काम करने वाले प्रोफेशनल्स में स्लिप डिस्क के मुख्य कारण क्या हो सकते हैं? डॉक्टर से जानें इससे बचाव के तरीकों के बारे में!

आम तौर पर, पहले के समय में रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं केवल ज्यादा उम्र के या फिर बुर्जुग लोगों में ही देखने को मिलती थीं। पर, आज के समय में रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं की शिकायत 25 से 45 साल की उम्र के वर्किंग प्रोफेशनल्स भी करने लगें हैं। आज इन लोगों में, पीठ दर्द, कमर दर्द और स्लिप डिस्क जैसी समस्या के मामले काफी ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। दरअसल, र्किंग प्रोफेशनल्स में स्लिप डिस्क की समस्या इसलिए बढ़ रही है, क्योंकि इन लोगों की रोजाना की आदत धीरे- धीरे रीढ़ की हड्डी को कमजोर बना रही है। काम करने वाले प्रोफेशनल्स में स्लिप डिस्क होने के कई कारण हो सकते हैं, जिस में घंटों तक लैपटॉप के सामने बैठे रहना, गलत पोस्चर होना और बढ़ता मानसिक तनाव आदि शामिल हो सकता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं .

काम करने वाले प्रोफेशनल्स में स्लिप डिस्क के मुख्य कारण

डॉक्टर के अनुसार, रीढ़ की हड्डी के बीच में एक नरम कुशन जैसी डिस्क मौजूद होती है, जो शरीर को लचीलापन प्रदान करती है। जब किसी कारण वर्ष यह डिस्क अपनी जगह से हिल जाती है, या फिर बाहर की तरफ उभर आती है, तो इसकी वजह से नसों में काफी ज्यादा दबाव पड़ता है, जो स्लिप डिस्क का कारण बन सकती है। काम करने वाले प्रोफेशनल्स को स्लिप डिस्क होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. लंबे समय तक गलत पोस्चर में बैठ कर काम करते रहना 

काफी लंबे वक्त से गलत या फिर एक ही पोस्चर में बैठ कर काम करना रीढ़ की हड्डी को काफी ज्यादा नुक्सान पहुंचा सकता है। दरअसल, अगर आप अपने ऑफिस में घंटों झुक कर बैठे रहते हैं, ऑफिस की कुर्सी पर फिसलकर बैठते हैं लगातार गर्दन झुकाकर मोबाइल देखते रहते हैं या फिर अपने लैपटॉप को नीचे रखकर काम करते रहते हैं, तो इसकी वजह से रीढ़ की प्राकृतिक बनावट काफी ज्यादा खराब हो जाती है। दरअसल, गलत पोस्चर में बैठने की वजह से डिस्क पर एक समान दबाव बिल्कुल भी नहीं पड़ता है, जिससे समय के साथ स्लिप डिस्क की समस्या होनी शुरू हो जाती है। 

  1. शारीरिक व्यायाम या फिर एक्सरसाइज की कमी होना 

सिर्फ ऑफिस में काम करने वाले लोग ही इस बात को समझ सकते हैं, कि उन को कई घंटों तक बिना उठे लगातार लैपटॉप पर काम करना पड़ता है, जिससे की वह अपने लिए बिल्कुल भी वक्त नहीं निकाल पाते हैं। इसके अलावा, कई घंटों तक लगातार काम करना और फिर इसके बाद घर जाना और सो जाना और इसके बाद सुबह उठना और फिर काम की टेंशन में ऑफिस के लिए तैयार होना, दरअसल इसकी वजह से उनको एक्सरसाइज करने का समय बिल्कुल भी नहीं मिलता। जिससे की उन को अपने शरीर से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आम तौर पर, किसी भी तरह की एक्सरसाइज न करना और लगातार एक ही पोस्चर में बैठे रहने की वजह से पीठ और पेट की मांसपेशियां काफी ज्यादा कमजोर हो जाती हैं, जिससे कि रीढ़ की हड्डी को सही सहारा नहीं मिल पाता है। आम तौर पर, इस समस्या का सीधा प्रभाव डिस्क पर पड़ता है, जिसकी वजह से स्लिप डिस्क जैसी समस्या का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। 

  1. मेंटल स्ट्रेस और नींद की कमी होना 

हम में से कई लोग काम का काफी ज्यादा तनाव ले लेते हैं और दिन रात उसको सोच-सोच कर बिल्कुल भी नहीं सोते हैं। दरअसल, काम के चक्कर में लगातार तनाव में रहना आपकी मांसपेशियां काफी ज्यादा सख्त हो सकती हैं और साथ में इससे शरीर को सही रिकवरी बिल्कुल भी नहीं मिल पाती है। नींद के दौरान डिस्क खुद की मरम्मत करती हैं और एक व्यक्ति की अच्छे तरीके से नींद पूरी न होने होने की वजह से यह प्रोसेस काफी ज्यादा प्रभावित हो जाता है, जिसकी वजह से स्लिप डिस्क का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। 

स्लिप डिस्क के शुरुआती लक्षण क्या हो सकते हैं? 

  1. लगातार कमर या फिर पीठ में दर्द होना। 
  2. बैठने और खड़े होने में समस्या होना। 
  3. चलने में दर्द महसूस होना। 

काम करने वाले प्रोफेशनल्स स्लिप डिस्क से कैसे बच सकते हैं?

वर्किंग प्रोफेशनल्स अपने लाइफस्टाइल में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करके स्लिप डिस्क जैसी समस्या से अपना बचाव कर सकते हैं। इस समस्या से बचने के लिए निम्नलिखित उपाय को अपना सकते हैं, जैसे कि 

  1. ऑफिस में काम करते वक्त सही पोस्चर में बैठे। 
  2. हर घंटे में एक छोटी सी ब्रेक जरूर लें। 
  3. रोजाना थोड़ा वक्त निकालकर एक्सरसाइज करें। 
  4. अपने वजन को कंट्रोल में रखें। 
  5. अक्सर सेहतमंद डाइट और एक्टिव लाइफस्टाइल को अपनाएं। 
  6. अपनी एक पूरी नींद लें। 
  7. तनाव को मैनेज करें। 

निष्कर्ष: जॉब करने वाले लोगों में स्लिप डिस्क के कई मुख्य कारण हो सकते हैं, जिसमें ऑफिस में हर वक्त गलत पोस्चर में बठेना, शारीरिक व्यायाम या फिर एक्सरसाइज की कमी होना और मेंटल स्ट्रेस और नींद की कमी होना आदि जैसे कई लक्षण शामिल हो सकते हैं। इससे एक व्यक्ति की सेहत काफी ज्यादा प्रभावित हो सकती है। जॉब करने वाले लोगों को इस तरह की समस्या से बचने के लिए वक्त रहते अपने लाइफस्टाइल में करना बहुत जरूरी होता है, ताकि इस समस्या में सर्जरी की नौबत आने से पहले ही इस तरह की समस्या को रोका जा सके। इसके अलावा, स्लिप डिस्क जैसी समस्या से बचने के लिए आप सही पोस्चर और रेगुलर कसरत कर सकते हैं। काम करने वाले लोगों को अपने शरीर में होने वाले किसी भी दर्द को बिल्कुल भी नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए। समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और रीढ़ की हड्डी में होने वाली किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल के विशेष्ज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।

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    क्या पूरे दिन रील्स और शॉर्ट्स को स्क्रॉल करने की आदत सच में दिमाग के लिए खतरनाक साबित हो सकती है? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

    वैसे तो ज्यादातर लोग अपने काम ही व्यस्त रहते हैं, पर काम के बीच जैसे ही उन को वक्त या फिर ब्रेक मिलता है, तो वह तुरंत अपने मोबाइल को निकालते हैं और सोशल मीडिया पर कुछ न कुछ स्क्रॉल करने लग जाते हैं। यह आदत लगभग सभी लोगों में होती है, कि खाना-खाते वक्त मोबाइल पर सोशल मीडिया स्क्रॉल करना और कहीं पर भी घूमते वक्त मोबाइल फ़ोन देखना। इन आदतों को लगातार अपनाना और एक मिनट के लिए भी अपनी आंखों और दिमाग को आराम न देना, दरअसल यह दिमागी सेहत के लिए काफी ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकता है। 

    दरअसल, ज्यादातर मोबाइल पर सोशल मीडिया पर शॉर्ट वीडियो या फिर रील्स को स्क्रोल करने की आदत लोगों के बहुत से घंटों को बर्बाद कर देती है। आज के समय में ज्यादातर लोगों को काम के चलते दिन में सोशल मीडिया पर रील्स स्क्रॉल करने का वक्त नहीं मिलता है, तो वह लोग सोने से पहले कई घंटों तक रील्स को स्क्रोल करते हैं। ऐसे में, कई लोग ऐसे भी होते हैं, जो पूरा दिन फ़ोन पर बिताकर भी सोने से पहले घंटो बैठकर बिना वजह रील्स स्क्रोल करते रहते हैं। असल में, बात यह कि लोग अपनी आदतों से मजबूर हो गए हैं, वह इन आदतों को अब बिल्कुल भी छोड़ना नहीं चाहते हैं।

    दरअसल, इसे माइंडलेस स्क्रोलिंग के नाम से भी जाना जाता है। इस आदत की वजह से लोगों को नींद पूरी न होना, सुबह के समय काफी ज्यादा थकावट महसूस करना और चेहरे का नूर गायब होना जैसी कई तरह की समस्याओं को झेलना पड़ सकता है। इसकी वजह से मानसिक सेहत पर काफी ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ रहा है और साथ में, दिमाग से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का भी खतरा काफी ज्यादा बढ़ रहा है। माना की यह मन को ख़ुशी देने वाला और एक मनोरंजन की तरह हो सकता है, पर इसका ज्यादा इस्तेमाल दिमाग की सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं होता है। ऐसे में, बहुत से लोग इसके बारे में जानना चाहते हैं, कि क्या वाकई पूरे दिन रील्स और शॉर्ट्स को स्क्रॉल करने की आदत दिमाग की सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकती है? दरअसल, डॉक्टर के अनुसार कई घंटों तक बैठकर मोबाइल पर रील्स स्क्रोलिंग करना या फिर सोने से पहले कई घंटों तक मोबाइल को देखने की आदत वास्तव में दिमाग की सेहत को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है। इसकी वजह से दिमाग को किसी भी काम में फोकस न कर पाना, मानसिक थकान महसूस होना और नींद प्रभावित होना जैसी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए अपने स्क्रीन टाइम को कम करने की काफी ज्यादा जरूरत होती है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

    रील्स और शॉर्ट्स को स्क्रॉल करने पर दिमाग को होने वाले नुकसान! 

