क्या वाकई अनार और मिर्च का सेवन बचा सकता है आपको पार्किन्संस रोग से? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

बढ़ती उम्र के कारण लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जिसमें पार्किंसंस बीमारी भी शामिल होती है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि पार्किंसंस रोग एक इस तरह की समस्या है, जो एक इंसान की जीवन शैली को काफी ज्यादा प्रभावित कर देती है। यह बीमारी एक इंसान के बुढ़ापे को काफी ज्यादा दिक्क्त में डाल देती है। ऐसे में, कई लोग सोचने लग जाते हैं, कि यह बीमारी फिर बुजुर्ग लोगों को ही होती है, पर ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, कि यह बीमारी सिर्फ बुढ़ापे में ही आके तंग करती है, बल्कि यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है और किसी को भी तंग कर सकती है। इस तरह की बीमारियों का पता चलते ही आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ज्यादा दिनों तक नज़रअंदाज करने पर यह समस्या सेहत के लिए हानिकारक भी साबित हो सकती है। 

आम तौर पर, आज के समय में हर इंसान चाहता है, कि वो सेहतमंद रहे और उसको किसी भी तरह कि बीमारी का सामना न करना पड़े, चाहे वो पार्किन्संस रोग हो या फिर कोई अन्य बीमारी। दरअसल, किसी भी तरह की समस्या से बचने के लिए लोग न जाने कितने ही उपायों का इस्तेमाल करते हैं, या फिर वो समस्या पर ध्यान ही नहीं देते हैं, जो सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं होता है। आम तौर पर, अगर आप किसी भी तरह की समस्या से अपना बचाव करना चाहते हैं, तो इसके लिए डेली लाइफ में खाने पीने वाली चीजों के ऊपर ध्यान देने कि काफी ज्यादा जरूरत होती है। डॉक्टर के अनुसार, रोजाना खाने -पाने वाली चीजें न केवल आपको शारीरिक तौर पर मजबूती प्रदान करती हैं, बल्कि आपको कई तरह की समस्याओं से भी बचाने में मदद प्रदान करती हैं। इसलिए, समस्या से बचने के लिए आपको सबसे पहले अपने खान पान को ही बदलना होता है। अगर रोजाना संतुलित भोजन का सेवन किया जाये तो इस तरह की समस्या से अपना बचाव किया जा सकता है। 

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि पार्किन्संस जैसी समस्या को लेकर कोई न कोई रिसर्च होती ही रहती है, जिस में अनार और मिर्च के सेवन से पार्किन्संस रोग से अपना बचाव किया जा सकता है। अब ऐसे में कई लोग जानना चाहते हैं, कि क्या वाकई अनार और मिर्च के सेवन से पार्किन्संस रोग से अपना बचाव किया जा सकता है? दरअसल, आपको बता दें, कि अनार और मिर्च का सेवन आपको पार्किंसंस बीमारी से पूरी तरीके से नहीं बचा सकता है, पर हाँ शोध के अनुसार, इनका सेवन पार्किंसंस बीमारी के जोखिम को कम करने में आपकी काफी ज्यादा सहायता कर सकता है, क्योंकि इन में न्यूरोप्रोटेक्टिव जैसे कई तरह के गुण मौजूद होते हैं। आम तौर पर, मिर्च में पाए जाने वाले निकोटीन और अनार में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट दरअसल, दिमाग के सेल्स को सुरक्षित रखने में आपकी काफी ज्यादा सहायता करते हैं। हालांकि, अगर आप अपनी सेहत का ख्याल रखना चाहते हैं, तो आपको अपनी डाइट में आनर और मिर्च के सेवन के बारे में जरूर जानकारी लेनी चाहिए। यह इस रोग को कम करने में सहायक हो सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

अनार पार्किंसंस बीमारी से कैसे बचा सकता है?

आम तौर पर, उन लोगों में पार्किंसंस रोग होने की संभावना काफी ज्यादा होती है, जो ब्लड प्रेशर जैसी समस्या से जूझ रहे होते हैं। और वहीं अनार में मौजूद टैनिन, पॉलिफिनॉल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे कई तरह के गुण ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में काफी ज्यादा सहायता करते हैं। इसके अलावा, अनार में पर्याप्त मात्रा में विटामिन भी पाया जाता है, जो न केवल एक व्यक्ति के तंत्रिका तंत्र को पोषण प्रदान करता है, बल्कि इससे पार्किन्संस रोग से अपना बचाव भी किया जा सकता है। इसलिए, पार्किन्संस रोग से बचने के लिए अनार का सेवन लाभदायक होता है। 

मिर्च पार्किंसंस बीमारी से कैसे बचा सकती है?

दरअसल, जर्नल एनल्स ऑफ न्यूरोलॉजी में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, मिर्च के सेवन से पार्किंसंस रोग की सम्भावना को कम किया जा सकता है। शोध के अनुसार, मिर्च में पाया जाने वाला निकोटीन पार्किन्संस रोग के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद होता है। 

निष्कर्ष :अनार और मिर्च का सेवन पूरी तरीके से पार्किंसंस बीमारी को रोक नहीं सकता, पर इन में पाए जाने वाले न्यूरोप्रोटेक्टिव गुण इस समस्या के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं। मिर्च में पाया जाने वाला निकोटीन और अनार में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट ब्रेन सेल्स को बचाने में आपकी काफी ज्यादा मदद कर सकते हैं। पार्किंसंस बीमारी कोई लाइलाज बीमारी नहीं है, पर इस समस्या का इलाज इतना आसान भी नहीं है। इसलिए, समस्या पर समय रहते ध्यान देना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इस के लिए आप अपनी डाइट में अनार और दूसरों फलों के सेवन को शामिल करके अपने तंत्रिका तंत्र को मजबूत कर बना सकते हैं। इस बात से यह तय होता है, कि अनार और मिर्च के सेवन से पार्किंसंस रोग के खतरे को कम किया जा सकता है। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और दिमाग से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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    क्या आपका दिमाग भी थोड़ा सा काम करते ही थक जाता है? डॉक्टर से जानें, इससे राहत पाने के आसान उपायों के बारे में!

    दरअसल, आज की तेज रफ़्तार भरी जिंदगी में लोग रोज एक ही काम करते -करते थक जाते हैं और वो इससे काफी ज्यादा परेशान और काफी ज्यादा थकान महसूस करने लग जाते हैं। इसके अलावा, इसकी वजह से कई लोग छोटे-छोटे काम करने में भी दिमागी थकान महसूस करने लग जाते हैं। जिसमें मोबाइल या फिर कंप्यूटर पर ईमेल वगैहरा चेक करना या फिर घर में कपड़ों को तह मरना जैसे काम शामिल हो सकते हैं। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि अक्सर छोटे-छोटे काम करके ही दिमागी थकान महसूस करना कोई आलस नहीं होता है, बल्कि यह आपकी दिमागी थकान का एक बहुत बड़ा संकेत होता है, जिसका उत्पादन तब होता है, जब आपके दिमाग की ऊर्जा जल्दी खत्म होनी शुरू हो जाती है। 

