सांस लेने में हो रही परेशानी के मुख्य कारण क्या है और इस दौरान क्या करना करना चाहिए ?

सांस लेने में परेशानी होना स्वास्थ्य से जुड़ा एक आम समस्या है, जो कई लोगों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है | यह समस्या एक व्यक्ति को न केवल शरीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी प्रभावित कर सकता है | इसलिए इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति के लिए यह ज़रूरी होता है की वह सांस लेने में हो रही परेशानी को ठीक से समझें और अपनी समस्यों के उपचार को महत्ववपूर्ण दें | आइये जानते है इस विषय के बारें में विस्तारपूर्वक से :- 

 

सांस लेने में परेशानी क्यों होती है और इसके मुख्य कारण क्या है ? 

सांस लेने में परेशानी होने के विभिन्न कारक हो सकते है, जो हलके से लेकर गंभीर स्थितिओं को उत्पन्न कर सकती है | सांस लेने में हो रही कठिनाई के सामान्य लक्षणों में शामिल है :- 

 

श्वसन संक्रमण 

बदलते मौसम के साथ-साथ सामान्य सर्दी, फ्लू, ब्रोंकाइटिस या फिर निमोनिया जैसे संक्रमणों से वायुमार्ग में संकुचन और सूजन होने लग जाता है, जिसकी वजह से एक व्यक्ति के लिए सांस लेना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है | 

 

अस्थमा 

अस्थमा एक ऐसी समस्या है जिसकी वजह से सांस लेने में परेशानी होने लग जाती है, यह स्थिति पुरानी वायु मार्ग की सूजन और संकुचन के कारण बनता है, जो सांस लेने में तकलीफ, घरघराहट की आवाज़ और खांसी जैसे लक्षणों को उत्पन्न करता है | 

सांस क्यों कठिन होती है और इसे कैसे प्रबंधित करें

सीपीओडी यानी क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज      

सीपीओडी यानी क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज फेफड़ों से जुडी एक आम बीमारी है, जिसकी वजह से सांस लेने में परेशानी होने लग जाती है | सीपीओडी में क्रोनिक ब्रोंकाइटिस और वातस्फीति जैसे स्थितियां शामिल होती है | 

 

किसी चीज़ से एलर्जी होना 

धूल के छोटे-छोटे कण, पालतू जानवरों के रुसी, पराग या फिर कुछ खाद पदार्थ से एलर्जी की प्रतिक्रिया श्वसन संबंधी लक्षण को उत्पन्न कर सकते है, जिससे आपको सांस लेने में समस्या हो सकती है |   

 

अत्यधिक चिंता में रहना और घबराहट 

तीव्र चिंता और घबराहट होने वाली स्थिति से आपको तेज़ी से सांस लेने, सीने में जकड़न होना और सांस लेने के लिए संघर्ष करने की अनुभूति हो सकती है | 

 

हृदय से जुड़ी स्थितियां 

हृदय के स्वास्थ्य से जुड़े कुछ स्थितियां जैसे की कार्डियक अरेस्ट, कोरोनरी धमनी रोग या फिर अतालता सहित विभिन्न समस्याएं हृदय के रक्त को पंप करने की क्षमता को प्रभावी ढंग से ख़राब कर देती है, जिसकी वजह से सांस फूलने लग जाता है | 

 

वजन का अनियमतता से बढ़ना 

कई मामलों में सांस फूलने की मुख्य वजह मोटापा भी होता है, क्योंकि अत्यधिक वजन श्वसन में दबाव डालते है, जिससे सांस लेने में काफी दिक्कत होती है |   

 

पल्मोनरी अम्बोलिज़्म 

फुफफुसीय धमनी में होने वाले रक्त के धक्के, जो फेफड़ों में रक्त की आपूर्ति करता है, वह रक्त प्रवाह में बाधा डाल सकता है, जिससे सांस लेने में परेशनी हो सकती है | 

 

फेफड़ों से जुड़ा रोग 

फेफड़ों का कैंसर, फुफफुसीय फाइब्रोसिस या फुफफुसीय के उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियां फेफड़ों की कार्यप्रणाली को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है | जिसके परिणामस्वरुप सांस लेने में परेशानी हो जाती है | 

 

अन्य कारक 

अधिक ऊंचाई, प्रदूषकों के संपर्क में आने से, धूम्रपान करने से, कुछ दवाएं और एनीमिया या फिर न्यूरोमस्कुलर से जुड़े कुछ विकार से भी सांस लेने में समस्या होने लग जाती है |       

 

सांस लेने में हो रही परेशानी के मुख्य लक्षण क्या है ? 