    दरअसल, इस पर डॉक्टर का कहना है, कि आज लोग द्वारा एक ही पोजीशन में बैठकर लगातार मोबाइल पर रील्स को स्क्रॉल करने की वजह से दिमाग के सेल्स पर काफी ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ता है और इससे दिमाग का ग्रे मैटर फंक्शन बुरी तरीके से प्रभावित हो जाता है। इससे होने वाले नुकसान निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, 

    1. काम में फोकस न कर पाने की समस्या होना 

    दरअसल, लगातार कई घंटों तक माइंडलेस स्क्रॉलिंग छोटी और उत्तेजक रील्स के माध्यम से दिमाग में डोपामाइन हार्मोन को छोड़ता है, जो दिमाग को काफी ज्यादा ख़ुशी प्रदान करता है। इससे दिमाग के लिए किसी भी चीज या फिर किसी भी काम पर फोकस कर पाना बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो जाता है। जिसमें किताब पड़ना, बच्चों की पढ़ाई पर फोकस करना और कुछ सीखना जैसे काम शामिल हो सकते हैं। रोजाना रील स्क्रॉलिंग के कारण लोगों में इस तरह के कामों की रुचि काफी ज्यादा कम होने लग जाती है। 

    1. मानसिक थकान महसूस होना

    NCBI की रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर स्मार्टफोन का इस्तेमाल शारीरिक और मानसिक सेहत काफी ज्यादा प्रभावित कर सकता है। लगातार स्क्रॉलिंग से दिमाग का वो हिस्सा प्रभावित होता है, जो फैसले लेने और इमोशन्स को कंट्रोल करने का काम करता है। डिजिटल एक्साइटमेंट दिमाग को हाइपर स्टिम्युलेटेड रखता है, जिसके कारण एक व्यक्ति को बेचैनी और चिड़चिड़ापन और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का सामना करना करना पड़ता है। 

    1. नींद पर असर पड़ना

    रोजाना दिन और रात कई घंटों तक मोबाइल पर केवल माइंडलेस स्क्रॉलिंग करना न केवल हमारी शारीरिक सेहत को प्रभावित करता है, बल्कि इससे नींद का पैटर्न भी काफी ज्यादा प्रभावित हो जाता है। देर रात तक मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करने पर, फ़ोन से निकालने वाली ब्लू लाइट की वजह से मेलाटोनिन हार्मोन रिलीज नहीं हो पाता है, जिसके कारण कई बार लोगों को नींद नहीं आती या फिर आती भी है, तो देर से ही आती है, जो रात में कई बार टूट जाती है। दरअसल, नींद की कमी दिमाग के काम करने की रफ़्तार को काफी ज्यादा प्रभावित कर सकती है। इसके कारण दिमाग का काम कम हो जाता है और याददाश्त प्रभावित होने जैसी समस्या परेशान करने लग जाती है। 

    निष्कर्ष: पूरे दिन बैठकर मोबाइल पर रील्स स्क्रोलिंग करने और सोने से पहले घंटों तक मोबाइल को देखने की आदत सच में दिमाग की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। माना कि आज के समय में मोबाइल का इस्तेमाल करना जरूरी हो गया है, पर इसका सही और एक हद तक इस्तेमाल दिमाग की सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे होने वाले नुकसानों से बचने के लिए बेहतर है, कि आप माइंडलेस स्क्रोलिंग करने की बजाए अपने समय को किसी उपयोगी काम में लगाएं, ताकि इससे दिमाग और शरीर दोनों ही सेहतमंद रहें। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और दिमाग से जुड़ी किसी भी समस्या के समाधान के लिए आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।

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      शरीर में किन विटामिनों की कमी के कारण दिमाग पड़ने लगता है कमजोर? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

      स्वस्थ जीवन जीने के लिए शरीर का सेहतमंद होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इसलिए, शरीर के बाकी अंगों की तरह दिमाग को भी ठीक तरीके से काम करने के लिए पर्याप्त मात्रा में न्यूट्रिशन की जरूरत होती है। जैसे पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व न मिलने पर शरीर के बाकी अंग अच्छे से काम नहीं करते हैं, वैसे ही दिमाग भी अच्छे से काम नहीं कर पाता है। यह माना जाता है, कि दिमाग को सेहतमंद रखने के लिए विटामिन बी9 सबसे ज्यादा अहम होता है। पर, इसके अलावा भी ऐसे बहुत से विटामिन है, जो शरीर के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण माने जाते हैं। शरीर में इन की कमी दिमागी सेहत को बुरी तरीके से प्रभावित कर देती है। 

      दरअसल, शरीर में विटामिनों की पूर्ति होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि, इससे न केवल शरीर ताकतवर बना रहता है, बल्कि इससे शरीर को होने वाली समस्याएं भी दूर रहती हैं। इससे उलट अगर शरीर में विटामिनों की कमी हो जाए, तो इसके कारण दिमाग की सेहत पर काफी ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इससे दिमाग के काम करने की शक्ति प्रभावित हो सकती है। विटामिन बी1, विटामिन बी2, विटामिन बी 12, विटामिन डी और विटामिन सी जैसे विटामिनों कि कमी के कारण ही एक व्यक्ति का दिमाग काफी ज्यादा कमजोर पड़ने लग जाता है। इस तरह की स्थिति में दिमाग बीमार हो जाता है, जिससे कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पर काफी ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ता है। इन समस्याओं से अपना बचाव करने के लिए शरीर में इन विटामिनों की कमी का पूरा होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए आप इन विटामिन से भरपूर फूड्स का सेवन कर सकते हैं। इससे न केवल आपकी दिमागी कमजोरी दूर होगी, बल्कि इससे शरीर में होने वाली तमाम दिक्कतें कम हो जाएंगी। समस्या बढ़ने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

      शरीर में विटामिनों की कमी जिसके कारण दिमाग कमजोर होता है:

      दिमाग की सेहत को ठीक रखने के लिए शरीर में विटामिनों की पूर्ति होना काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, शरीर में निम्नलिखित विटामिनों की कमी के कारण दिमाग की सेहत बुरी तरीके से प्रभावित हो सकती है, जैसे कि 

      1. विटामिन बी12 की कमी होना 

      दरअसल, दिमाग को अपना काम अच्छे तरीके से करने के लिए विटामिन बी12 की महत्वपूर्ण रूप से जरूरत पड़ती है। इसके अलावा, तंत्रिका तंत्र के लिए भी विटामिन बी12 काफी ज्यादा जरूरी होता है। शरीर में इसकी कमी दिमागी सेहत को प्रभावित कर सकती है। शरीर में विटामिन बी12 की कमी न केवल दिमाग को कमजोर कर देती है, बल्कि इस के काम करने की क्षमता भी प्रभावित हो जाती है। शरीर में इस विटामिन को पूरा करने के लिए आप अपनी डाइट में डेयरी प्रोडक्ट्स को शामिल कर सकते हैं। 

      1. विटामिन बी1 की कमी होना 

      इसमें किसी भी तरह का कोई शक नहीं है, कि शरीर में विटामिन की कमी दिमागी सेहत को पूरी तरीके से कमजोर बना देती है। इसी तरह शरीर में विटामिन बी1 की कमी यानी कि थियामिन की कमी से भी दिमागी सेहत प्रभावित हो सकती है। दरअसल, इससे कभी-कभी दिमागी समस्याओं से जुड़ी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं। इसकी कमी को पूरा करने के लिए सूरजमुखी के बीज, साबुत अनाज और बीन्स का सेवन कर सकते हैं। 

      1. विटामिन सी की कमी होना 

      यह तो सभी जानते हैं, कि शरीर और हड्डियों की सेहत को बनाए रखने के लिए विटामिन सी की कितनी ज्यादा जरूरत होती है। दरअसल, विटामिन सी शरीर के काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। यह हड्डियों के साथ-साथ दिमागी सेहत के लिए भी काफी ज्यादा आवश्यक एंटीऑक्सीडेंट होता है। यह ब्रेन मॉलिक्यूल्स को खराब होने से बचाने में हमारी काफी ज्यादा सहायता करता है। इसके साथ ही, विटामिन सी दिमाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण फंक्शन के लिए जरूरी होता है। इस तरह की स्थिति में, अपने शरीर में विटामिन सी की कमी को पूरा करने के लिए आप अपनी डाइट में खट्टे फल और ब्रोकली जैसे फूड्स को शामिल कर सकते हैं। इससे आपको काफी फायदा मिल सकता है। 

      1. विटामिन डी की कमी होना 

      विटामिन डी सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इससे न केवल हमारा शरीर, बल्कि हमारा दिमाग भी ताकतवर बना रहता है। शरीर में इसकी कमी दिमाग की सेहत को प्रभावित कर सकती है। इसलिए, एक सेहतमंद दिमाग की प्राप्ति के लिए शरीर में विटामिन डी की एक सही और पूरी मात्रा होना काफी ज्यादा जरूरी होता है। क्योंकि, यह न केवल शरीर के इम्यून सिस्टम और कैल्शियम लेवल को बैलेंस रखने में सहायता प्रदान करता है, बल्कि यह शरीर में एक न्यूरोप्रोटेक्टिव एजेंट के तौर पर भी काम करता है। शरीर में इस विटामिन को पूरा करने के लिए आप कुछ वक्त तक के लिए बाहर बैठकर धुप सेक सकते हैं, इसके अलावा, आप अपनी डाइट में डेयरी प्रोडक्ट्स को भी शामिल कर सकते हैं।

      निष्कर्ष: कुल मिलाकर, शरीर में विटामिनों की कमी दिमागी सेहत को बुरी तरीके से प्रभावित कर सकती है। इससे एक व्यक्ति का सम्पूर्ण स्वास्थ्य और दिमाग के काम करने की क्षमता बिगड़ सकती है। इसलिए, अपने सम्पूर्ण स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए इस लेख में बताए गए विटामिनों की कमी का पूरा होना लाजमी होता है। इसके लिए आप विटामिन बी1, विटामिन बी2, विटामिन बी 12, विटामिन डी और विटामिन सी से भरपूर डाइट का सेवन कर सकते हैं। ऐसा करना न केवल आपको सेहतमंद रखेगा, बल्कि आपको दिमागी तौर पर भी ठीक रखेगा। दिमाग और हड्डियों से जुड़ी गंभीर समस्या होने पर आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और दिमाग से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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        महिलाओं में होने वाले हार्मोनल बदलाव क्या बढ़ा सकते हैं माइग्रेन का दर्द? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