    दरअसल, डॉक्टर का इस पर कहना है, कि यह कोई आलस की समस्या नहीं होती है, बल्कि माहवारी के बाद इस तरह के मामलों में काफी ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई है, जो आम तौर पर, नींद में होने वाली कमी, लंबे समय के तनाव, चिंता, वर्कआउट में कमी और यहां तक कि थायराइड जैसी दिक्कतों से जुड़ी हुई होती है। आम तौर पर हम में से कई लोग इस तरह की स्थिति को आलस या फिर आम समझ कर नज़रअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर या फिर लगातार बनी रहने पर दिमाग के लिए काफी ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकती हैं। ऐसे में, दिमागी थकान होने जैसी स्थिति के कई लक्षण आपको महसूस हो सकते हैं, जिसमें हर छोटे-से -छोटे काम को टालते रहना, काफी ज्यादा चिड़चिड़ापन महसूस करना और साथ में अचानक से दिमाग का बंद होना जैसे सब कुछ शटडाउन हो जाना जैसा महसूस हो सकता है। इस तरह की स्थिति होने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं, या फिर एक अच्छी बात यह भी हो सकती है, कि इस तरह की स्थिति से राहत पाने के लिए आप कुछ उपायों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसमें सबसे पहले अपनी नींद को प्राथमिकता देना, 90 से 20 रूल को अपनाना, दिमाग को सही फ्यूल देना, अपने आसपास हलचल रखना और साथ में डिजिटल डिटॉक्स और बाउंड्री सेट करना जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं। आम तौर पर, इन उपायों का इस्तेमाल करके आप अपनी मानसिक ताकत को वापिस पा सकते हैं और अच्छी जिंदगी बिता सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

    1. नींद को प्राथमिकता देना 

    इस तरह किस स्थिति से बचने के लिए रोज एक आरामदायक और सात से नौ घंटे की नींद लेना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, इससे न केवल शरीर ठीक रहता है, बल्कि दिमाग की स्थिति भी ठीक रहती है। आम तौर पर, सोने से पहले रूटीन सेट करें, जिस में नींद लेने से पहले अपने कमरे की लाइट को बिल्कुल कम करना, मोबाइल और टीवी की स्क्रीन से दूर रहना और साथ में कैमोमाइल जैसी हर्बल ड्रिंक का सेवन करना शामिल हो सकता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन के मुताबिक, एक व्यक्ति की नींद में कमी होने पर दिमाग का फ्रंट हिस्सा बिल्कुल भी ठीक से काम नहीं कर पाता है, जिसकी वजह से छोटे- छोटे काम करने पर भी काफी ज्यादा दिक्कत महसूस होती है। इसलिए, सबसे पहले अपनी नींद को पूरा करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। 

    1. 90 से 20 रूल को अपनाना 

    आम तौर पर, इस तरह की स्थिति से राहत पाने के लिए आप 90 से 20 के रूल को अपना सकते हैं। इससे आप काफी ज्यादा रिलेक्स फील कर सकते हैं और अपने काम को भी अच्छे तरीके से कर सकते हैं। दरअसल, इस नियम के मुताबिक कम से कम 90 मिनट तक काम करें और फिर लगभग 20 मिनट तक का ब्रेक लें। इस दौरान ब्रेक में कहीं बाहर टहलें, गहरी सांस लें, या फिर कोई हल्का संगीत सुने, जिससे आपको राहत मिलती हो और दिमाग को शांति प्राप्त होती हो। आम तौर पर, ऐसा करने पर स्‍ट्रेस हार्मोन बढ़ने से काफी ज्यादा बचाव होता है और साथ में दिमाग में मोटिवेशन बना रहता है।

    1. दिमाग को सही फ्यूल देना 

    दरअसल, अगर आप भी किसी भी काम को करते वक्त दिमागी थकान महसूस करते हैं, तो इस दौरान अपने दिमाग को सही फ्यूल देना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आमतौर पर, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि मानसिक थकान की शुरुआत अक्सर ब्लड शुगर के गिरने की वजह से होती है। इस तरह की स्थिति में, हर तीन से चार घंटे में संतुलित स्नैक्स का सेवन करें, जिसमें साबुत अनाज वाले टोस्ट पर एवोकाडो या फिर दही के साथ नट्स का सेवन करना शामिल हो सकता है। इस तरह की समस्या से राहत पाने के लिए हर रोज तकरीबन दो से तीन लीटर तक पानी का सेवन करें और ओमेगा-3 से भरपूर आहार का सेवन करें। ऐसा करने पर न केवल दिमागी सूजन कम होती है, बल्कि इससे दिमाग की थकान भी काफी दूर हो जाती है। इसलिए, रोजाना इन का सेवन करना दिमाग के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद साबित होता है।

    निष्कर्ष: दिमागी थकान को दूर करने के लिए और दिमाग को पहले जैसा सेहतमंद बनाने के लिए आप इन उपायों का इस्तेमाल कर सकते हैं। आखिरकार नियमितता से ही तो ताकत वापस आती है और दिमाग लचीला बनता है। सही तरीकों का इस्तेमाल करके ही तो आप छोटे-छोटे कामों को आसानी से कर पाएंगे। इन उपायों का इस्तेमाल करने के बाद भी अगर दिमाग थकान में किसी भी तरह का कोई भी प्रभाव न दिखे, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और दिमाग से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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      • February 27, 2026

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      बढ़ती उम्र के कारण लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना…

      पैदल चलने से पीठ दर्द को कौन से लाभ प्राप्त हो सकते हैं? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!
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      • February 14, 2026

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      आज के समय में लोगों में हड्डियों से जुड़ी तरह-तरह की समस्याओं…

      पैदल चलने से पीठ दर्द को कौन से लाभ प्राप्त हो सकते हैं? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

      आज के समय में लोगों में हड्डियों से जुड़ी तरह-तरह की समस्याओं का होना काफी ज्यादा आम हो गया है। ऐसे में, पीठ में दर्द होना भी काफी ज्यादा आम है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि शरीर से जुड़ी ऐसी कई तरह की समस्याएं हैं, जिनका होना काफी ज्यादा आम होता है। ऐसे ही, लगभग दुनिया भर में पीठ दर्द होना सबसे आम सेहत समस्याओं में से एक है, जो किसी भी उम्र के लोगों पर अपना बुरा प्रभाव डाल सकती है। आम तौर पर, एक व्यक्ति के पीठ में दर्द होने के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें एक व्यक्ति का काफी लंबे वक्त तक एक ही जगह पर बैठे रहना, कोई भी कसरत न करना, ज्यादा देर तक झुक कर बैठे रहना, गलत मुद्रा या फिर गतिहीन जीवनशैली का होना जैसे कारण शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इस तरह की समस्या से छुटकारा पाने के लिए अक्सर डॉक्टरों द्वारा दवाएं, फिजियोथेरेपी और रोजाना आराम करने की सलाह को प्रदान किया जाता है। पर, कुछ लोग इन के चलते इस समस्या से छुटकारा पाने के एक आसान और एक आरामदायक उपाय को नज़रअंदाज कर देते हैं, जो कि पैदल चलना होता है। 

      आम तौर पर, इसके बारे में सभी जानते हैं, कि पैदल चलना न केवल हमारी सेहत के लिए बेहतर होता है, बल्कि इससे कई तरह की बीमारियां भी ठीक हो जाती हैं। दरअसल, इस तरह की स्थिति में, बहुत से लोग जानना चाहते हैं, कि क्या वाकई पैदल चलने से पीठ दर्द ठीक होता है और पैदल चलने से पीठ दर्द को कौन-कौन से लाभ प्राप्त हो सकते हैं? दरअसल, इस पर डॉक्टर का कहना है, कि अगर कोई व्यक्ति रोजाना पैदल चलता है, तो उसके शरीर की मुद्रा, लचीलेपन और मांसपेशियों की ताकत में काफी ज्यादा सुधार देखा जाता है, जिससे उसकी पीठ में होने वाला दर्द काफी ज्यादा कम हो जाता है। इसके साथ ही, पैदल चलने से पीठ दर्द को कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं, जिस में रक्त संचार में काफी सुधार होना, कमर और पीठ की मांसपेशियों को मजबूती देना, शारीरिक मुद्रा में सुधार होना, कठोरता को कम करना, मूड और दर्द सहने की क्षमता में सुधार करना जैसे लाभ शामिल हो सकते हैं। पैदल चलने से शरीर को कई तरह के लाभ प्राप्त हो सकते हैं, इस में किसी भी तरह का कोई भी शक नहीं है। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

