओं या बीमारियों से कैसे पाएं निजात ?

            • न्यूरोसर्जन मस्तिष्क की चोटों, ट्यूमर को हटाने और कार्पल टनल सिंड्रोम से निजात दिलवाते हैं। दोनों चिकित्सक अपने रोगियों के उचित इलाज के लिए मिलकर काम करते हैं, और आवश्यकतानुसार चिकित्सा और शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं को इकट्ठा करते हैं।
            • न्यूरोलॉजिकल डिस्ऑर्डर में रोगों के लिए कोई त्वरित (जल्दी) समाधान नहीं है, लेकिन रोगी की अच्छी देखभाल उसे लंबे समय तक स्वस्थ रख सकती है
            • प्रभावी उपचार के लिए एक अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लें, वही न्यूरोलॉजिकल स्थिति को जानने के लिए न्यूरोलॉजिस्ट को कई तरह के परीक्षण करने पड़ सकते हैं। वही कुछ मामलों में, उन्हें गंभीर परिस्थितियों में ऑपरेशन करने के लिए न्यूरोसर्जन या इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजिस्ट के मदद की जरूरत हो सकती है। 
            • एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इस रोग में किसी को घबराना नहीं चाहिए और जरूरी भावनात्मक समर्थन और देखभाल की व्यवस्था करनी चाहिए, क्युकि ऐसे मामलों में कई बार लोग ठीक भी हो जाते हैं। 

            अगर आप भी न्यूरो सम्बंधित समस्याओं से छुटकारा पाना चाहते है तो इससे निजात पाने के लिए न्यूरो सीटी हॉस्पिटल से बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर का चयन का चयन करें। 

            निष्कर्ष :

            अगर आपको भी न्यूरो सम्बंधित समस्याओं ने परेशान कर रखा है तो इससे निजात पाने के लिए किसी अच्छे डॉक्टर का चयन करें क्युकी अगर आप इसके शुरुआती लक्षणों को ध्यान में रख के इसका उपचार कराएंगे तो आपको आपकी परेशानी का हल जल्दी मिल जाएगा। इसलिए इसके लक्षण को नज़रअंदाज़ न करें और किसी भी तरह की दवाई को लेने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह ले।

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              Strategies and Support for Navigating Life with Left-Sided Hemiplegia

              Living with left-sided hemiplegia can give its own set of issues, compelling individuals to haggle all aspects of life with boldness and guts. Left-sided hemiplegia is a problem that causes shortcomings or paralysis on the left half of the body because of harm to the right half of the brain. Left-sided hemiplegia, whether brought about by a stroke, traumatic brain injury, or an inherent problem, can significantly affect regular exercises and in general personal satisfaction.

              Understanding Left-Sided Hemiplegia

              A problem that causes shortcomings or paralysis on the left half of the body is known as left-sided hemiplegia. Harm to the right half of the mind, normally as an outcome of a stroke, extreme brain injury, or an inborn problem, is generally the reason. This disease can affect an individual’s ability to direct day-to-day activity and take part in various parts of life.

              Seeking Expert Care at Neuro Hospitals in Ludhiana

              Seeking expert medical attention is critical while dealing with left-sided hemiplegia. There are respectable neuro hospitals in Ludhiana that are equipped with specialized facilities and competent medical personnel who can give complete care to people suffering from neurological problems. NeuroCiti facility is one such recognized facility, with a multidisciplinary approach to neurology and modern treatment choices suited to individual needs.

              Consulting with a Neurologist in Ludhiana

              It is essential to contact a neurologist who spends significant time in neurorehabilitation and knows the troubles of left-sided hemiplegia to plan a proper treatment procedure. A neurologist in Ludhiana, like those at NeuroCiti Hospital, can survey every patient’s specific necessities and foster a customized care plan.

              Therapeutic Approaches for Left-Sided Hemiplegia

              Physical Therapy: Physical treatment can assist individuals with left-sided hemiplegia to work on their versatility and strength. A Physical specialist can make a custom-made preparation program to further develop balance, coordination, and muscle control.

              Supportive Resources for Individuals and Families

              Besides clinical intervention, people and families impacted by left-sided hemiplegia expect admittance to support organizations and services. Here are a few resources to consider:

              Support Groups: Connecting with individuals who have had similar situations can be really beneficial. Look for local support groups or online communities for people with left-sided hemiplegia and their loved ones. These groups provide a secure environment for people to discuss their experiences, seek guidance, and receive emotional support.

              Educational Workshops: Attend hemiplegia management instructional programs and seminars. Expert speakers, practical demonstrations, and the most recent developments in treatment choices are frequently featured at these events. These sessions provide individuals with knowledge and strategies to effectively manage their disease.