        आज ज्यादातर महिलाएं अपने काम के चलते अपनी सेहत पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं देती हैं और ऐसे में वह कई तरह की समस्याओं का शिकार भी हो जाती हैं, जिस में उनकी सेहत बुरी तरीके से प्रभावित होना शामिल होता है। दरअसल, आज के समय में महिलाओं के गलत खान-पान, गेर-सेहतमंद लाइफस्टाइल और सेहत की अच्छे तरीके से देखभाल न करने की वजह से उनको अपने शरीर में हार्मोन असंतुलित होने की समस्या का सामना करना पड़ता है। इससे उनकी जीवनशैली बुरी तरीके से प्रभावित हो जाती है और सेहत पर भी काफी ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ता है। 

        दरअसल, शरीर में होने वाली इन हार्मोनल बदलावों की वजह से महिलाओं को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जिसमें ज्यादातर महिलाओं को शरीर में थकान महसूस होना, कमजोरी होना, चक्कर आना, मूड में बदलाव होना, तनाव होना, काफी ज्यादा गुस्सा आना, अपने काम पर ध्यान न दे पाना, चिंता करना, अच्छे से नींद न आना, चिड़चिड़ापन होना, रोजाना सिर में दर्द होना, अचानक से वजन बढ़ जाना या फिर कम हो जाना जैसी सेहत से जुड़ी समस्याएं शामिल हो सकती हैं। दरअसल, इन दिक्कतों के कारण महिलाओं को कई मुसीबतों का सामना करना पड़ता है, जिस में कि वह काफी ज्यादा हैरान और परेशान हो जाती हैं। पर, ऐसे में सवाल उठता है, कि क्या महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों की वजह से माइग्रेन का दर्द भी बढ़ सकता है? 

        दरअसल, डॉक्टर के अनुसार हाँ, महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों की वजह से माइग्रेन का दर्द बढ़ सकता है। इस दर्द के बढ़ने का मुख्य कारण पीरियड्स, प्रेग्नेंसी या फिर मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन लेवल में अचानक से होने वाली कमी होती है। इसकी वजह से ज्यादातर महिलाओं को सेहत से जुड़ी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, महिअलों के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव और माइग्रेन का दर्द बढ़ना जैसी यह दोनों समस्याएं लाइफस्टाइल से जुड़ी परेशानियों की वजह से होती है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि माइग्रेन कोई आम सिर दर्द की समस्या नहीं है, यह एक गंभीर बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को सिर में लगातार दर्द होता है और इस समस्या को केवल कंट्रोल किया जा सकता है, जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता है। यह समस्या ज्यादातर महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों और खराब लाइफस्टाइल की वजह से होती है। दरअसल, इस समस्या से राहत पाने किए के लिए आपको अपने लाइफस्टाइल में सुधार करने कि काफी ज्यादा जरूरत होती है। गंभीर स्थिति होने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

        क्या लाइफस्टाइल के कारण बढ़ते हैं माइग्रेन के ट्रिगर्स? 

        दरअसल, डॉक्टर का इस पर कहना है, कि हाँ लाइफस्टाइल की वजह से माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है। न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार, महिलाओं में माइग्रेन का संबंध हार्मोनल बदलावों और मॉडर्न लाइफस्टाइल के ट्रिगर के बीच तालमेल से है। पीरियड्स, प्रेगनेंसी या फिर पेरिमेनोपॉज के दौरान होने वाले एस्ट्रोजन लेवल में उतार-चढ़ाव की वजह से महिलाओं में माइग्रेन का खतरा और भी ज्यादा बढ़ सकता है। इसके अलावा, काफी लंबे समय तक स्क्रीन पर रहना, अनियमित नींद का होना, खाना छोड़ देना, डिहाइड्रेशन होने और काम का काफी ज्यादा तनाव होने जैसी इन गलत आदतों को अपनाने की वजह से माइग्रेन जैसी समस्या और भी ज्यादा बढ़ सकती है। दरअसल, जैसे-जैसे ज़्यादा महिलाएं डिमांडिंग प्रोफेशनल रोल में आ रही हैं और डिजिटल डिवाइस पर अपना ज्यादा समय बिता रही हैं, इससे समस्या के ट्रिगर और भी ज्यादा आम होते जा रहे हैं। 

        डॉक्टर के अनुसार माइग्रेन जैसी समस्या अक्सर हार्मोन और लाइफस्टाइल फैक्टर के बीच एक इंटरेक्शन को दर्शाती है। इसलिए, रोजाना की आदतों को मैनेज करना मेडिकल ट्रीटमेंट जितना ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, इन आदतों में समस्या के शुरुआती चेतावनी संकेतों की पहचान करना, रोजाना एक ही समय पर सोना, समय पर खाना, अपने स्क्रीन टाइम को कम करना, तनाव को मैनेज करना शामिल होता है। इन आदतों को अपनाने से माइग्रेन के एपिसोड की फ्रीक्वेंसी और गंभीरता को कम करने में काफी ज्यादा सहायता प्राप्त हो सकती है। ऐसे में, न्यूरोलॉजिस्ट से समय पर सलाह लेना काफी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। 

        लाइफस्टाइल मैनेजमेंट इतना ज्यादा क्यों महत्वपूर्ण होता है?

        इस पर डॉक्टर का कहना है, कि ज्यादातर महिलाओं को माइग्रेन की समस्या शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों और अनहेल्दी लाइफस्टाइल की वजह से होती है। इसलिए, इस तरह की स्थिति में माइग्रेन जैसी गंभीर समस्या से छुटकारा पाने के लिए अपने लाइफस्टाइल में सुधार करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। 

        आखिर क्या हो सकते हैं माइग्रेन के लक्षण?

        दरअसल, माइग्रेन के लक्षण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

        1. सिर के एक हिस्से में तेज दर्द होना। 
        2. रोशनी या फिर आवाज के प्रति सेंसिटिव होना। 
        3. मतली होना। 
        4. चक्कर आना। 
        5. बहुत ज्यादा थकान महसूस होना .

        निष्कर्ष: माइग्रेन एक गंभीर समस्या है, जिस पर ध्यान देना अति आवश्यक है। दरअसल, गैर सेहतमंद लाइफस्टाइल की वजह से महिलाओं के शरीर में हार्मोन असंतुलित होते हैं, जिसकी वजह से माइग्रेन की समस्या का खतरा बढ़ता है और दर्द भी बढ़ता है। माइग्रेन अक्सर पीरियड्स, प्रेगनेंसी और मेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव की वजह से होता है। ऐसी स्थिति में, माइग्रेन की समस्या से छुटकारा पाने के लिए अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करना महत्वपूर्ण होता है। इसके अलावा, इस समस्या से राहत पाने के लिए शरीर में हार्मोन्स का बैलेंस होना भी उतना ही ज्यादा जरूरी होता है। ऐसे में, माइग्रेन जैसी समस्या की पहचान होने पर आपको इसे नजरअंदाज करने की बजाए, तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और दिमाग से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।

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          क्या वाकई गर्भावस्था के दौरान एंग्जायटी से बच्चे के दिमाग पर भी पड़ सकता है प्रभाव? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

          इस बात को कोई भी झुठला नहीं सकता है, कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि एक महिला की प्रेगनेंसी केवल शरीर में होने वाले बदलाव ही नहीं होते हैं, बल्कि यह महिला के मानसिक और भावनात्मक बदलावों का भी एक बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता है। जिसमें महिला को एक नहीं, बल्कि शरीर से जुड़े कई तरह के बदलावों का सामना करना पड़ता है। आम तौर पर, इस दौरान महिला को कई बातों का डर सताता रहता है, जिसके कारण उसको और भी ज्यादा समस्या झेलनी पड़ती है। दरअसल, इस तरह की स्थिति में एक महिला द्वारा सोची गई हर बात का प्रभाव उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत पर भी पड़ता है। इसलिए, इस दौरान महिलाओं को और भी ज्यादा सावधान रहने की काफी ज्यादा जरूरत होती है। 

          दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि गर्भावस्था के दौरान आधे से ज्यादा महिलाओं को चिंता, डर और एंग्जायटी जैसी समस्या का अनुभव होता है। ऐसे में, महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव भी होते हैं, जिसके कारण उनके स्वभाव में भी कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। ऐसे में, महिलाओं को किसी न किसी बात का डर बना ही रहता है, जिसमें कभी डिलीवरी को लेकर डर बना रहना, कभी बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर डर बना रहना, कभी उसके विकास के बारे में डर बना रहना आदि जैसे कई डर और चिंताएं शामिल होती हैं। आम तौर पर, ऐसे में बहुत सी महिलाओं के मन में एक सवाल आता है, कि क्या गर्भावस्था के दौरान होने वाली एंग्जायटी का प्रभाव बच्चे की दिमागी सेहत पर भी पड़ सकता है? 

          दरअसल, डॉक्टर का इस पर कहना है, कि हाँ गर्भावस्था के दौरान होने वाली एंग्जायटी का प्रभाव बच्चे की दिमागी सेहत पर भी पड़ सकता है। आम तौर पर, इस दौरान अक्सर ही हल्की चिंता को काफी सामान्य माना जाता है, पर अगर यही चिंता यानी कि एंग्जायटी महिला को काफी लंबे वक्त से परेशान करती आ रही है, या फिर काफी लंबे समय से बनी हुई है, तो ऐसे में यह एक बहुत ही बड़ा चिंता का विषय हो सकता है। क्योंकि, गंभीर एंग्जायटी मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए काफी ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकती है, इससे न केवल माँ की दिमागी सेहत प्रभावित होती है, बल्कि इसके कारण बच्चे के दिमाग पर भी काफी ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ता है। आम तौर पर, अगर इस तरह की स्थिति में इस समस्या को वक्त रहते कंट्रोल न किया जाए और अगर यह और भी ज्यादा गंभीर हो जाए, तो इसके कारण बच्चे का मानसिक विकास रुक भी सकता है, जिसके कारण बच्चे की सेहत को भारी नुक्सान झेलना पड़ सकता है। इसलिए, गर्भावस्था के दौरान जितना हो सके चिंता करने से बचना चाहिए। आम तौर पर, अगर ऐसे में आपको समस्या और बगही ज्यादा गंभीर नजर आती है, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

          गर्भावस्था के दौरान आखिर क्यों बढ़ जाती है एंग्जायटी?