      पैदल चलने और पीठ के स्वास्थ्य के बीच संबंध

      दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि नियमित चलना एक एरोबिक व्यायाम है, जो शरीर में शॉक को कम करता है। रोजाना पैदल चलना न केवल आपके शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने का काम करता है, बल्कि यह एक व्यक्ति के मसल्स को भी मजबूत करता है और शरीर में लचीलेपन को बढ़ाता है। डॉक्टर के अनुसार, पैदल चलने से रीढ़ की हड्डी को गतिशील करने और पोस्चर को बेहतर बनाने में काफी ज्यादा सहायता प्राप्त हो सकती है। दरअसल, यह आपकी पीठ को सहारा देने वाली मसल्स को मजबूत करने में काफी ज्यादा मदद करता है, जिसमें कोर, हिप्स और पैर शामिल होते हैं। इसकी वजह से पीठ के निचले हिस्से पर पड़ने वाला प्रेशर काफी ज्यादा कम हो जाता है। 

      पैदल चलने से पीठ दर्द को मिलने वाले लाभ!

      आम तौर पर, पैदल चलने से पीठ दर्द को कई लाभ प्राप्त हो सकते हैं, जिसमें से कुछ निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

      1. रक्त संचार में सुधार होना 

      दरअसल, आप यह जानते ही होंगे, कि पैदल चलना शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाने का एक शानदार तरीका हो सकता है। आम तौर पर, यह रीढ़ की हड्डी के ऊतकों तक ऑक्सीजन और पोषण को पहुंचाने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान कर सकता है। दरअसल, इससे उपचार प्रक्रिया बढ़ती है और शरीर की सूजन काफी ज्यादा कम हो जाती है। 

      1. कमर और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करना 

      आम तौर पर, एक व्यक्ति का नियमित पैदल चलना एक मजबूत कोर रीढ़ को सहारा प्रदान करता है और इसकी वजह से पीठ के निचले हिस्से पर किसी भी तरह का कोई भी भारी दबाव नहीं पड़ता है। दरअसल, एक आम तरीके से पैदल चलने से पेट और

      पीठ के निचले हिस्से की मसल्स एक्टिव रहती हैं। नियमित, पैदल चलना शरीर और सेहत दोनों के लिए काफी ज्यादा लाभदायक होता है। 

      1. मनोदशा और दर्द सहन करने की क्षमता में सुधार करना 

      आम तौर पर, अगर एक व्यक्ति रोजाना पैदल चलता है, तो उसके शरीर में एक एंडोर्फिन हार्मोन निकलता है, जिसको एक प्राकृतिक पेन रिलीवर माना जाता है। दरअसल, यह न केवल एक व्यक्ति के मूड को बेहतर करता है, बल्कि यह दर्द के एहसास को कम करने में भी काफी ज्यादा सहायता प्रदान करता है। 

      निष्कर्ष: कुल मिलाकर पैदल चलना न केवल हमारे शरीर की सेहत के लिए बेहतर होता है, बल्कि इस से कई तरह की बीमारियां भी कम हो जाती हैं। पीठ की हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए सबसे आसान और सबसे असरदार और आसानी से मिलने वाले तरीकों में से एक पैदल चलना। यह सभी तरह के पीठ दर्द को तो ठीक नहीं करता, पर यह शरीर की अकड़न को कम करने और मसल्स को मजबूत बनाने आदि में मदद करता है। पीठ दर्द से प्राकृतिक रूप से छुटकारा पाने के लिए नियमित रूप से चलना, सही मुद्रा और स्वस्थ जीवन शैली को अपनाना जैसी आदतों को अपना सकते हैं। पीठ दर्द से जुड़ी गंभीर समस्या होने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। इस के बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और पीठ दर्द से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इस के विशेषज्ञों से इस के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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        क्या वाकई अनार और मिर्च का सेवन बचा सकता है आपको पार्किन्संस रोग से? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!
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        • February 27, 2026

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        बढ़ती उम्र के कारण लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना…

        पैदल चलने से पीठ दर्द को कौन से लाभ प्राप्त हो सकते हैं? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!
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        • February 14, 2026

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        आज के समय में लोगों में हड्डियों से जुड़ी तरह-तरह की समस्याओं…

        क्या डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी डिप्रेशन के मरीजों के लिए कारगर होती है? डॉक्टर से जानें इसके बारे में !

        आज की व्यस्त जीवनशैली के कारण लोगों को सेहत के साथ जुड़ी कई तरह की समस्याएं तो होती ही हैं, पर इससे दिमाग भी बुरी तरीके से प्रभावित हो जाता है। दरअसल, दिमाग से जुड़ी तरह- तरह की समस्याओं के कारण लोगों को अपने जीवन में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आम तौर पर, ज्यादातर दिमाग से जुड़ी बीमारियों में इंसान अपने रोज के काम करने में भी काफी ज्यादा दिक्कत महसूस करने लग जाता है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि डीप ब्रेन स्टिमुलेशन एक तरीके की सर्जिकल प्रक्रिया होती है, जिसकी सहायता से पार्किंसंस डिजीज, डिप्रेशन और मिर्गी जैसी समस्याओं के लक्षणों को कम किया जा सकता है। आम तौर पर, डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी के दौरान दिमाग से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या के दौरान मरीज के दिमाग में इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं, जो इलेक्ट्रिक तरंगों के माध्यम से एक व्यक्ति के दिमाग में होने वाले न्यूरोलॉजिकल विकारों को कम करने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान करते हैं। ऐसे में, डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी वाकई डिप्रेशन के मरीजों के लिए काफी ज्यादा कारगर साबित होती है। इसी के चलते मेंटल हेल्थ के मरीजों का इलाज डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी के माध्यम से किया जा सकता है। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

        डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी क्या है?

        दरअसल, इस पर डॉक्टर का कहना है, कि डीप ब्रेन स्टिमुलेशन एक न्यूरो सर्जरी है, जिसकी सहायता से दिमाग से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का इलाज किया जाता है। हालांकि, यह सर्जरी केवल न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर से पीड़ित लोगों के लिए ही इस्तेमाल की जाती है। आम तौर पर, जब दिमाग के किसी विशेष हिस्से में इलेक्ट्रिकल प्रतिक्रियाएं काफी ज्यादा बढ़ जाती है, तो इस तरह की स्थिति में पीड़ित व्यक्ति को मूवमेंट डिसऑर्डर होने का जोखिम काफी ज्यादा बढ़ जाता है। असल में, इस दौरान व्यक्ति पार्किंसंस डिजीज या फिर टॉरेट सिंड्रोम जैसी समस्याओं का शिकार हो सकते हैं। हालांकि, पार्किंसंस जैसी समस्या के दौरान एक व्यक्ति के हाथ पैर कांपने, लिखने में परेशानी, चलने में परेशानी, बोलने में दिक्कत और किसी भी तरह की शारीरिक मूवमेंट में कमी होना या फिर इसका ज्यादा होना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, इस तरह की समस्या में व्यक्ति को अपनी मांसपेशियों में अकड़न और कंपकंपी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि इस तरह की बीमारी किसी भी व्यक्ति को जन्म से या फिर दिमाग में कोई चोट लगने, दिमाग में इंफेक्शन होने और लंबे वक्त से किसी भी तरह की दवा का इस्तेमाल आदि करने की वजह से हो सकती है। आपको बता दें, कि डीप ब्रेन स्टीमुलेशन एक पीड़ित व्यक्ति के दिमाग में लगाकर और दिमाग के असामान्य इलेक्ट्रिक फंक्शन को कंट्रोल में किया जाता है। 

        डीबीएस में कौन- कौन से हिस्सों का इस्तेमाल किया जाता है?