              Online Resources: Several websites, including the Flint Rehab entry on left-sided hemiplegia, provide educational content, ideas, and tools to help people understand and manage the disease. Another worthwhile resource to investigate is NeuroCiti Hospital, which provides thorough information on neurological diseases and treatment options.

              Conclusion

              Living with left-sided hemiplegia can be difficult, but with the correct methods, support, and access to specialist care, people can live full lives. Neuro Hospital in Ludhiana, such as NeuroCiti Hospital, as well as neurologists that specialize in neurorehabilitation, can give essential medical care. Individuals with left-sided hemiplegia can improve their quality of life and thrive despite the condition by combining therapeutic approaches such as physical, occupational, and speech treatments with the help of local communities, support groups, and educational resources.

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                Neurological Problems: तंत्रिका संबंधी बिमारिओ के इलाज के लिए न्यूरोलॉजिस्ट या न्यूरोसर्जन में से किसे चुने?

                तंत्रिका संबंधी समस्याएं (Neurological Problems )

                मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और तंत्रिका तंत्र से संबंधित मुद्दों का इलाज और निदान न्यूरोलॉजी द्वारा किया जाता है। तकनीक की प्रगति तथा बढ़ते हुए अनुसधान के कारण न्यूरोसर्जरी में नई तकनीकों का उपयोग किया जाने लगा है।  इन बीमारियों से लड़ने के लिए करने के लिए बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना के मार्ग दर्शन की अत्यंत आवश्यकता होती है।

                एक क्षेत्र में कई सरे विद्यावान काम करते है, अपनी समस्या के लिए किस विद्यावान से संपर्क करे यह खोजना बहुत कठिन हो गया है। हमने अक्सर सुना होगा की दिमागी बीमारियों को ठीक करने के लिए एक न्यूरोलॉजिस्ट तथा एक न्यूरोसर्जन की आवश्यकता होती है।  लेकिन दोनों चिकितीसाओ का काम बेहद अलग है।  आइये इसे गंभीरता से समझते है।

                एक न्यूरोलॉजिस्ट तथा न्यूरोसर्जन के बीच का अंतर

                 एक न्यूरोलॉजिस्ट मस्तिष्क तथा तांतिके प्रणाली की समसयाओ को पता लगाने तहत उसको ठीक करने में माहिर होते है। यह और भी अन्य समस्याओ का इलाज करते है जैसे की सीखने की समस्या, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र जैसी और कई बीमारिया।

                • न्यूरोसर्जन एक ऐसे शल्य चिकित्सक होते है जो की काफी लम्बे समय से चलते आ रही बिमारिओ का इलाज ऑपरेशन द्वारा करते है जो की हमारे तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव डालते है। न्यूरोसर्जन पार्किंसंस रोग, एन्यूरिज्म और जन्मजात अक्षमता जैसी बिमारिओ का इलाज करते है।

                न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श करने का सही समय

                 न्यूरोलॉजिस्ट्स से परामर्श करने से पहले आपको ऐसे संकेतो के बारे में अनुभव होना चाहिए जिनके लिए आपका न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श करना अनिवार्य है। आइये ऐसे संकेतो को जानते है:

                • निरंतर चक्कर आना
                • संतुलन बनाए रखने में कठिनाई
                • मासपेशिओ में थकान
                • लगातार सिर में दर्द का उठाना
                • भावनाओं में परिवर्तन
                • सिर में भारीपन का एहसास होना

                न्यूरोसर्जन से परामर्श करने का सही समय

                 नेरुआसुरजों भी न्यूरोलॉजिस्ट की तरह बहुत अन्य बिमारिओ का इलाज करते है।  जयादातर मरीज न्यूरोसर्जन के पास न्यूरोलॉजिस्ट द्वारा सुझाव देने पर ही जाते है क्यूंकि न्यूरोसर्जन पूरे तंत्रिका प्रणाली और शरीर की बिमारिओ का इलाज ऑपरेशन द्वारा करते है। आइये उन समजाओ के बारे में जानते है:

                • डिस्क निकालना
                • क्रानिओटोमी
                • लम्बर पंक्चर
                • इंडोवैस्कुलर की मरम्मत
                • अनुरिस्म को ठीक करना

                बीमारी का इलाज

                 न्यूरोसर्जन तथा न्यूरोलॉजिस्ट में अंडर करते समय एक बात का धयान रखना अत्यंत आवशयक है की वह कोनसे प्रकार की बिमारिओ का निरक्षण करते है।