          यह तो सभी जानते ही होंगे, कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में कई तरह के शारीरिक और मानसिक बदलाव देखने को मिलते हैं, जो इस दौरान शरीर में होने वाले कई तरह के हार्मोनल बदलाव के कारण होते हैं। इसी के चलते महिलाओं के मूड में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इसके अलावा, इस दौरान कई और भी कारण हैं, जिसकी वजह से महिलाओं में चिंता की समस्या बढ़ती है, जिसमें से कुछ निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

          1. आर्थिक तनाव होना। 
          2. घर परिवार या फिर रिश्तों में तनाव की स्थिति होना। 
          3. पहली बार मां बनने का डर होना। 
          4. नींद पूरी न होना। 
          5. पहले हो चुके मिसकैरेज का अनुभव होना। 
          6. लगातार और हद से ज्यादा थकान महसूस होना। 
          7. सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम डरावनी जानकारी मिलना। 

          एंग्जायटी का बच्चे की दिमागी सेहत पर किस तरह का प्रभाव पड़ता है? 

          आम तौर पर, जब एक गर्भवती माँ काफी लंबे समय तक तनाव या फिर चिंता जैसी समस्या में घिरी रहती है, तो इस दौरान उसके शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल का निर्माण हद से ज्यादा होने लग जाता है। जो कि यह हार्मोन गर्भ में पल रहे बच्चे तक प्लेसेंटा के माध्यम से पहुंचता है, जो बच्चे की दिमागी सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक साबित नहीं होता है। इस पर डॉक्टर का कहना है, कि अगर गर्भवती महिला के शरीर में कोर्टिसोल का स्तर काफी लंबे वक्त तक बढ़ा हुआ रहता है, तो इसके कारण बच्चे का दिमागी विकास काफी ज्यादा प्रभावित हो जाता है। अध्ययन के अनुसार, अगर कोई बच्चा काफी ज्यादा तनाव वाली जैसी स्थिति में जन्म लेता है, तो ऐसे में आगे चलकर उस बच्चे को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिस में से कुछ निम्नलिखित अनुसार हो सकती हैं, जैसे कि 

          1. इस तरह के बच्चों को ध्यान लगाने में काफी समस्या होना। 
          2. हद से ज्यादा रोना। 
          3. काफी ज्यादा चिड़चिड़ापन आ जाना। 
          4. किसी भी चीज को सीखने में दिक्कत महसूस होना। 
          5. नींद न आने की समस्या होना। 

          ऐसे में, कौन सी चिंता सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जाती है?

          दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि जीवन में ली गई हर चिंता इतनी ज्यादा नुकसानदायक नहीं होती है, मतलब कि हल्का तनाव काफी ज्यादा सामान्य माना जाता है। पर अगर, गर्भवती महिला में निम्नलिखित लक्षण काफी लंबे समय से बने हुए हैं, तो यह गंभीर एंग्जायटी की तरफ इशारा हो सकता है, ऐसे में तुरंत डॉक्टर के पास जाने की सलाह प्रदान की जाती है। 

          1. हर वक्त किसी न किसी बात को लेकर मन में डर बना रहना। 
          2. बिना किसी बात के और बिना किसी वजह के घबराहट महसूस होना
          3. दिल की धड़कनों की रफ़्तार तेज होना। 
          4. बार-बार रोने का मन करना। 
          5. नींद न आने की समस्या होना। 
          6. नकारात्मक सोच में बढ़ोतरी होना। 
          7. किसी भी काम में मन न लगना। 
          एंग्जायटी को किस तरह कंट्रोल में किया जा सकता है?

          आम तौर पर, अगर आप अपनी एंग्जायटी की समस्या को कंट्रोल में करना चाहती हैं, तो इसके लिए आप कुछ निम्नलिखित उपायों को अपना सकती हैं, जैसे 

          1. पर्याप्त मात्रा में नींद लें। 
          2. रोजाना हल्की एक्सरसाइज या फिर ध्यान करें। 
          3. इंटरनेट पर उपलब्ध गलत जानकारी से अपना बचाव करें। 
          4. रोजाना संतुलित भोजन का सेवन करें। 
          5. अपने परिवार, पार्टनर या फिर किसी करीबी दोस्त को अपने मन की बात शेयर करें। 

          निष्कर्ष: गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं, जिसमें हल्की चिंता को एक सामान्य समस्या माना जाता है। पर, अगर यह एंग्जायटी गंभीर हो और काफी समय तक बनी रहे, तो यह माँ और बच्चे दोनों की दिमागी सेहत के लिए काफी ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकती है। इसके कारण बच्चे के व्यवहार में बदलाव और दिमागी विकास में रुकावट पैदा हो जाती है। 

          ऐसे में, अगर महिला को पैनिक अटैक, सांस लेने में परेशानी, लगातार घबराहट, काफी उदासी या फिर खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे विचारों के बारे में सोचती है, तो ऐसे में आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। इसके अलावा, सही समय पर समस्या की गंभीरता की पहचान, परिवार का प्यार और डॉक्टर की सलाह से एंग्जायटी को कम करने में मदद मिल सकती है। ऐसे में, जो माँ करती है, उसका प्रभाव बच्चे की सेहत पर भी पड़ता है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान मां का मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बच्चे के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञों से मिल सकते हैं। 

          अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

          प्रश्न 1. गर्भावस्था के दौरान दिमाग को किसी भी तरह की चिंता से दूर रखना क्यों महत्वपूर्ण होता है? 

          आम तौर पर, गर्भावस्था के दौरान एक महिला के लिए अपने दिमाग को किसी भी तरह की चिंता से दूर रखना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दौरान ज्यादा चिंता करना न केवल माँ के लिए, बल्कि होने वाले बच्चे के लिए भी काफी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। दरअसल, इस दौरान अगर गर्भवती महिला काफी ज्यादा तनाव लेती है, या फिर किसी बात की हद से ज्यादा चिंता करती है, तो इसके कारण बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास बुरी तरीके से प्रभावित हो सकता है। 

          प्रश्न 2. क्या गर्भावस्था के दौरान माँ और बच्चे के दिमाग का कनेक्शन जुड़ा हुआ होता है?

          दरअसल, आपको बता दें, कि गर्भावस्था के दौरान एक माँ और बच्चे का दिमाग हैरानीजनक और बहुत ही जटिल जैविक तंत्र के जरिए, एक बहुत ही गहराई के साथ जुड़ा हुआ होता है। 

          प्रश्न 3. क्या गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को चिंता होना आम बात होती है?

          दरअसल, हाँ गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों की वजह से इस दौरान उनको चिंता और तनाव होना बहुत ही ज्यादा आम होता है। इस दौरान महिलाओं को अपनी सेहत का महत्वपूर्ण रूप से ख्याल रखने की काफी ज्यादा जरूरत होती है। इस दौरान उन को दिमागी टेंशन से दूर रहने की सलाह प्रदान की जाती है। 

          प्रश्न 4. क्या गर्भावस्था के दौरान लिया गया तनाव बच्चे के दिमागी विकास को रोक सकता है? 

          दरअसल, हाँ गर्भावस्था के दौरान लिया काफी लंबे समय तक या फिर काफी ज्यादा तनाव बच्चे की दिमागी सेहत को बुरी तरीके से प्रभावित कर सकता है और इसके कारण दिमागी विकास धीमा भी हो सकता है। 

           

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            बार-बार सिरदर्द होने पर किन टेस्टों को करवाना हो सकता है फायदेमंद? पता चल सकती है असल वजह, डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

            आज के समय में सिरदर्द होना कोई बड़ी समस्या नहीं है, बल्कि यह एक आम समस्या है, जो किसी को भी प्रभावित कर सकती है। इसके कारण व्यक्ति को अपने जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, इसमें कोई शक नहीं है। सिर दर्द से पुरे शरीर कमजोर पड़ जाता है, व्यक्ति अपने आप को काफी कमजोर फील करता है। तो इन्हीं कारणों की वजह से व्यक्ति का न केवल रोजाना का काम प्रभावित होता, बल्कि इसके कारण वह कहीं पर जाने, किसी से बात करने और जीवनशैली के ऐसे कई कार्यों को करने में काफी ज्यादा दिक्कत महसूस करता है। ऐसे में, वो एकांत ढूंढता है और शांत जगह पर रह कर अपने आप को ठीक करने की कोशिश करता है, पर कई लोग ऐसा करके भी अपने सिरदर्द को ठीक नहीं कर पाते हैं और गंभीर सिर दर्द का शिकार हो जाते हैं, जो उनके या तो पूरे जीवन को या फिर एक पुरे दिन या फिर कुछ दिनों को प्रभावित कर सकता है। आम तौर पर, शरीर से जुड़ी गंभीर समस्या में सिर दर्द इतनी आसानी से ठीक नहीं होता है। सिर में दर्द होने के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें काम को लेकर ज्यादा टेंशन लेना, काम अधूरा रहने की टेंशन, काम पर जल्दी पहुंचने की टेंशन और घर की टेंशन होना जैसे कई कारण शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, सिर में होने वाला दर्द हार्मोनल असंतुलन, काफी ज्यादा तनाव या फिर नींद की कमी और आंखों में होने वाली कमजोरी के कारण भी यह समस्या उत्पन्न हो सकती है। 