        दरअसल, डीबीएस में बहुत से हिस्सों का इस्तेमाल किया जाता है, जो निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

        1. लीड्स: इसे दिमाग के उन हिस्सों में लगाया जाता है, जिनमें एबनॉर्मल इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी होती है।
        2. इंप्लांटेबल लीड्स जनरेटर : दरअसल, इस को कॉलरबोन के बिल्कुल पास लगाया जाता है।
        3. एंकर: आम तौर पर, यह दिमाग में लीड्स को हिलने से बचाने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान करता है। 
        4. एक्सटेंशन लीड्स: यह एक इंसुलेटेड वायर की तरह होती है, जो दरअसल लीड्स को जनरेटर से जोड़ने का काम करता है।
        5. हैंड हैल्ड प्रोग्रामर डिवाइस: दरअसल, इस का इस्तेमाल विशेष तौर पर, डिवाइस को चलाने, पल्स जनरेट करके इलेक्ट्रिक सिग्नल को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है।

        डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी किन मरीजों के लिए की जाती है? 

        आम तौर पर, डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी पार्किंसंस डिज़ीज़, डिप्रेशन, मिर्गी, एसेंशियल ट्रेमोर, ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर, डिप्रेशन और डिस्टोनिया जैसी बिमारियों से पीड़ित लोगों के लिए की जाती है। 

        निष्कर्ष: दिमाग से जुड़ी डेप्रेशन जैसी तरह- तरह की समस्याओं के कारण लोगों को अपने जीवन में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। डीप ब्रेन स्टिमुलेशन एक डिवाइस की तरह होता है, जिसमें इलेक्ट्रोड मौजूद होते हैं, जिनको पीड़ित व्यक्ति के दिमाग के अंदर लगाया जाता है और दिमाग के ज़रूरी हिस्सों में इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजा जाता है। डीप ब्रेन स्टिमुलेशन एक तरीके की सर्जिकल प्रक्रिया है, जिससे पार्किंसंस डिजीज, डिप्रेशन और मिर्गी जैसी समस्याओं को कम किया जाता है। यह बात सच है, कि डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी वाकई डिप्रेशन के मरीजों के लिए कारगर साबित होती है। वहीं इसका इस्तेमाल मेंटल हेल्थ के मरीजों को ठीक करने के लिए भी किया जाता है। डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी का इस्तेमाल सिर्फ़ न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से परेशान लोगों के लिए ही किया जाता है। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और दिमाग से जुड़ी डिप्रेशन जैसी किसी भी तरह की गंभीर समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इस के इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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          • February 27, 2026

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          • February 14, 2026

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          क्या मिर्गी और चक्कर आने की समस्या का सामना कर रही हैं पाकिस्तानी अभिनेत्री नादिया जमील? डॉक्टर से जाने मिर्गी के कारण, लक्षण और इलाज के बारे में!

          दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि नादिया जमील जो एक पाकिस्तानी अभिनेत्री हैं, जिन को पाकिस्तान में एक कमाल की हिम्मत वाली महिलाओं की मिसाल माना जाता है। आम तौर पर, इन दिनों वह साहसी योद्धा की तरह एक नहीं बल्कि दो- दो बीमारियों का सामना रही हैं। दरअसल, प्राप्त हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक, टॉप एक्ट्रेस नादिया बच्चों की भलाई के लिए हमेशा से इंसानी कोशिशों में शामिल रही हैं और उन्होंने बहुत सी कामयाबियों और शोहरत को प्राप्त किया है। इसके अलावा, टेली फिल्म ‘बेहद’ में रोल निभाने वाली एक्ट्रेस एक बहुत ही कमाल की हिम्मत के साथ एक नहीं दो बीमारियों का डटकर सामना कर रही हैं। 

          आम तौर पर, इस तरह की स्थिति को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट में कहा गया है, कि नादिया चक्कर आने और मिर्गी जैसी समस्या से पीड़ित हैं। हालांकि, मिर्गी और चक्कर आने जैसी समस्या आम है और यह कोई जानलेवा बीमारी नहीं है, पर इस तरह की स्थिति में दोनों बीमारियों का कॉम्बिनेशन उनके लिए मुश्किलों भरे हालातों को पैदा कर देता है, जिसकी वजह से रोजाना के कामकाज करना उनके लिए बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो जाता है। 

          आम तौर पर, लगभग इसके बारे में तो सभी जानते ही होंगे, कि इस पाकिस्तानी मशहूर एक्ट्रेस नादिया ने अपनी इस स्थिति के बारे में एक ट्वीट में बताते हुए कहा है, कि वह मिर्गी और चक्कर आने जैसी समस्या से काफी ज्यादा परेशान हैं। आम तौर पर, इस तरह की समस्या जीवन को खतरा पहुंचाने वाली समस्या नहीं, बल्कि यह जिंदगी को कभी -कभी बहुत ही ज्यादा चुनौतीपूर्ण बना देने वाली समस्या हो सकती है। हालांकि, इस दौरान चक्कर आना असल में काफी ज्यादा परेशान करने वाला होता है, क्योंकि इसके आस-पास का सब कुछ

          अपने आप ही घूमने लग जाता है। इसकी वजह से ठीक से नींद न आने और एंग्जायटी होने जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा इस तरह की स्थिति में रोशनी और तेज़ आवाज़ों से भी काफी ज्यादा डर लगता है, पर फिर भी सब कुछ अपने आप चलता रहता है।

          नोट : दरअसल, इससे यह बात बिल्कुल स्पष्ट होती है, कि एक मशहूर पाकिस्तानी अभिनेत्री नादिया जमील जो मिर्गी और चक्कर आने जैसी समस्या का सामना कर रही हैं।

          मिर्गी के लक्षण क्या होते हैं? 

          वैसे तो, मिर्गी के बहुत से लक्षण होते हैं, पर इस में कुछ निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

          1. मरीज के शरीर का एक दम से अकड़ जाना। 
          2. आंखों के आगे एक दम से अंधेरा छा जाना।
          3. बेहोशी आना। 
          4. पीड़त के मुंह से झाग निकलना। 
          5. इस दौरान, अपने होंठ या फिर जीभ को काट लेना।
          6. मरीज की आंखों की पुतलियों का अपने आप ऊपर की तरफ खिंच जाना।
          7. बेहोश होकर या फिर आम अवस्था में अचानक से जमीन पर गिर जाना।
          8. आपके दांतों को होठों के नीचे दबाकर भींचना। 

          मिर्गी के कारण क्या होते हैं?