                • जहा न्यूरोलॉजिस्ट मिर्गी, अल्जाइमर रोग, परिधीय तंत्रिका विकार और एएलएस जैसी न्यूरोलॉजिकल स्थितियों के इलाज में दिलचस्पी रखते हैं।’
                • वही दूसरी ओर न्यूरोसर्जन टूमओर से निजात, मस्तिष्क की चोटों तथा कार्पल टनल जैसी बिमारिओ से छुटकारा दिलाने में सहायता करते है।
                • इन दोनों चिकित्साओं द्वारा संभाले जाने वाली बिमारिओ में कुछ समान्यताये भी है। उद्धरण द्वारा समझिये: यदि कोई मरीज मस्तिष्क के टूमओर से जूझ रहा है तो एक न्यूरोलॉजिस्ट इस अमरीज को ऑपरेशन के लिए न्यूरोसर्जन के पास भेज सकते है।
                • अपने सामान्य चिकिसक से संपर्क करे तथा उसनसे सुझाव ले की किस विषेद्याज्ञा से मिलने से आपको आपकी परेशानिओ से निजात मिकलेगा।

                एक विश्वसनीय सलाह

                 यदि आप भी ऐसी बिमारिओ से जूझ रहे है जिनका इलाज एक न्यूरोलॉजिस्ट या न्यूरोसर्जन ही कर सकते है तो बिना देर करते हुए न्यूरोसिटी हॉस्पिटल से संपर्क करे और अपनी साडी बिमारिओ का प्रभावी उपचार पाए।

                तंत्रिका संबंधी समस्याएं

                मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और तंत्रिका तंत्र से संबंधित मुद्दों का इलाज और निदान न्यूरोलॉजी द्वारा किया जाता है। तकनीक की प्रगति तथा बढ़ते हुए अनुसधान के कारण न्यूरोसर्जरी में नई तकनीकों का उपयोग किया जाने लगा है।  इन बीमारियों से लड़ने के लिए करने के लिए बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना के मार्ग दर्शन की अत्यंत आवश्यकता होती है।

                एक क्षेत्र में कई सरे विद्यावान काम करते है, अपनी समस्या के लिए किस विद्यावान से संपर्क करे यह खोजना बहुत कठिन हो गया है। हमने अक्सर सुना होगा की दिमागी बीमारियों को ठीक करने के लिए एक न्यूरोलॉजिस्ट तथा एक न्यूरोसर्जन की आवश्यकता होती है।  लेकिन दोनों चिकितीसाओ का काम बेहद अलग है।  आइये इसे गंभीरता से समझते है।

                एक न्यूरोलॉजिस्ट तथा न्यूरोसर्जन के बीच का अंतर

                 एक न्यूरोलॉजिस्ट मस्तिष्क तथा तांतिके प्रणाली की समसयाओ को पता लगाने तहत उसको ठीक करने में माहिर होते है। यह और भी अन्य समस्याओ का इलाज करते है जैसे की सीखने की समस्या, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र जैसी और कई बीमारिया।

                • न्यूरोसर्जन एक ऐसे शल्य चिकित्सक होते है जो की काफी लम्बे समय से चलते आ रही बिमारिओ का इलाज ऑपरेशन द्वारा करते है जो की हमारे तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव डालते है। न्यूरोसर्जन पार्किंसंस रोग, एन्यूरिज्म और जन्मजात अक्षमता जैसी बिमारिओ का इलाज करते है।

                न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श करने का सही समय

                 न्यूरोलॉजिस्ट्स से परामर्श करने से पहले आपको ऐसे संकेतो के बारे में अनुभव होना चाहिए जिनके लिए आपका न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श करना अनिवार्य है। आइये ऐसे संकेतो को जानते है:

                • निरंतर चक्कर आना
                • संतुलन बनाए रखने में कठिनाई
                • मासपेशिओ में थकान
                • लगातार सिर में दर्द का उठाना
                • भावनाओं में परिवर्तन
                • सिर में भारीपन का एहसास होना

                न्यूरोसर्जन से परामर्श करने का सही समय

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                • डिस्क निकालना
                • क्रानिओटोमी
                • लम्बर पंक्चर
                • इंडोवैस्कुलर की मरम्मत
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                  What Are The Major Paediatric Neurological Deformities And Their Treatment?

                  Neurological disorder in children.

                  Neurologic problems are those medical conditions that are related to the function Brain, spine, and nervous system. These problems can occur due to brain injury, depression, genetics, by birth, or many other different reasons. For effective treatment, you should get in touch with a well-known Neuro Hospital In Ludhiana.