            इस समस्या से न केवल पुरुष प्रभावित होते हैं, बल्कि महिलाएं भी काफी ज्यादा प्रभावित होती हैं। यह, समस्या बच्चों पर भी काफी ज्यादा बुरा प्रभाव डाल सकती है। इस तरह की स्थिति में, क्या आप भी सिर में बार बार हो रहे दर्द की समस्या से परेशान रहते हैं, तो इसे आम समझ कर ऐसे ही न नजरअंदाज करें, क्योंकि अगर आप ऐसे ेमिन इस दर्द को नजरअंदाज करते हैं, तो इससे दिमागी सेहत और आंखों पर काफी ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ सकता है। आंखों की रौशनी और साथ की साथ शरीर की सेहत पर भी काफी बुरा प्रभाव पड़ सकता है, जिसके कारण व्यक्ति का किसी भी काम को कर पाना मुश्किल और किसी भी बात को समझ पाना बहुत ही जयादा दिक्क्त भरा हो सकता है। इसलिए, इस दर्द को नजरंअदाज करने की बजाए, आपको इसका तुरंत इलाज करवाना चाहिए। हम में से ज्यादातर लोग इस दर्द को ठीक करने के लिए मेडिकल पर मिलने वाली दवाओं का सेवन कर लेते हैं और कुछ वक्त तक के लिए आराम पा लेते हैं, पर कुछ वक्त बार फिर यह समस्या उनको परेशान करने लग जाती है। आपको बता दें, कि अगर आपके सिर में डॉ बार बार हजो रहा है, तो इसे हल्के में न लें, क्योंकि यह कुछ स्वास्थ्य समस्याओं का भी कारण हो सकता है। स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी सिर में दर्द की समस्या हो सकती है। 

            काफी लंबे समय तक सिर में रहने वाला दर्द कई गंभीर समस्याओं का भी संकेत हो सकता है। इसलिए, दर्द होने पर इसे हल्के में लेना या फिर इसे कंट्रोल करने के लिए केवल दर्द की दवा का सेवन कर लेना ही ठीक नहीं होता है, बल्कि यह किन कारणों की वजह से हो रहा है, इसकी जांच और उस समस्या की पहचान करना दिमागी सेहत और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, मेटाबॉलिक डिजीज और न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के कारण भी सिर में दर्द की समस्या हो सकती है। अगर आप बार -बार सिर में हो रहे दर्द के पीछे की असल वजह के बारे में जानना चाहते हैं। तो आप इसके लिए कुछ टेस्टों को करवा सकते हैं, जिससे कि आप समस्या की असल वजह तक पहुंच सकते हैं, इन टेस्टों में आंखों की जांच, ब्लड प्रेशर की जांच, ब्लड शुगर की जांच, थायराइड की जांच और विटामिन डी और विटामिन बी12 की जांच शामिल हो सकती है। इन टेस्टों से आप समस्या की असल वजह तक पहुंच सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

            सिरदर्द होने पर किन टेस्टों को करवाया जा सकता है? 

            दरअसल, सिर दर्द होने पर आप निम्नलिखित टेस्टों को करवा सकते हैं, जैसे 

            1. ब्लड प्रेशर की जांच करना 

            दरअसल, अगर आप उन लोगों में से हैं, जिनके सिर में काफी ज्यादा दर्द बना रहता है, तो इस तरह की स्थिति में आपको अपने ब्लड प्रेशर की जांच जरूर करवानी चाहिए। ऐसे में, कई बार ब्लड प्रेशर ज्यादा होने के कारण भी सिर में दर्द की समस्या बनी रह सकती है। आपको बता दें, कि हाई ब्लड प्रेशर को एक चुप किलर के नाम से जाना जाता है, क्योंकि इस समस्या का कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होता है। ऐसे में, अगर आपको काफी वक्त तक सिर में दर्द बना रहता है, तो यह एक हाई बीपी जैसी समस्या का एक विशेष लक्षण हो सकता है। इसके साथ-साथ आपको चक्कर आना, धुंधला दिखाई देना या फिर शारीरिक थकान होना जैसी दिक्कत भी हो सकती है। इसलिए, हाई बीपी की जांच महत्वपूर्ण होती है। 

            1. आंखों की जांच करवाना 

            अगर आपको लगातार सिर में दर्द की समस्या बनी हुई है, तो ऐसे में आपको अपनी आंखों की जांच जरूर करवानी चाहिए। इससे समस्या की असल जानकारी प्राप्त हो सकती है। ऐसे में, आंखों की जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि कई बार हमारे द्वारा ज्यादा स्क्रीन देखने, ज्यादा तनाव लेने और गलत चश्मे का इस्तेमाल करने पर भी सिर में दर्द की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, आखॉं की रौशनी कम होने पर और चश्मे का नंबर बढ़ने पर भी सिर में दर्द की समस्या हो सकती है। दरअसल, सिर में होने वाला आंखों से जुड़ा है, या नहीं यह केवल आपको जांच के दौरान ही पता लग सकता है। 

            1. ब्लड शुगर की जांच करवाना

            हर बार सिर दर्द होना कोई आम समस्या नहीं होती है, अगर यह दर्द आपको अक्सर ही परेशान करता है, तो इस तरह की स्थिति में आपको अपने ब्लड शुगर की जांच जरूर करवानी चाहिए। क्योंकि, कई बार यह समस्या हाई ब्लड शुगर के कारण भी बनी रह सकती है। यही नहीं, अगर आपके शरीर में ग्लूकोज का स्तर नीचे हो जाता है, या फिर असंतुलित हो जाता है, तो ऐसे में आपको सिर में होने वाली समस्या ज्यादा परेशान कर सकती है। इसलिए, समय पर जांच होना महत्वपूर्ण होता है। 

            निष्कर्ष: कभी-कभार सिर में होने वाला दर्द आम हो सकता है, पर अगर अक्सर ही सिर में दर्द की समस्या बनी रहे, तो यह किसी समस्या के कारण या फिर किसी समस्या का संकेत भी हो सकता है। इसलिए, बार बार होने वाले सिर दर्द पर ध्यान देना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। अगर वक्त रहते समस्या का इलाज न हो तो, वो धीरे धीरे जानलेवा भी बन सकती है। असल में, सिर में दर्द कई कारणों से हो सकता है, जिसमें ज्यादा स्क्रीन देखना, तनाव लेना, हार्मोनल बदलाव होना जैसे कारण शामिल हो सकते हैं। विटामिन बी12 की कमी, थायराइड और हाई शुगर लेवल और आंखों से जुड़ी समस्याओं के कारण भी सिर में दर्द की समस्या बनी रह सकती है। इसलिए, आप सिर में बार-बार हो रहे दर्द के पीछे की वजह जानने के लिए इस लेख में बताये गए टेस्टों को करवा सकते हैं। इन टेस्टों से आप समस्या की असल वजह तक पहुंच सकते हैं। ज्यादा समस्या होने पर आप अपने डॉक्टर से भी संपर्क कर सकते हैं। इसके बारे में, ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और सिर में होने वाली किसी भी तरह की समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल में जाकर इस के विशेषज्ञों से इस के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

            अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

            प्रश्न 1. सिर में झनझनाहट होने के क्या कारण हो सकते हैं? 

            दरअसल, सिर में झनझनाहट होने के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें ज्यादा तनाव लेना, चिंता करना, ज्यादा स्क्रीन देखना, माइग्रेन की समस्या होना, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस होना, या फिर दिमाग की नसों पर पड़ने वाले दबाव के कारण ही इस समस्या का निर्माण हो सकता है। लक्षण गंभीर होने से पहले एक बार डॉक्टर की जरूर सलाह लें। 

            प्रश्न 2. क्या बार -बार होने वाली समस्या में टेस्टों के माध्यम से असल समस्या के बारे में पता किया जा सकता है? 

            हाँ, यह बात बिल्कुल सच है, कि अगर आपको किसी भी तरह की कोई भी समस्या बार-बार परेशान कर रही है, तो ऐसे में अगर आप इस समस्या का टेस्ट करवाते हैं, तो असल समस्या तक पहुंचा जा सकता है। इससे आप समस्या का जल्द से जल्द इलाज भी शुरू कर सकते हैं।

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              क्या वाकई चक्कर आना और सिर घूमना एक नहीं होते? डॉक्टर से जानें चक्कर आना और सिर घूमने के कारण और लक्षणों के बारे में!

              आज के समय में लोगों की दिमागी सेहत इतनी ज्यादा कमजोर हो गई है, कि वह जरा सा भार या फिर बाहर की धूप को बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं और चक्कर खाकर जमीन पर गिर जाते हैं। दरअसल, दिमागी सेहत कमजोर होने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, जिसमें खान पान का सही न होना और जीवनशैली में बहुत सी गलत आदतों को अपनाना होता है। पर, आजकल गर्मी ने अपना इतना ज्यादा कहर बरपाया है, कि कोई भी सेहतमंद व्यक्ति इससे प्रभावित हो सकता है। आम तौर पर, गर्मी के कारण व्यक्ति को एक नहीं, बल्कि कई तरह की समस्याओं का सामना करना पडता है, जिसमें शरीर को आने वाले तेज पसीने, तेज धूप और लू के कारण चक्कर आने और कई लोगों को तो धुप से इतनी ज्यादा परेशानी होती है, कि बाहर निकलते ही उन का सिर गहने लग जाता है। तो इससे यह साफ़ होता है, कि इस तरह की स्थिति में व्यक्ति को काफी ज्यादा चक्कर आने और सिर घूमने जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। इस समस्या से केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि कई देशों के लोग परेशान हैं। 

              ऐसे में, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि सिर घूमने और चक्कर आने की समस्या एक नहीं है, बल्कि ये दोनों अलग अलग हैं, पर हम में से ज्यादा लोग इन दोनों समस्याओं को एक ही मान लेते हैं और आम समझ कर नजरअंदाज या फिर अपने आप ठीक हो जाएगी इस पर छोड़ देते हैं। पर, आपको बता दें, कि शरीर में होने वाली छोटी से छोटी हलचल या फिर समस्या पर ध्यान देना और वक्त रहते डॉक्टर से मिलना काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। 

              डॉक्टर के अनुसार, चक्कर आना और सिर घूमना यह दोनों समस्याएं एक नहीं, बल्कि यह दोनों ही अलग-अलग समस्याएं होती हैं। इसके अलावा, इन समस्याओं के लक्षण, कारण और इलाज भी काफी अलग अलग होते हैं। इसलिए, इन दोनों समस्याओं के बीच के फर्क को समझना आगे की समस्याओं से बचने के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, यह इसलिए भी महत्वपूर्ण होता है, ताकि सही समय पर बीमारी का इलाज करके समस्या को बढ़ने से रोका जा सके। दिमाग शरीर का एक बहुत ही अहम पार्ट होता है, जिसका ध्यान रखना और इससे जुड़ी समस्याओं पर ध्यान देना अति आवश्यक होता है। इसलिए, अगर आपको दिमाग से जुड़ी कोई भी समस्या गंभीर रूप से या फिर लगातार परेशान करे, तो आपको दिमाग की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एक बार अपने डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए और समस्या का समाधान करना चाहिए। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

              चक्कर आने की समस्या क्या होती है? 