          इस तरह की स्थिति में, अगर इसके कारणों और लक्षणों पर ध्यान दे दिया जाये तो इस समस्या की पहचान करना और इलाज करना काफी ज्यादा आसान हो जाता है। इसके कारणों में निम्नलिखित कारक शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

          1. सिर पर गहरी चोट का लगना।
          2. दिमाग का ट्यूमर होना। 
          3. दिमागी बुखार होना। 
          4. अल्जाइमर की बीमारी होना। 
          5. परिवार में पहले से ही इस तरह की समस्या होना (जेनेटिक होना) 
          6. ब्रेन स्ट्रोक होने पर भी मिर्गी जैसी समस्या हो सकती है।
          7. बच्चे के जन्म के समय दिमाग में पर्याप्त रूप से ऑक्सीजन बिलकुल भी सप्लाई न होना। 
          8. इंसेफेलाइटिस होने से भी दिमाग पर बुरा असर पड़ सकता है और मिर्गी की समस्या हो सकती है।

          मिर्गी का इलाज कैसे होता है?

          दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि इस तरह की समस्या का इलाज दवाओं से किया जा सकता है। हालांकि, दवाओं से मिर्गी जैसी समस्या के अटैक को बेहतर तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है, पर इस समस्या के इलाज के लिए दूसरे विकल्प भी मौजूद हैं, जो डॉक्टरों द्वारा तय की गई दवाओं के काम न करने पर इस्तेमाल किये जा सकते हैं। इसके अलावा, मिर्गी का दौरा पड़ने पर मरीज को कोई भी जूता न सुंघाने के साथ -साथ मुँह में चम्मच न लगाएं। इस तरह की स्थिति में उसके कपड़ों को ढीला करें और इसके साथ ही हाथ और पैरों की मालिश और अकड़े हुए अंगों को सीधा करने का प्रयास न करें। 

          निष्कर्ष: यह बात सच है, कि मशहूर पाकिस्तानी अभिनेत्री नादिया जमील मिर्गी और चक्कर आने जैसी समस्या का सामना कर रही हैं। मिर्गी की समस्या आम है, पर यह जानलेवा भी नहीं है, बस इससे निपटना कभी कभी बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो जाता है। इस लेख के माध्यम से हमने आपको इस समस्या के लक्षणों और इसके कारणों के बारे में बताया है, जिनका उपचार किया जाना बिल्कुल संभव है। मिर्गी की गंभीर समस्या होने पर आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और मिर्गी जैसी दिमाग से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का समाधान पाने के लिये आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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            क्या मिर्गी का दौरा पड़ने पर इन चार घरेलू उपायों को अपनाना फायदेमंद हो सकता है? जानें डॉक्टर से

            दरअसल, मिर्गी एक इस तरह की समस्या है, जिससे एक आम इंसान भी अचानक से काफी ज्यादा प्रभावित हो सकता है। आम तौर पर, मिर्गी की समस्या आम है, पर समय पर इलाज न मिलने पर यह आगे चलकर काफी ज्यादा गंभीर हो सकती है। मिर्गी यानी कि एपिलेप्सी जिसके होने पर एक व्यक्ति को न केवल अचानक से दौरा पड़ने लगता है, बल्कि वह इस दौरान बेहोश भी हो जाता है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि मिर्गी तंत्रिका तंत्र से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जिसमें एक व्यक्ति को दौरा पड़ता है, तो वह अपने दिमाग के संतुलन को खो बैठता है। इसके अलावा, इस दौरान मरीज के हाथ पैर अकड़ने के साथ-साथ शरीर कांपने और ऐंठने लगता है। दरअसल, इलाज होने पर भी यह समस्या पूरी तरीके से ठीक नहीं होती है, यहां तक कि इस समस्या को दवाओं की मदद से कंट्रोल में रखा जाता है, पर दवाओं को बंद करने पर यह दौरे फिर से पड़ने लग जाते हैं। आम तौर पर, दवाओं के सेवन के अलावा भी आप कुछ घरेलू उपायों का इस्तेमाल करके इस तरह की समस्या को कंट्रोल में रख सकते हैं। इन घरेलू उपायों में सफेद प्याज का रस, शहतूत और अंगूर का रस, तुलसी और सीताफल के पत्तों का रस और करौंदा के पत्तों का सेवन शामिल हो सकता है। यह इस समस्या के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

            दौरा पड़ने पर पीड़ित व्यक्ति के साथ क्या नहीं करना चाहिए?

            1. समस्या से पीड़त व्यक्ति के मुंह में कुछ न डालें।
            2. इस तरह की स्थिति में मरीज को कहीं पर भी ले जाने की कोशिश न करें। 
            3. इस दौरान मरीज को पूरी तरीके से ठीक होने के बाद ही कुछ खिलाएं- पिलाएं। 
            4. इस दौरान मिर्गी का उपचार आप खुद से करने की बिल्कुल भी कोशिश न करें।

            मिर्गी का दौरा पड़ने पर अपनाये जाने वाले कुछ घरेलू उचार 

            दरअसल, मिर्गी का इलाज खुद करने की बजाए, अच्छा होगा कि आप तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और डॉक्टर से ही इसका इलाज करवाएं। अगर किसी भी तरह की स्थिति में आपको लगता है, की आप मिर्गी जैसी समस्या की चपेट में आ रहे हैं, या फिर परिवार में कोई व्यक्ति इस समस्या से पीड़ित है, तो आप इस दौरान उसके होश में आने पर, इन घरेलू उपचारों का इस्तेमाल कर सकते हैं, इन से किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है और पीड़ित व्यक्ति को इनसे समस्या से राहत मिल सकती है। यह उपचार निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

            1. सफेद प्याज का रस 

            दरअसल, मिर्गी जैसी समस्या का समाधान करने के लिए आप मिर्गी के मरीज को रोजाना 1 चम्मच प्याज के रस का पीला सकते हैं। 

            1. शहतूत और अंगूर का रस

            इस समस्या के दौरान मरीज को रोजाना शहतूत और अंगूर के रस का सेवन करवाना भी काफी ज्यादा लाभदायक साबित हो सकता है। 

            1. तुलसी और सीताफल के पत्तों का रस 

            आम तौर पर, किसी भी व्यक्ति को मिर्गी का दौरा पड़ने पर उसकी नाक में तुलसी के रस में सेंधा नमक मिलाकर डालने से मरीज को काफी राहत मिल सकती है। इस दौरान तुलसी की जगह आप सीताफल के पत्तों का रस भी शामिल कर सकते हैं। 

            1. करौंदा के पत्तों का सेवन 

            दरअसल, करौंदे के पत्ते भी ,मिर्गी की समस्या के लिए काफी ज्यादा लाभदायक साबित हो सकते हैं। इसके लिए आप करौंदे के पत्तों को पीसकर इस की चटनी बनाकर मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति को खिला सकते हैं। दरअसल, इस का रोजाना सेवन करने से पीड़ित व्यक्ति को जल्दी लाभ प्राप्त हो सकता है। 

            निष्कर्ष: मिर्गी तंत्रिका तंत्र से जुड़ी एक बीमारी है, जिसमें दौरा पड़ने पर एक व्यक्ति का दिमागी तंतुलन काफी ज्यादा खराब हो जाता है। इस समस्या के दौरान न केवल मरीज के हाथ पैर अकड़ने लग जाते हैं, बल्कि इसमें पीड़ित व्यक्ति का शरीर कांपने और ऐंठने भी लग जाता है। इस दौरान व्यक्ति बेहोश हो जाता है। हालाँकि, इलाज मिलने पर भी ये समस्या पूरी तरीके से सही नहीं होती है। दवाओं से सिर्फ इस समस्या को कंट्रोल में किया जाता है, पर दवाओं को छोड़ने पर यह समस्या व्यक्ति को दुबारा से पेरशान कर सकती है। ऐसे में दवाओं का सेवन करने के साथ -साथ इस को कुछ घरेलू उपचारों का भी कंट्रोल में रखा जा सकता है, जिसमें सफेद प्याज का रस, शहतूत और अंगूर का रस, तुलसी और सीताफल के पत्तों का रस और करौंदा के पत्तों का सेवन शामिल हो सकता है। मिर्गी की गंभीर स्थिति बनने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और मिर्गी जैसी समस्या से राहत पाने के लिए आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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              लोग अचानक बेहोश क्यों हो जाते हैं? डॉक्टर से जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय!