                  Paediatric Neuro disorders are seen commonly nowadays. Most of the neuro issues in children occur at the time of birth or in the early development years. The prime reason for this is birth defects or developmental problems that result in physical and behavioural changes in children. At Neurociti Hospital, we have a top Paediatric Neurologist In Ludhiana for effectively treating neuro deformities in children.

                  Symptoms of Neuro Disorder in children:

                  The symptoms of paediatric neuro deformities are seen at the developing age of the child; some of the common symptoms are:

                  • Weak bones and muscles
                  • loss of sensation in different or particular body part
                  • Difficulty in doing any activity
                  • Poor cognitive skills
                  • Pain & Seizures
                  • Less alert and so on.

                  Any damage to the nervous system is the prime reason for neurologic disorders. In case you get a brain or spinal injury, you should immediately contact  Best Neurosurgeon In Ludhiana at Neurociti Hospital. The immediate treatment can save your life and rejuvenate your complete well-being.

                  Effects of Neuro Disorders on Children

                  The neuro disorder can affect the child temporarily or permanently. There are different reasons to get Neuro deformity, as broach in the above paragraphs. However, some medications and therapy can help cure some disorders.

                  The common Health issues cause due to neurologic disorders are:

                  1. ADHD– Attention Deficit Hyperactivity is one of the common mental issues in children, in which they are unable to stay alert and perform certain activities
                  2. Autism- it is also one of the developmental disorders in which a disabled kid is not able to communicate and interact appropriately.
                  3. Dyspraxia- The neurologic disorder affects the child’s agility and physical movements. However, it does not affect the intelligence level.
                  4. Cerebral Palsy- it is a common disorder in which a kid is not able to perform certain activities related to motto skills that require working together with the nervous system and body parts.

                  Therefore, there are various paediatric neuro disorders. The systematic approach to the disorder can help to cure it. The condition affects the child’s physical movement and behaviour; however, proper medications and Therapies under expert medical practitioners can help the child for better recovery.

                  Final word

                  To conclude, children are the gift of the Almighty. However, paediatric neuro disorder due to congenital disabilities or other reasons affects the child’s abilities of coordination, and motor skills.

                   

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                    What are the causes of neurological disorders? How does it affect the babies?

                    NConditions

                    Neurological conditions are diseases affecting the nervous system and brain. With the unwanted changes happening in the nervous system or brain affects the overall health. Neurological disorders require you to consult the best Neuro Hospital in Punjab as they can affect the nerves, spinal column, brain, and other parts.

                    Moreover, the effect that occurs can be in terms of physical, emotional, cognitive, and behavioral symptoms. The medical assistance of the Best Neurologist in Punjab is needed. Especially if you notice your child’s initial years of development are not going like normal, then don’t delay because the problem can worsen with time.

                    What are the common causes of Neurological disorders?

                    The brain and spinal cord are protected through membranes and nerves known to have a higher risk of injury. Neurological disorders can affect the entire system and lead to dysfunction. Moreover, there are lifestyle or nutrition-related problems, injuries, and illnesses. In some cases, the problems are present from birth, which requires a different approach altogether.

                    How does neurological disorder affect the health of babies?

                    Now you know the causes of neurological disorders, it’s time that you understand how they can affect the health of babies. It’s like the disorders are in huge numbers, so you mustn’t delay and seek the most effective care at the earliest.

                    What are the common neurological disorders?

                    Here, I have enlisted some common neurological disorders you need to know about.

                    • Autism

                    Autism is a neurodevelopmental condition in which the child has problems contacting others socially, repeated patterns of behavior, and impaired cognitive skills.

                    • Dyspraxia

                    Dyspraxia disorder makes it difficult for the child to properly control physical movements.

                    • Attention deficit hyperactivity disorder

                    ADHD is another common neuro condition when the child has a problem staying alert and cannot control impulses.

                    • Dyslexia

                    Dyslexia is the state of learning disabilities when the child has problems writing, reading, or doing any other activity.

                    • Cerebral palsy

                    Cerebral palsy is another common problem when a child’s motor skills have problems. Moreover, there are increased chances of brain injury that occurs before or after birth.

                    The reason for the condition is that the fetus doesn’t develop like normal during pregnancy. Moreover, there’s an increased risk of causing brain damage.

                    Spine Care does need utmost attention, just like Neuro health

                    Both spinal and neuro care require attention. As both are linked to each other, therefore you mustn’t delay and consult one of the best spine doctor without delaying anything. Take immediate medical assistance  to improve overall health.

                    The right treatment and effective neuro care

                    With the right treatment, it’s easier to manage the problem. Moreover, the assistance helps to minimize the symptoms and helps to improve the overall quality of life. The type of treatment that you need depends on what condition you have.

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