              गर्मियों के दिनों में, चक्कर आना एक आम समस्या है, जो किसी को भी हो सकती है। इसमें व्यक्ति अचानक से अस्थिर महसूस करने लगता है और कई गंभीर मामलों में बेहोश हो जाता है। इस दौरान पीड़ित व्यक्ति को अपनी आंखों के आगे अंधेरा छा जाना, अपना सिर काफी हल्का लगना, शरीर में कमजोरी महसूस होना और संतुलन बिगड़ना जैसे कई लक्षण नजर आ सकते हैं। 

              चक्कर आने के कारण!

              1. मानसिक तनाव होना 
              2. लो ब्लड प्रेशर की समस्या होना। 
              3. ज्यादा देर तक भूखे रहना
              4. शरीर में पानी की कमी होना 
              5. शरीर में खून की कमी होना। 
              6. अचानक उठना और बैठना। 

              सिर घूमने की समस्या क्या होती है? 

              दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि सिर घूमने जैसी समस्या को डॉक्टरी भाषा में वर्टिगो के नाम से जाना जाता है। इस तरह की स्थिति उत्पन्न होते ही व्यक्ति को अहसास होता है, कि उसके आसपास की सभी चीजें घूम रही हैं और वह इस दौरान कुछ भी सोच नहीं पाता है, की उसके साथ आखिर हो क्या रहा है। पर, इस समस्या में उसको अहसास होता है, कि आसपास की चीजें घूम रही हैं, पर वास्तव में ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता है। इस तरह की स्थिति में ठीक से चल न पाना, आँखों का अनियंत्रित हिलना, कानों में आवाज आना और मतली या फिर उल्टी होना जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। 

              सिर घूमने के के कारण!

               

              1. कान में संक्रमण या फिर कान के अंदरूनी हिस्से की समस्या होना। 
              2. माइग्रेन की समस्या होना। 
              3. दिमाग से जुड़ी कोई गंभीर समस्या। 

              चक्कर आना और सिर घूमने की समस्या का किस तरह पता लगाया जा सकता है? 

              दरअसल, अगर कोई व्यक्ति चक्कर आने और सिर घूमने जैसी समस्या से काफी ज्यादा परेशान है और वह इसके बारे में पता करना चाहता है, तो ऐसे में डॉक्टर की सलाह पर वो लोग निम्नलिखित मेडिकल टेस्टों को करवा सकता है, जैसे 

              1. खून की जांच करवाना। 
              2. ब्लड प्रेशर की जांच करवाना। 
              3. एमआरआई या फिर सिटी स्कैन करवाना। 
              4. अपने कानों की जांच करवाना। 
              5. न्यूरोलॉजिकल टेस्ट।
              6. शारीरिक जांच करवाना।

              चक्कर आने जैसी समस्या से बचने के लिए किन टिप्स को अपनाया जा सकता है? 

              आम तौर पर, चक्कर आना जैसी स्थिति से बचने के लिए आप निम्नलिखित उपायों को अपना सकते हैं, जैसे 

              1. रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें। 
              2. किसी भी तरह की परिस्थिति में अचानक से खड़े होने से बचें। 
              3. समय-समय पर भोजन करें
              4. अपनी रोजाना की डाइट में आयरन से भरपूर फूड को शामिल करें। 
              5. ज्यादा तनाव लेने से बचें। 
              6. ज्यादा शोर वाली जगह पर जाने से बचें। 

              सिर घूमने जैसी समस्या से अपना बचाव करने के लिए किन टिप्स को अपनाया जा सकता है? 

              आम तौर पर, अगर आप सिर घूमना जैसी स्थिति से अपना बचाव करना चाहते हैं, तो इसके लिए आप निम्नलिखित उपायों का इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे 

              1. ऐसे में सिर को तेजी से न घुमाएं, बल्कि धीरे-धीरे घुमाएं। 
              2. ज्यादा स्क्रीन देखने से बचें। 
              3. अपने कान के अच्छे से सफाई करें और उसकी देखभाल करें। 
              4. रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें। 
              5. एक आरामदायक और पूरी नींद लें। 
              6. कैफीन और शराब के सेवन बचें। 

              निष्कर्ष: गर्मियों के दौरान चक्कर आना और दिमाग घूमना काफी ज्यादा आम होता है। इसकी चपेट में आज कई लोग आ रहे हैं, क्योंकि गर्मी का कहर काफी ज्यादा बरस रहा है। गर्मी के मौसम में अक्सर ही लोगों को चक्कर आने और सिर घूमने जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। लोग इन दोनों को एक समझ लेते हैं, जो की अलग अलग हैं। चक्कर आना और सिर घूमना यह दोनों समस्याएं एक नहीं, बल्कि यह दोनों ही अलग-अलग समस्याएं होती हैं। इसके अलावा, इन समस्याओं के लक्षण, कारण और इलाज भी काफी अलग अलग होते हैं। इसलिए, इन दोनों समस्याओं के बीच के फर्क को समझना आगे की समस्याओं से बचने के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। जैसा कि आपको इस लेख में बताया गया है। चक्कर आना और सिर घूमने के बीच कनेक्शन यह है, कि यह दोनों एक साथ हो सकते हैं। इसलिए ज्यादा ध्यान आवश्यक होता है। वक्त रहते इन समस्याओं का इलाज करना आवश्यक होता है, नहीं तो दिमागी तौर पर यह समस्याएं काफी गंभीर भी साबित हो सकती है। इसके बारे में, ज्यादा जानने के लिए और दिमाग से जुड़ी समस्याओं का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकती है। 

              अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

              प्रश्न 1. क्या चक्कर आने पर व्यक्ति एकदम से बेहोश हो जाता है?

              दरअसल, नहीं चक्क्र आने पर व्यक्ति कभी भी एकदम से बेहोश नहीं होता है, पर हाँ अगर व्यक्ति चक्कर आने पर अचानक से बेहोश हो जाता है, तो इसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण हो सकता है। दरअसल, दिमाग में खून के प्रवाह में अस्थायी कमी होना ही इसका कारण हो सकता है। 

              प्रश्न 2. किन -किन स्थितियों में चक्कर आना आम हो सकता है?

              दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि कई स्थितियों में व्यक्ति को चक्कर आना आम हो सकता है, जिसमें अचानक से उठना या फिर बैठना, तनाव होना, चिंता करना, एनीमिया या फिर पोषण की कमी होना, गर्भावस्था की स्थिति होना, आंतरिक कान की समस्या होना और निर्जलीकरण होना जैसी कई स्थितियां शामिल हो सकती हैं। 

              प्रश्न 3. गर्मियों के दौरान व्यक्ति दिमाग से जुड़ी कौन-कौन सी समस्याओं का शिकार हो जाता है? 

              आम तौर पर, गर्मियों के दौरान व्यक्ति को दिमाग से जुड़ी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसमें हीट स्ट्रोक, ब्रेन स्ट्रोक, ब्रेन फॉग, दौरे पड़ना, माइग्रेन और गंभीर सिरदर्द जैसी कई गंभीर समस्याएं शामिल हो सकती हैं। दरअसल, इन समस्याओं के पीछे रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन और तेज धूप होने जैसे कई कारण शामिल हो सकते हैं। इसके कारण शरीर का तापमान काफी ज्यादा बढ़ जाता है, जिसकी वजह से ही यह समस्याएं होती हैं। शरीर में मौजूद अत्यधिक गर्मी के कारण दिमाग तक ऑक्सीजन और खून सही मात्रा में नहीं पहुंच पाती है और इसके कारण व्यक्ति के सोचने-समझने की क्षमता काफी ज्यादा कम हो जाती है।

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                क्या वाकई बार-बार सोचने की आदत दिमाग को थका देती है? डॉक्टर से जानें इसे कंट्रोल करने के तरीकों के बारे में!

                दरअसल, सोचना कोई बुरी बात नहीं होती है, पर हद से ज्यादा सोचना सेहत और दिमाग दोनों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। दरअसल, किसी भी बात पर सोचना एक व्यक्ति के लिए काफी आम हो सकता है। क्योंकि, हर बात पर सोचना आज एक व्यक्ति की आदत बन चुकी है। दरअसल व्यक्ति को यह सब कुछ बहुत आम लगता है, पर धीरे धीरे यह कब उसके लिए घातक बन जाता है, उसको पता भी नहीं चलता है। आम तौर पर, ऐसा हमारे साथ कई बार होता है, कि हम किसी गंभीर बात को लेकर काफी ज्यादा सोचते हैं और सोचते ही रहते हैं। इसके कारण न केवल हमारा जीवन प्रभावित होता है, बल्कि इसके कारण हमारे रोजाना के काम भी काफी ज्यादा प्रभावित हो जाते हैं। सच कहें तो ज्यादा सोचना सेहत के लिए ठीक नहीं होता है। यह माना कि कई बातों को भुलाया नहीं जा सकता है, पर भूलने की कोशिश करना और ज्यादा न सोचना ही आगे की जिंदगी के लिए ठीक रहता है। कुछ बातों को भुला देना ही आगे बढ़ने का नाम है। इसलिए, किसी भी बात को लेकर इतना ज्यादा सोचना कि सेहत खराब कर लेना, यह ठीक नहीं है। यह आप भी जानते हैं, कि कुछ भी इस दुनिया में हमेशा के लिए नहीं रहता है और कहीं न कहीं यह उत्पन्न हुई स्थिति भी खत्म हो जाती है और समय आगे बढ़ जाता है। अगर बातों का खत्म होना तय है, तो हमारा किसी भी बात को लेकर टेंशन या फिर सोचना ठीक नहीं है। 