              आम तौर पर, ऐसी बहुत सी सेहत स्थितियां होती हैं, जिनकी वजह से लोग अक्सर बेहोश या फिर एक दम से जमीन पर गिर जाते हैं। दरअसल, अक्सर यह देखने को मिलता है, कि कुछ लोग अचानक से चलते-चलते या फिर बैठे बैठे बेहोश होकर जमीन पर गिर जाते हैं। पर, क्या आपने इसके बारे में जानने की कोशिश की है, कि लोग इस तरह अचानक से बेहोश होकर आखिर क्यों गिर जाते हैं? अक्सर लोग इस तरह की स्थिति को आम समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं, पर समय पर ध्यान न देने पर कई बार इस तरह की स्थिति सेहत के लिए काफी ज्यादा ख़तरनाक साबित हो सकती है। इसलिए, इस तरह समस्या  बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। 

              इस तरह की स्थिति को देखते हुए कई लोग जानना चाहते हैं, कि आखिर ऐसे अचानक से कुछ लोगों के बेहोश होने के कारण, लक्षण और इससे बचाव के क्या उपाय हो सकते हैं? दरअसल, कई लोगों में यह समस्या आम हो सकती है, पर ध्यान न देने पर यह गंभीर भी हो सकती है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिसमें इसके आम से लेकर गंभीर और अन्य स्थितियाँ शामिल हो सकती हैं। इसके अलावा, भीषण गर्मी में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाना, देर तक धूप में काम करना, कुछ भी खाए -पिए बिना दिन के सारे काम करना, गर्मी से शरीर से काफी ज्यादा पसीना निकलना, मिर्गी का दौरा पड़ना, दम घुटना, हार्ट अटैक आना और किसी तरह का सदमा लगने की वजह से भी लोग बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ते हैं। इसके लक्षणों में चेहरे का रंग पीला पड़ जाना, शरीर का ठंडा हो जाना, पसीना आना, दिमाग का ठीक से काम न कर पाना और बेहोश व्यक्ति के होश में आने पर कुछ भी याद न रहना जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं। इसके बचाव के बहुत से उपाय हो सकते हैं, जिसमें पीड़ित व्यक्ति को शांत करना, सांस न आने पर उसको आर्टिफिशियल सांस देने की कोशिश करना और साथ में उसके कपड़ों को ढीला करना शामिल हो सकता है। आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि इस तरह की समस्या में अचानक बेहोश होकर एक दम से जमीन पर गिरने से पीड़ित व्यक्ति के न केवल शरीर पर चोट लग सकती है, बल्कि उसकी हड्डियां भी फ्रैक्चर हो सकती हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

              बेहोश होने के क्या कारण हो सकते हैं?

              आम कारण 

              1. लंबे समय तक खड़े रहना। 
              2. शरीर में पानी की कमी होना। 
              3. व्यक्ति के शरीर का ज़्यादा गरम होना। 
              4. रोजाना शराब या फिर नशीली दवाओं का सेवन करना। 

              गंभीर कारण 

              1. दिल से जुड़ी समस्याएं होना। 
              2. स्ट्रोक या दौरे पड़ना। 
              3. एनीमिया होना 
              4. खून की  कमी होना। 

              अन्य स्थितियां

              1. गर्भावस्था की स्थिति होना। 
              2. माइग्रेन होना 
              3. कैरोटिड साइनस सिंड्रोम का होना 

              मूर्छित या फिर बेहोश होने के लक्षण क्या होते हैं?

              वैसे तो, बेहोश या फिर मूर्छित होने के बहुत से शारीरिक संकेत और लक्षण  नज़र आ सकते हैं, इसमें से कुछ निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

              1. पीड़ित व्यक्ति का रंग पीला पड़ जाना। 
              2. शरीर का एक दम से ठंडा पड़ जाना। 
              3. काफी ज्यादा पसीना आना। 
              4. दिमाग का ठीक तरीके से काम न कर पाना। 
              5. पीड़ित व्यक्ति को होश आने के बाद कुछ भी याद न रहना। 
              6. बेहोशी में आँखों के आगे काफी ज्यादा अंधेरा छाने लगना। 
              7. इस दौरान सब कुछ धुंधला-सा नज़र आने लगना। 
              8. पीड़ित व्यक्ति की नाड़ी और हृदय की गति धीमी पड़ना। 
              9. इस दौरान सांस का काफी धीरे चलना। 
              10. बेहोशी से पहले काफी तेज चक्कर आना। 
              11. इसके बाद बेहोश होकर एक दम से जमीन पर गिर जाना।   

              बेहोशी से बचाव के क्या उपाय हो सकते हैं?

              दरअसल, बेहोशी से बचाव के बहुत से उपाय हो सकते हैं। पर इससे पहले अगर आपके आसपास कोई भी व्यक्ति अचानक से बेहोश होकर जमीन पर गिर जाता है, या फिर बेहोशी की हालत में नीचे बैठ जाता है, तो इस तरह की स्थिति में उसकी मदद करना काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इस तरह की समस्या के बचाव के उपाय निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

              1. पीड़ित व्यक्ति को सबसे पहले शांत करें। 
              2. उसको एक हवादार जगह पर उठाकर लिटाएं। 
              3. बेहोशी में उसकी सांस चल रही है या फिर नहीं इसको चेक करें। 
              4. सांस के रस्ते में आने वाली किसी भी तरह की रुकावट को दूर करें।  
              5. पीड़ित व्यक्ति के कपड़ों को ढीला करें। 
              6. बेहोश हुए व्यक्ति की कमर, गर्दन और छाती से कपड़ों को हटाएँ। 
              7. बेहोशी में पीड़ित व्यक्ति को जूता या फिर मौजा बिल्कुल भी न सुंघाएं। 
              8. चेहरा लाल पड़ने पर गर्दन को ऊपर की तरफ उठा कर रखें। 
              9. चेहरे का रंग पीला पड़ने पर उसके पैरों को ऊंचा उठाकर रखें। 
              10. बेहोश होने पर व्यक्ति के सिर पर ठंडे पानी से छींटे मारें। 
              11. बेहोशी की हालत में कुछ भी पिलाने की कोशिश ना करें।
              12. व्यक्ति के होश आने पर, उसे दूध या फिर पानी पिलाएं। 
              13. बेहोशी में सांस सही से न चलने पर उसको आर्टिफिशियल सांस देने की कोशिश करें। 

              निष्कर्ष: इस लेख के माध्यम से हमने आपको लोगों के अचानक बेहोश होने के कारणों से लेकर इसके बचाव के उपायों तक सभी के बारे में विस्तार से बताया है। यह समस्या बेशक कुछ लोगों में आम होती हैं, पर ध्यान न देने पर यह खतरनाक साबित हो सकती है। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने और  दिमाग से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या के समाधान के लिए आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके इलाज के  बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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                क्या रील देखने की लत से बढ़ सकता है तनाव? मानस‍िक स्‍वास्‍थ्‍य पर इसके नुकसानों के बारे में, जानें डॉक्टर से