सांस लेने में हो रही परेशानी से आप कई तरह के लक्षणों से गुजर सकते है जैसे की सांस लेने के साथ-साथ घबराहट होना, दम घुटना, श्वास में कष्ट होने का अनुभव होना, सांस को अच्छी तरह से खींचने में परेशानी होना या फिर दर्द महसूस होना और सांस लेते समय सांस के फूलने का अनुभव करना आदि शामिल है |    

 

सांस लेने में हो रही परेशानी के दौरान करें ? 

यदि आप या फिर आपका कोई परिजन को सांस लेने में परेशानी में हो रही है, तो इस दौरान तुरंत करवाई करने की आवश्यकता पड़ सकती है | नीचे दिए उपायों के अनुसरण से आप सांस लेने में हो रही परेशानी को कम करने की कोशिश कर सकते है :- 

 

  • सबसे पहले शांत रहे, क्योंकि घबराने से सांस लेने में काफी परेशानी होती है, इसलिए शांत और केंद्रित रहने की कोशिश करें | 


  • यदि आपकी स्थिति गंभीर होती जा रही है या फिर इससे संबंधित लक्षण लगातार गंभीर हो रहे है तो बिना समय को व्यर्थ किए तुरंत आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करें या फिर अपने निकटतम आपातकालीन कक्ष में जाएं  | 


  • सीधा और थोड़ा आगे की ओर होकर बैठें | ऐसा करने से वायुमार्ग को खोलने और सांस लेने में सुविधा प्राप्त हो सकती है |


  • डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाओं का समय-समय पर सेवन करते है, क्योंकि यह सांस लेने में हो रही परेशानी को कम करने में मदद करता है |   


  • कोशिश करें थोड़े ढीले और आरामदायक कपडे को ही पहने | 


  • खुद को हाइड्रेट रखने के लिए पानी पीते रहे, क्योंकि शुष्क वायु मार्ग होने से भी सांस लेने में परेशानी होती है | 


यह सब करने के बाद भले ही आपकी सांस लेने में हो रही परेशानी कम हो जाएं या फिर सुधार हो जाएं, फिर भी इसके अंतर्निहित कारणों को निर्धारित करने के लिए और उचित उपचार को प्राप्त करने के लिए चिकित्सा से मूल्यांकन ज़रूर करवाएं | इसके लिए आप न्यूरोसिटी हॉस्पिटल से परामर्श कर सकते है | इस संस्था के सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर विकेश गुप्ता पंजाब के बेहतरीन पुमोनोलॉजिस्ट में से एक है, जो आपकी समस्या का सटीकता से इलाज करने में मदद कर सकते है | इसलिए परामर्श के लिए नियुक्ति को बुक करने के लिए आज ही न्यूरोसिटी हॉस्पिटल को ऑफिसियल वेबसाइट पर जाएं | इसके अलावा आप वेबसाइट पर मौजूद नंबरों से भी बातचीत कर सकते है |

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    अस्थमा क्या है, इसके मुख्य लक्षण, कारण और कैसे करें इलाज ?

    अस्थमा एक श्वसन से संबंधित स्थिति है, जो एक व्यक्ति के फेफड़ों को प्रभावित कर सकती है | इस स्थिति में पीड़त व्यक्ति की ब्रोंकिन्याल ट्यूब में सूजन आ जाती है, जिसके कारण मांसपेशियों के बीच हवा ठीक से पास नहीं हो पाता और सांस लेने में काफी परेशानी होने लग जाती है | ऐसी में व्यक्ति जब साँस लेता है, तो उससे घरघराहट की आवाज़ आने लग जाती है | अस्तमा एक गंभीर समस्या है, जिसका सही समय पर इलाज करवाना बेहद ज़रूरी होता है, क्योंकि सही समय पर इलाज न मिलने पर यह पीड़ित व्यक्ति के लिए घातक साबित हो सकता है | आइये जानते है अस्थमा क्या है और इसके मुख्य लक्षण और कारण क्या है :- 

     

    अस्थमा क्या है ?     

     

    जब भी एक व्यक्ति सांस लेता है, तो शरीर के नाक और मुंह के द्वारा गले से होकर या फिर एयरवेज़ से होते हुए फेफड़ों तक पहुँचती है | फेफड़ों में छोटे-छोटे वायुमार्ग मौजूद होते है, जो हवा से ऑक्सीजन को अलग करके इससे ब्लड तक पहुंचने का काम करते है | लेकिन जब वायुमार्ग में सूजन आ जाती है और मांसपेशियों में तनाव होने लग जाता है तो इससे अस्थमा की समस्या उत्पन्न हो जाती है | जिससे वायुमार्ग में बलगम जमने लग जाता है और सांस लेने में परेशानी होने लग जाती है | जिसकी वजह से छाती में जकड़न और खांसी जैसी स्थिति महसूस होने लग जाती है | जिससे अस्थमा या फिर दमा कहा जाता है | 

    अस्थमा कितने प्रकार के होते है ?   