                सच बोले, तो हम में से ज्यादातर लोग कभी न कभी इस दौर से गुजरते ही हैं। इस दौरान फर्क केवल इतना होता है, कि हम में से ज्यादातर लोग इसे बहुत जल्दी पहचान लेते हैं और बहुत से लोग इस चीज की आदत बना लेते हैं, जो उनके आने वाले जीवन के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं होता है। यह आप भी कहीं न कहीं जानते हैं, कि ज्यादा सोचना सेहत और दिमाग दोनों के लिए ठीक नहीं होता है, पर फिर भी हम इस से बाज नहीं आते हैं और खुद को इस सब में फसा कर बीमार कर लेते हैं, अपनी मेंटल हेल्थ को बुरी तरीके से प्रभावित कर लेते हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है, कि इससे हमारी मेंटल हेल्थ प्रभावित होती है, या नहीं यह सच है, इससे मेंटल हेल्थ क्या इससे शारीरिक सेहत भी बुरी तरीके से प्रभावित होती है। इसलिए, किसी भी चीज को लेकर बैठे रहना और उसके बारे में सोचते रहना अच्छी बात नहीं होती है। इस से बात नहीं बनती, इस से केवल मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंचता है। लोगों का मानना है, कि सोच हर कोई लेता है, पर इसे कोंट्रल कोई-कोई ही कर पाता है। पर, ऐसा नहीं है, यह सभी के लिए महत्वपूर्ण है अपने ज्यादा सोचने की शक्ति को कंट्रोल में करना और आप यह बखूबी कर सकते हैं। दरअसल, इसे कंट्रोल करने के लिए आप अपने आप से बात करें, अपने साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं, अपने मन को उस बात की तरफ न लेकर जाएं, अपने आप को किसी न किसी काम में बिजी रखें, दोस्तों के साथ बाहर घूमने निकल जाये, किसी भी बात को मन में न रखें उसे बाहर निकालने की कोशिश करें, अपने आप से सवाल पूछे, हर बात को इतना महत्व न दें और खुद के साथ थोड़ा नरम रहें आदि। समस्या बढ़ने पर आप डॉक्टर से भी मिल सकते हैं। आगे जानते हैं। 

                बार-बार सोचने की आदत को कंट्रोल करने के तरीके!

                1. बात को मन में रखने के बजाय बाहर निकालें 

                दरअसल, दिमाग में चलने वाली बात को लिखने या फिर किसी कोप कह देने से काफी फर्क पड़ सकता है। इससे मन हल्का होता है। 

                1. हर बात को इतना महत्व मत न दें 

                हर बात को महत्व देना और बात को लंबा खींचना ठीक नहीं। समय बीतने पर बात अपने आप हल्की लगने लगती है।

                निष्कर्ष: हर व्यक्ति का किसी न किसी बात पर सोचना एक आम बात है। पर, हद से ज्यादा सोचना मेंटल हेल्थ पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। ज्यादा सोचने से किसी बात का समाधान नहीं होता है, केवल स्वास्थ्य बिगड़ता है और आप यह बखूबी जानते है। क्या आप भी एक बात को लेकर बार-बार सोचते रहते हैं और आप इस से कई बार बहुत ज्यादा परेशान भी हो जाते है, तो इसे कंट्रोल करने के लिए आप इस लेख में बताए गए तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और दिमाग से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं। 

                अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

                प्रश्न 1. क्या ज्यादा सोचना सेहत और दिमाग दोनों के लिए ठीक नहीं होता है? 

                हाँ, यह बात बिल्कुल सही है, कि ज्यादा सोचना सेहत और दिमाग दोनों के लिए ठीक नहीं होता है। इसलिए दिमाग और मन को ज्यादा सोचने पर मजबूर न करें। 

                प्रश्न 2. क्या सोचने से समस्या का हल होता है? 

                नहीं, केवल ज्यादा सोचने से और बात को बढ़ावा देने से समस्या का हल नहीं होता है, बल्कि यह तो तनाव और ओवरथिंकिंग का कारण बनता है। 

                प्रश्न 3. में अपने आप को ज्यादा खुश कैसे रख सकता हूँ?

                दरअसल, आप अपने आप को खुश रखने के लिए हमेशा सकारात्मक सोचें, अपने आप से बात करें, रोजाना व्यायाम करें, अपने मन को खुश करने के तरीकों को अपनाये, दूसरों से उम्मीदें न के बराबर रखें, सेहतमंद खाने का सेवन करें, वर्तमान में जीना सीखें और समय की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण बात कि अपनी तुलना दूसरों से न करें और अपनी की गई गलतियों से सीखें और भुला कर आगे बड़े। 

                प्रश्न 4. क्या अपने आप को खुश रखना जरूरी है? 

                जी हाँ, खुद को खुश रखना बेहद जरूरी है, यह न केवल अपने लिए, बल्कि मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए भी काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।

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                  आखिर दिमाग को कौन से विटामिन की जरूरत सबसे ज्यादा होती है? डॉक्टर से जानें इसके बारे में!

                  दरअसल, दिमाग से जुड़ी किसी तरह की समस्या हमारे सम्पूर्ण स्वास्थ्य को बुरी तरीके से प्रभावित करके रख सकती है। इस बात से आज कोई भी अनजान नहीं है, क्योकि दिमाग हमारे शरीर का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग माना जाता है, जो शरीर से जुड़ी हर गतिविधि को करने में मदद करता है। आम तौर पर, इसके बिना शरीर का कोई भी अंग सही तरीके से काम नहीं कर सकता है। दरअसल, यह शरीर के बाकी सभी अंगों को काम करने का निर्देश प्रदान करता है। इसलिए, इसकी हद से ज्यादा देखभाल करने की काफी ज्यादा जरूरत होती है। आम तौर पर, अगर इसकी सही तरीके से देखभाल न की जाए और इस को सही और सेहतमंद पोषण प्रदान न किया जाये, तो इसके कारण शरीर के आधे से ज्यादा काम गड़बड़ा सकते हैं। इसलिए, शरीर के सभी कामों को अच्छा रखने के लिए और शरीर को सेहतमंद बनाए रखने के लिए एक सेहतमंद डाइट का सेवन करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आम तौर पर, अगर आप ऐसा नहीं करते हैं और अपने दिमाग की अच्छे से देखभाल नहीं करते हैं, तो इसकी वजह से न केवल शरीर की सेहत पर बुरा असर पड़ता है, बल्कि इसकी वजह से दिमाग की सेहत भी बुरी तरीके से प्रभावित हो सकती है। 

                  आम तौर पर, आप अपने दिमाग को सेहतमंद रखने के लिए कई तरह के सेहतमंद भोजन का सेवन कर सकते हैं, पर इसके अलावा, भी आप अपने दिमाग को तरोताजा और सेहतमंद रखने के लिए ऐसे कई सप्लीमेंट्स का सेवन कर सकते हैं, जो दिमाग की सेहत के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इन सप्लीमेंट्स में, विटामिन डी, बाकोपा मोनिएरी, निकोटिनमाइड मोनो न्यूक्लियोटाइड और विटामिन बी12 जैसे महत्वपूर्ण सप्लीमेंट्स शामिल हो सकते हैं। दिमाग को बूस्ट करने के लिए इन सप्लीमेंट्स का सेवन करना लाभदायक साबित हो सकता है। यह सप्लीमेंट्स शारीरिक और दिमागी सेहत दोनों के लिए काफी प्रभावशाली साबित हो सकते हैं। क्योंकि, यह न केवल अल्जाइमर की समस्या के खतरे को कम करने में काफी मददगार साबित हो सकते हैं, बल्कि दिमाग की सेहत को बेहतर बनाकर डिमेंशिया होने के खतरे को भी कम करने में काफी मददगार साबित हो सकते हैं। ऐसे में, दिमाग से जुड़ी कोई भी गंभीर समस्या में आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

                  दिमाग की सेहत के लिए जरूरी विटामिन्स!

                  दिमाग के लिए महत्वपूर्ण विटामिन और सप्लीमेंट्स निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि

                  1. विटामिन डी 

                  दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि विटामिन डी शरीर के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आम तौर पर, इसकी कमी अल्जाइमर रोग के खतरे को काफी ज्यादा बढ़ा सकती है। इसलिए, शरीर में इसकी पर्याप्त मात्रा का होना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दरअसल, शरीर में इसकी पर्याप्त मात्रा होने पर न केवल इम्यून सिस्टम मजबूत रहता है, बल्कि यह शरीर की हड्डियों को भी मजबूत बनाये रखने में काफी ज्यादा सहायता प्रदान करता है। आम तौर पर, जो महिलाएं लगभग 50 साल से भी ज्यादा उम्र की होती हैं, उनमें इस की कमी काफी ज्यादा मात्रा में पाई जाती है, जिस के कारण उनकी हड्डियां और इम्यून सिस्टम काफी ज्यादा कमजोर हो जाता है। इसलिए, अक्सर डॉक्टर मैग्नीशियम सप्लीमेंट के साथ उन को विटामिन डी सप्लीमेंट का सेवन करने की सलाह प्रदान करते हैं। इससे न केवल शरीर की हड्डियां मजबूत होती हैं, बल्कि इसकी कमी के कारण होने वाली बीमारियों का जोखिम भी काफी कम हो जाता है। 

                  1. बाकोपा मोनिएरी सप्लीमेंट्स 

                  दरअसल, बाकोपा मोनिएरी जिसे शॉर्ट में बाकोपा के नाम से जाना जाता है। आम तौर पर, यह बात बिल्कुल साफ़ है, कि हम में ज्यादातर लोग इसके बारे में नहीं जानते होंगे, पर सेहत के लिए यह सप्लीमेंट बहुत ही ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। आम तौर पर, अगर कोई व्यक्ति अल्जाइमर की समस्या से पीड़ित है, तो इसके सेवन से यह समस्या काफी हद ठीक हो सकती है, मतलब, कि याददाश्त बेहतर हो जाती है। इसके अलावा, इससे नींद में हुई गड़बड़ी ठीक होती है और अल्जाइमर के लक्षणों में काफी हद तक कमी आए जाती है। इसके साथ ही, अगर कोई बच्चा अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर से ग्रसित है, तो ऐसे में बाकोपा का सेवन इसके लक्षणों को कम कर सकता है और उनके व्यवहार को बेहतर बनाने में मदद प्रदान कर सकता है। 