                आजकल लगभग हर किसी के पास मोबाइल फ़ोन होता है। आम तौर पर, अगर किसी को मोबाइल की ज़रूरत नहीं भी होती, तो भी बहुत से लोग अपने पास मोबाइल फ़ोन रखते हैं। दरअसल, सिर्फ इतना ही नहीं आजकल तो ज्यादातर छोटे बच्चों के हाथों में भी मोबाइल फ़ोन देखा जा सकता है। इसके साथ ही, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जिस क‍िसी को भी देखो, वो फोन में ही व्‍यस्‍त नजर आता है। जैसे की वह फ़ोन बिना अब एक पल भी नहीं रह सकता है। जैसे मधुमखियां शहद के साथ चिपकी रहती है, वैसे ही ज्यादातर लोग अपने फ़ोन से चिपके हुए नज़र आते हैं। लोगों को फोन की लत लग चुकी है और यह लत ज्यादातर लोगों रील्‍स देखने की आदत से पड़ी है। पर कई लोगों को इसके बारे में, नहीं पता है, कि लगातार रील्‍स देखते रहने से तनाव में काफी ज्यादा बढ़ोतरी होती है। आम तौर पर, रील्‍स की लत लगने से एक व्यक्ति के ध्‍यान की क्षमता काफी ज्यादा कम हो जाती है और मानस‍िक तनाव काफी ज्यादा बढ़ जाता है। आपको बता दें, कि ज्‍यादा देर तक फ़ोन में बैठे रहने से और कुछ भी स्‍क्रॉल करते रहने से नींद की गुणवत्ता काफी ज्यादा प्रभावित होती है और इसकी वजह से एक व्यक्ति को द‍िनभर थकान, चिड़चिड़ापन और चिंता जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ज्यादातर, लोगों को रील्स देखने की बुरी आदत से यह पता नहीं चल पाता है, कि यह धीरे-धीरे मानस‍िक स्‍वास्‍थ्‍य को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में, इस के डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि रील्स देखने की लत एक व्यक्ति के मानस‍िक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए कैसे हानिकारक हो सकती है? 

                मानस‍िक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए रील्स देखने के नुकसान

                लगातार रील्स देखने से मानसिक स्वास्थ्य को काफी ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है, जैसे कि 

                1. इससे एक व्यक्ति की ध्‍यान शक्ति कमजोर हो सकती है। 
                2. लगातार रील्स देखने की लत से मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर काफी ज्यादा कम हो जाता है, जिसकी वजह से नींद और एनर्जी का स्तर प्रभावित होता है। 
                3. इससे मानसि‍क थकान और स‍िर दर्द की समस्‍या में काफी ज्यादा बढ़ोतरी होती है। 
                4. आपको बता दें, कि ज़्यादा स्क्रीन टाइम होने से कोर्टिसोल हॉर्मोन में काफी ज्यादा बढ़ोतरी हो जाती है। जिसकी वजह से तनाव का स्तर काफी ज्यादा बढ़ सकता है। 
                5. आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि फोन में ज्यादा समय तक रील स्क्रॉल करने से सामाजिक दूरी बनती है। आम तौर पर, रोजाना ऐसा करने पर व्यक्ति अपने परिवार और दोस्तों से काफी ज्यादा दूर होता जाता है और वह एक टाइम पर अकेला महसूस कर सकता है। जिसकी वजह से उसका मानसिक तनाव काफी ज्यादा बढ़ सकता है और वह बीमार भी हो सकता है। 

                रील्स देखने की लत से छुटकारा कैसे पाएं?

                रील्स देखने की लत से छुटकारा पाने के लिए आप कई तरीकों को अपना सकते हैं, जिसमें शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

                1. इसके लिए आप सोशल मीड‍िया ऐप्‍स पर टाइमर सेट कर सकते हैं और जब भी अलर्ट आए तो आप ऐप बंद करके फ़ोन से छुटकारा पा सकते हैं। 
                2. आम तौर पर, हफ्ते में एक दिन रील्स स्क्रॉल न करने का डिटॉक्स प्लान को अपनाएं।
                3. आपके सोने के कुछ घंटे पहले इस बात का ख़ास ध्यान रखें, कि उस समय में आप फोन का इस्तेमाल बिलुकल भी न करें, वरना आपको अन‍िद्रा जैसी समस्‍या का सामना करना पड़ सकता है। 
                4. दरअसल, रील्स देखने की लत जैसी समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप 10 मिनट तक के लिए पार्क में घूम सकते हैं, वॉक कर सकते हैं, अपनी फैमिली के साथ टाइम स्पेंड कर सकते हैं और इसके साथ ही एक्‍सरसाइज को प्राथमिकता दे सकते हैं। इसके अलावा आप, इससे छुटकारा पाने के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज कर सकते हैं। इसमें से आप किसी एक हॉबी चुनें और ज्यादातर अपने लिए समय निकालें।
                5. आपको बता दें, कि रील्स की लत लगने जैसी समस्या से बचने के लिए आप फोन के नोटिफिकेशन्‍स को बंद करें, ताकि आप बार बार अपने फ़ोन को चेक न करें और बार-बार रील्‍स देखने पर फोकस न करें। 

                निष्कर्ष: ज्यादातर लोग अपने मनोरंजन के लिए रील्स देखते हैं। रील्स को मनोरंजन का एक जरिया माना जाता है। पर रील देखने की लत, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरीके से प्रभावित कर सकती है। इससे छुटकारा पाने के लिए केवल एक सिमित समय तक फोन का इस्तेमाल करें, रील को स्क्रॉल करें और नींद, फोकस और अपनी मानसिक सेहत को प्राथमिकता दें। इससे आपका तनाव कम और आप मानसिक तौर से ठीक महसूस करेंगे। अगर आपको भी इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करनी है, या फिर अगर आपको भी दिमाग से जुड़ी किसी भी तरह की कोई समस्या है, जिसे आप काफी ज्यादा परेशान रहते हैं और आप इसका इलाज चाहते हैं, तो आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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                  बोलने में बदलाव से लेकर चलने में दिक्कत तक, क्या ये लक्षण हो सकते हैं दिमाग की बीमारी के संकेत? डॉक्टर से जानें

                  दरअसल, शरीर के सभी अंगों में से दिमाग काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आम तौर पर, दिमाग के बीमार होने पर हमारा पूरा शरीर बीमार हो जाता है और हम कुछ भी नहीं कर पाते हैं। आपको बता दें, कि  दिमाग हमारे शरीर का मुख्य  प्रोसेसिंग यूनिट होता है, जिसके बिना हमारा शरीर एक खोखले ढांचे की तरह बन जाता है, आम तौर पर, जिसका फिर कोई भी काम नहीं रहता है। दरअसल, दिमाग शरीर के सभी अंगों के काम काजों को चैनलाइज करता है। इस तरह की स्थिती में, जब दिमाग में किसी भी तरह कोई गड़बड़ी उत्पन्न होती है, तो इसका असर हमारे पुरे शरीर पर पड़ता है, चाहे वो हमारी सोच हो, हाथ पैर हों, नसों का कामकाज हो या फिर आपके बातचीत करने की शक्ति हो। पर, दुर्भाग्य की बात यह है, कि हममें से ज्यादातर लोग दिमाग को होने वाली बीमारी को शुरुआत में समझ नहीं पाते हैं, और जब इसमें बहुत ज्यादा देर हो जाती है, तो स्थिति हमारे हाथों में से निकल सकती है। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति में, यह जानना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है, कि हम अपने दिमाग की बीमारी को कैसे पता कर सकते हैं? क्या समस्या के शुरुआती लक्षणों से समस्या की पहचान की जा सकती है? तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि बोलने में बदलाव से लेकर चलने में दिक्कत तक, क्या ये लक्षण दिमाग की बीमारी के संकेत हो सकते हैं? 