     

    अस्थमा के प्रकार इसके लक्षण और कारणों के आधार पर निर्भर होते है, जिनमें शामिल है :-

     

    • इंटरमिटेंट अस्थमा :- इस प्रकार के अस्थमा में व्यक्ति को अस्थमा रुक-रुक कर होता है, इसका मतलब यह है की कभी यह आता है और कभी यह चला जाता है | इस तरह के समस्या में व्यक्ति बीच-बीच में सामान्य महसूस कर सकता है |  

     

    • लगातार अस्थमा :-  इस तरह के अस्थमा के लक्षण सबसे अधिक दिखाई देते है, और व्यक्ति को यह लक्षण हलके, मध्यम या फिर गंभीर महसूस हो सकते है | 

     

    अस्थमा के प्रमुख लक्षण कौन-से है ? 

     

    • छाती में जकड़न होना 
    • साँस लेने में तकलीफ होना 
    • अधिक थकान महसूस करना 
    • बलगम वाली खांसी का होना या फिर सुखी खांसी होना 
    • रात के समय स्थिति का और भी गंभीर होना 
    • बार-बार इन्फेक्शन होने का खतरा 
    • हंसते समय खांसी होना 

     

    अस्थमा के प्रमुख कारण कौन-से है ? 

     

    • अनुवांशिक कारण 
    • वायरल संक्रमण का इतिहास होना 
    • किसी चीज़ से एलर्जी होना 
    • ख़राब मौसम के कारण 
    • हाइजीन हाइपोथिसिस
    • रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन जैसी स्वास्थ्य स्थितियां  

     

    अस्थमा से कैसे पाएं निदान ? 

     

    अस्थमा के इलाज के लिए श्वास व्यायाम, प्राथमिक उपचार, अस्थमा कंट्रोल करने वाली दवाएं और लम्बे समय तक चलने वाले उपचार होते है | एक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता मरीज़ की उम्र, मेडिकल हिस्ट्री, स्थिति की गंभीरता और अस्थम के प्रकार  को जानने के बाद ही इसके उचित उपचार का फैसला करता है | श्वसन व्यायाम से फेफडों में हवा के प्रवाह को बढ़ा सकते है, जिससे अस्थमा के समस्या को ठीक किया जा सकता है | 

     

    अस्थमा से पीड़ित व्यति को किन चीज़ों से रखनी चाहिए परहेज़ ?     

     

    • पैकेटबंद फ़ूड का सेवन न करें 
    • शराब और धूम्रपान जैसी नशीली पदार्थों से दूर रहे 
    • अचार का सेवन कम करें 
    • मूंगफली खांसी की समस्या को बढ़ावा देती है, इसलिए इससे दूर रहे 
    • ठंडी चीज़ों का सेवन न करें 
    • तैलीय चीज़ों से दूर रहे 

    Shortness of breath and chest discomfort during a health consultation.

    अस्थमा इलाज के लिए घरेलु उपाय 

     

    • अदरक है अस्थमा के लिए फायदेमंद :- अदरक को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर, इससे पानी में मिलाकर अच्छे से उबाल लें और इस पानी को छानकर, ठंडा होने पर इस पेय का सेवन करें |   

     

    • लहसुन का करें सेवन :- एक गिलास दूध में लहसुन की तीन कलियाँ को डालकर, इस दूध को अच्छे से उबाल लें और फिर ठंडा होने पर इस पेय को पी ले |  

     

    • कॉफ़ी :- कॉफ़ी एक अच्छा ब्रोंकोडायलेटर होता है |   
    • अंजीर :-  तीन अंजीर के टुकड़ों को पानी में डालकर रातभर के लिए पानी में भीगों दे और सुबह उठकर इसका सेवन करें | 
    • सरसों का तेल :- सरसों के तेल में कपूर को डालकर उसे गर्म करें और फिर ठंडा होने पर इस तेल से पीड़ित व्यक्ति के छाती की मालिश करें | 

     

    अस्थमा एक गंभीर समस्या है, जिसका सही समय पर इलाज करना बेहद ज़रूरी होता है, यदि यह सब करने के बाद आपकी स्थिति में किसी भी प्रकार का सुधार नहीं आ रहा है तो इलाज के लिए आप न्यूरोसिटी हॉस्पिटल से परामर्श कर सकते है | इस संस्था के सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर विकेश गुप्ता पंजाब के बेहतरीन पुमोनोलॉजिस्ट में से एक है, जो पिछले 21 वर्षों पीड़ित मरीज़ों का सटीकता से इलाज कर रहे है | इसलिए इलाज के लिए आज ही न्यूरोसिटी होयपिटल नामक वेबसाइट पर जाएं और अपनी अप्पोइन्मेंट को बुक करें | इसके अलावा आप वेबसाइट पर दिए गए नंबरों से सीधा संस्था से संपर्क कर सकते है |     

     

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