                  निष्कर्ष: दिमाग शरीर के एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंगों में से एक माना जाता है। शरीर की सभी गतिविधियों में दिमाग का एक अहम रोल होता है। यह शरीर के बाकी सभी अंगों को काम करने का निर्देश प्रदान करता है। इसके ठीक न होने पर शरीर के आधे से ज्यादा काम गड़बड़ा जाते हैं, इसलिए इसकी हद से ज्यादा देखभाल करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दिमाग को सेहतमंद रखने के लिए एक सेहतमंद और पौष्टिक आहार का सेवन करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इसके साथ-साथ सप्लीमेंट्स का सेवन करना भी काफी ज्यादा महत्वपूर्ण और काफी ज्यादा लाभदायक साबित होता है। दिमाग को बूस्ट करने के लिए कुछ सप्लीमेंट्स का सेवन करना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। इसमें विटामिन डी और विटामिन बी12 जैसे सप्लीमेंट्स का सेवन करना शामिल होता है। यह दिमाग को कई जोखिम भरी बीमारियों से दूर रखने में मददगार साबित होते हैं। दिमाग के लिए विटामिन डी हद से ज्यादा जरूरी होता है। इसके साथ ही अगर दिमाग को पर्याप्त मात्रा में विटामिन बी12 न दिया जाये, तो इसके कारण दिमाग से जुड़ी कई दिक्कतें हो सकती हैं। इसलिए, दिमाग को सेहतमंद रखने के लिए सप्लीमेंट्स का सेवन करना महत्वपूर्ण माना जाता है और यह जरूरी भी होते हैं। दिमाग से जुड़ी कोई भी समस्या होने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और दिमाग से जुड़ी किसी भी समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।  

                  अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

                  प्रश्न 1. क्या शारीरिक सेहत के लिए सप्लीमेंट्स महत्वपूर्ण होते हैं? 

                  आम तौर पर, सप्लीमेंट्स शरीर में किसी विशेष कमी, गर्भावस्था, बढ़ती उम्र या फिर डॉक्टरी सलाह में काफी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकते हैं, पर हमेशा शारीरिक सेहत के लिए सप्लीमेंट्स जरूरी नहीं होते हैं। क्योंकि, पौष्टिक आहार का सेवन करने से जो पोषक तत्व प्राप्त होते हैं, वो काफी फायदेमंद माने जाते हैं। गैर जरूरी सप्लीमेंट का सेवन करना न केवल शारीरिक सेहत के लिए, बल्कि दिमाग के लिए भी हानिकारक साबित हो सकते हैं। इसलिए बिना किसी डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट का सेवन नहीं करना चाहिए। 

                  प्रश्न 2. सप्लीमेंट्स को कितनी मात्रा में लेना चाहिए?

                  दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और शरीर में विशेष पोषक तत्वों की कमी पर सप्लीमेंट्स का सेवन करना निर्भर करता है। पर, आम तौर पर आपको हर दिन सिर्फ़ 1 से 2 टैबलेट या फिर प्रोडक्ट लेबल पर बताई गई मात्रा में ही गोलियों को लेना चाहिए। 

                  प्रश्न 3. क्या छोटी उम्र के बच्चे सप्लीमेंट्स का सेवन कर सकते हैं?

                  आम तौर पर, हाँ डॉक्टर की सलाह पर छोटे बच्चे सप्लीमेंट्स का सेवन कर सकते हैं, पर इसका सेवन बच्चों को तभी करना चाहिए, जब उनके शरीर में किसी विशेष पोषण की कमी हो। 

                  प्रश्न 4. हर समस्या में सप्लीमेंट्स का सेवन करना ठीक होता है? 

                  नहीं, डॉक्टर के अनुसार हर समस्या के दौरान सप्लीमेंट्स का सेवन करना बिल्कुल भी ठीक नहीं होता है।

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                    क्या अक्सर आपको भी चक्कर आने की समस्या का करना पड़ता है सामना? डॉक्टर से जानें, आखिर किस वक्त इसे गंभीरता से लेना चाहिए?

                    असल में, किसी काम के चलते या फिर शरीर में पोषक तत्वों की वजह से कई बार लोग चक्कर खाकर जमीन पर गिर जाते हैं। दरअसल, जरूरी नहीं है, कि यह समस्या इन्ही कारणों की वजह से हो। चक्कर आना एक आम समस्या है, जिससे लोग कभी भी और किसी भी वक्त प्रभावित हो सकते हैं। यह समस्या बड़ों से लेक्ट छोटे बच्चों तक सभी में देखि जा सकती है। इस समस्या के कारण हो सकते हैं, जिसमें कोई गंभीर बीमारी होना, शरीर में कमजोरी होना, काफी ज्यादा धुप में रहना, तनाव होना, काम का प्रेशर होना या फिर किसी में बात में गहराई से डूबे रहना जैसी दिक्क्तें शामिल हो सकती हैं। दरअसल, इस तरह की समस्या में व्यक्ति अपने होश खो बैठता है और जमीन पर गिर जाता है। यह समस्या काफी ज्यादा परेशान कर देने वाली होती है। 

                    आपने बहुत बार इस बात का अनुभव किया होगा, कि कई बार अचानक से उठने और बैठने पर चक्कर आ जाता है। जिससे हम काफी ज्यादा घबरा भी जाते हैं, पर कई बार आम समझ कर ऐसे ही नजरअंदाज कर देते हैं। दरअसल, यह बात बिल्कुल सच है, कि इस तरह की स्थिति को अक्सर ही हम कभी भी गंभीरता से नहीं लेते हैं और वक्त पर इस समस्या का समाधान नहीं ढूंढ़ते हैं। क्योंकि, यह समस्या कुछ देर बाद अपने आप ही ठीक हो जाती है और कोई दिक्कत भी नहीं देती है। दरअसल, कई बार चक्कर आना और सिर घूमने जैसी स्थिति के पीछे बहुत सी मेडिकल स्थितियां होती हैं, जिन पर ध्यान देना अति आवश्यक होता है। अगर ऐसे में आप बार-बार चक्कर आना या फिर काफी लंबे वक्त तक इस समस्या की चपेट में घिरे हुए हैं, तो यह आपकी सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं होता है। और तो और अगर आप इसके साथ-साथ बुखार, सिरदर्द और दिल कि धड़कनों का बढ़ना, हाथ-पैरों का सुन्न होना, बोलने में परेशानी महसूस होना और सीने में दर्द होना जैसे लक्षणों को महसूस कर रहे हैं, तो आपको इस दौरान इस बात का इन्तजार नहीं करना चाहिए, कि यह अपने आप ठीक हो जाएगा, बल्कि आपको इस समस्या के समाधान के लिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसे में, इस तरह की स्थिति को गंभीरता से लेना चाहिए। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

                    चक्कर आने की समस्या को गंभीरता से कब लेना चाहिए? 

                    नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ की एक रिपोट् के अनुसार, चक्कर आना एक आम समस्या है, मतलब कि चक्कर आना या फिर सिर घूमना अपने आप में ही कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर से जुड़ी किसी अन्य बीमारी का संस्कृत जरूर हो सकता है। इसे नजरअंदाज न करें। दरअसल अचानक से संतुलन बिगड़ने, सिर को हिलाने या फिर सोते वक्त करवट बदलने और खड़े होने पर बीपी कम होने जैसी स्थिति में अगर आपको चक्कर आने का अहसास होता है, तो यह एक चिंता का विशेष हो सकता है। इस दौरान इसे गंभीरता से लेना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इस समस्या के लक्षण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

                    1. हाथ और पैरों का सुन्न हो जाना 

                    ऐसे में, अगर किसी व्यक्ति को चक्कर आने के साथ-साथ हाथ-पैर सुन्न होने जैसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है, तो इस तरह की स्थिति एक चिंता का विषय बन सकती है, जिसे हल्के में लेना खतरे से खली नहीं होता है। आपको बता दें, कि यह एक तरीके का न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का लक्षण हो सकता है। इसके अलावा, शरीर में कमजोरी होना, चलने या फिर खड़े होने में दिक्क्त महसूस होने जैसे अन्य लक्षणों पर भी ध्यान देना अति आवश्यक होता है। 

                    1. कुछ भी बोलने में परेशानी महसूस होना 

                    आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि हम में से कई लोग चक्कर आने की समस्या को आम समझ कर ऐसे ही नजरअंदाज कर देते हैं और फिर बाद में पछताते हैं। दरअसल, चक्कर आने के साथ-साथ अगर आपको बोलने में किसी भी तरह की कोई दिक्कत महसूस होती है, तो आपको इस विषय पर तुरंत अपने डॉक्टर से चर्चा करनी चाहिए, क्योंकि यह शरीर से जुड़ी किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। दरअसल, जिस वक्त आपकी नजर धुंधली हो जाती है और दिमाग में धुंधलापन या फिर कन्फ्यूजन जैसा कुछ महसूस होता है, तो यह समस्या उस वक्त और भी ज्यादा गंभीर जो जाती है। ध्यान रखें, यह संकेत मिलते ही आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। 

                    ऐसे में आपको कब डॉक्टर से मिलने की जरूरत होती है? 

                    जैसे कि इस लेख में बताये गए लक्षणों पर आपको गौर फरमाना चाहिए और इन लक्षणों के नजर आते ही आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। क्योंकि चक्कर आने जैसी समस्या में यह लक्षण काफी ज्यादा गंभीर होते हैं। अगर आप समस्या के इन शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें, तो आप इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं, जैसे कि 

                    1. बार-बार चक्करों का आना। 
                    2. काफी लंबे समय तक सिर का घूमना 
                    3. चक्कर आने रोजमर्रा के काम प्रभावित होना।

                    चक्कर आने पर आपको तुरंत क्या करना चाहिए? 

                    दरअसल, चक्कर आने पर आपको तुरंत तुरंत कहीं पर आराम से बैठ जाना चाहिए या फिर लेट जाना चाहिए। इसके अलावा, इस दौरान ड्राइव न करें और ज्यादा से ज्यादा पानी का सेवन करें। 

                    निष्कर्ष: कई कारणों की वजह चक्कर आ सकते हैं, जिसमें ब्लड प्रेशर का अचानक से गिरना, शरीर में पानी और पोषक तत्वों की कमी, तनाव या फिर किसी दवा का प्रभाव शामिल होता है। चक्कर के साथ बुखार, सिरदर्द और दिल कि धड़कनें बढ़ जाएँ तो यह चिंता की बात हो सकती है। ऐसे में आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और दिमाग से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए आप न्यूरो सिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।

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