                  दिमाग की बीमारी को कैसे पहचाना जा सकता है?

                  दरअसल, इस पर डॉक्टरों का कहना है, कि दिमाग की बीमारियों में कई तरह की समस्याएं शामिल हो सकती हैं, जो आम तौर पर, किसी भी व्यक्ति के दिमाग की संरचना, काम या फिर केमिस्ट्री पर बुरा प्रभाव डालती हैं। आम तौर पर, इस तरह की समस्याओं का पता लगाना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है, क्योंकि, यह जानने से आपकी समस्या का जल्दी इलाज हो सकता है जिससे आपको बेहतर नतीजे प्राप्त हो सकते हैं। आपको बता दें, कि जैसे ही दिमाग की बीमारी के इलाज में देरी होती है, तो इलाज अच्छे नतीजों को प्रदान नहीं करता है, विशेष रूप से बढ़ते न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के लिए। हालांकि, खास बीमारी के आधार पर लक्षण काफी ज्यादा अलग-अलग हो सकते हैं, पर इसके साथ ही, कुछ आम संकेत हैं, जिनको बिलकुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जैसे कि 

                  1. आवाज या फिर बातचीत में बदलाव का होना। 
                  2. अचानक से चीजों को भूल जाना या फिर भ्रम होना। 
                  3. चलने-फिरने में काफी ज्यादा दिक्कत और संतुलन से जुड़ी समस्याओं का होना। 
                  4. व्यक्तित्व या फिर व्यवहार में बदलाव होना। 
                  5. कुछ भी देखने और सुनने से जुड़ी समस्याओं का होना। 
                  6. किसी भी समय और कहीं पर भी दौरे पड़ना। 

                  निष्कर्ष : दिमाग शरीर का सबसे ज्यादा अहम हिस्सा है। अगर आपको या फिर आपके किसी जानने वाले को लेख में बताये गए इनमें से कोई भी संकेत नज़र आता है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। न्यूरोलॉजिकल जांच, ब्रेन इमेजिंग जैसे एमआरआई या फिर सीटी स्कैन और ब्लड टेस्ट के जरिये समस्या के शुरू में ही पता लगने पर, उसका इलाज और स्थिति को बेहतर तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है। समस्या के लक्षण शुरू में ही दिखने पर डॉक्टर को दिखाएं। अगर आपको भी ऐसी कोई समस्या है और आप इसका इलाज चाहते हैं, तो आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल में जाकर विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी ले सकते हैं।

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                    दिमाग के लिए कैसे फायदेमंद होती है रेगुलर एक्सरसाइज? डॉक्टर से जानें इसके 2 कारण

                    सेहतमंद रहने के लिए रोजाना कसरत करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। असल में, हमारे जीवन में कसरत किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि इसकी मदद से हमारा शरीर एक्टिव रहता है और इससे हमारे शरीर में खुशी के हार्मोन पैदा होते हैं। रोजाना की कसरत आपके शरीर को फिट रखती है। अगर आपका शरीर फिट रहता है, तो आप अपने आप को स्वस्थ महसूस करते हैं और जब आप अपने आप को हर जगह से स्वस्थ महसूस करते हैं, तो आप काफी ज्यादा खुश रहते हैं। कसरत हमारे शरीर के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद होती है। पर आम तौर पर, ज्यादातर लोगों के मन में कसरत का नाम सुनते ही बॉडी बिल्डिंग और सिक्स पैक एब्स की तस्वीर आने लग जाती हैं। दरअसल, यह बात वाकई में सच है, कि रोजाना कसरत करने से आपकी बॉडी फिट और टोन हो जाती है। इसके साथ ही व्यक्ति की बॉडी की शेप में काफी ज्यादा सुधार आता है। पर आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि कसरत जितनी जरूरी हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होती है, उतनी ही ये हमारे दिमाग के लिए भी लाभदायक होती है। दरअसल, रोजाना कसरत करने से आपके दिमाग को कई इस तरह के फायदे प्राप्त होते हैं, आम तौर पर, जिनके बारे में आप शायद ही जानते होंगे। तो आइये इस लेख के माध्यम से इस के डॉक्टर से इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि कसरत हमारे दिमाग को किस तरीके से फायदा पहुंचा सकती है। 

                    कसरत आपके दिमाग के लिए कैसे फायदेमंद होती है?

                    दरअसल, कसरत कई तरीकों से दिमाग के लिए फायदेमंद हो सकती है, आम तौर पर, जिस में शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

                    1. दिमाग को मिलती है ज्यादा ऑक्सीजन

                    आम तौर पर, कसरत के दौरान सभी इस बात को जरूर नोटिस करते हैं, कि इस तरह की स्थिति में, लोगों के दिल की धड़कन काफी ज्यादा तेज हो जाती है। दरअसल, इस तरह की स्थिति में, एक व्यक्ति के दिल की धड़कन की रफ्तार तेज होने पर उसकी सासें काफी ज्यादा फेज हो जाती है, या फिर सांसे फूलने लग जाती हैं, जिससे कि उसके फेफड़ों में ऑक्सीजन काफी ज्यादा मात्रा में पहुँचती है। आम तौर पर, यही ऑक्सीजन खून में मिलकर पूरे शरीर में सप्लाई होती है। आपको बता दें कि हमारे दिमाग को जिन्दा रहने के लिए ऑक्सीजन की काफी ज्यादा जरूरत होती है। आम तौर पर जब आप कसरत करते हैं, तो इससे आपके पुरे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह होता है, जिससे आपके दिमाग को भी काफी ज्यादा ऑक्सीजन पहुंचती है। इससे काफी कुछ होता है, जैसे कि दिमाग की कोशिकाएं सेहतमंद और डैमेज टिशूज की मरम्मत होती है और इसके साथ ही हमारे दिमाग में नई खून की नसों का निर्माण होता है। 

                    1. नई मस्तिष्क कोशिकाएं का निर्माण होता है 

                    असल में, दिमाग हमारे शरीर का एक ऐसा अंग होता है, जो काफी लम्बे समय तक हमारा साथ निभाता है। अगर हमारा दिमाग काम करना बंद कर दे, तो हमारे शरीर का कोई भी अंग अच्छे तरीके से काम नहीं करेगा। इसलिए अपने दिमाग को सेहतमंद रखने के लिए रोजाना कसरत करना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है, इससे दिमाग एक्टिव रहता है। इसके साथ ही इसके लिए समय-समय पर पुरानी डैमेज सेल्स की मरम्मत करना और नई दिमाग की कोशिकाओं का निर्माण करना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। बता दें, कि यह सभी काम तब पुरे होते हैं, जब आप एक अच्छी नींद में सो रहे होते हैं। दरअसल, रोजाना की कसरत आपको एक अच्छी नींद प्रदान करती है और साथ ही इसकी मदद से नई दिमाग की कोशिकाओं का निर्माण होता है। 

                    निष्कर्ष

                    रोजाना कसरत करने से सिर्फ हमारे शरीर को ही नहीं बल्कि हमारे दिमाग को भी काफी ज्यादा फायदा प्राप्त होता है। अगर आपको इसके बारे में जानकारी लेनी है, या फिर आपको दिमाग से जुड़ी कोई भी समस्या है जिसका आप इलाज चाहते हैं, तो आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके बारे में जानकारी ले सकते हैं।

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