जानिए पुरुषों में कमर दर्द के हैरानीजनक कारण क्या हो सकते है ?

कमर दर्द की समस्या चाहें हो पुरुष या हो महिला सब पर गलत और दर्दनाक असर छोड़ता है। वहीं कमर दर्द के मामलें अक्सर महिलाओं में देखने को मिलते है पर अगर इस समस्या का सामना पुरुष कर रहें हो तो कैसे हम उनके कारण, लक्षण और बचाव के तरीके जानकर उनकी रक्षा कर सकते है। तो अगर आप भी कमर दर्द की समस्या का सामना कर रहें है, तो इससे बचाव के लिए आपको लेख के साथ अंत तक बने रहना है ;

क्या है पुरुषों में कमर दर्द की समस्या ?

  • कमर दर्द की समस्या का सामना पुरुष तब करते है, जब उनके द्वारा अपने सेहत का अच्छे से ध्यान नहीं रखा जाता है।  
  • शरीर में कमजोरी के कारण भी उनको इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है। 
  • कमर में किसी तरह की चोट लगी है और उसको नज़र अंदाज़ करने से भी कमर दर्द की समस्या बढ़ जाती है।

क्या कारण है पुरुषों में कमर दर्द के ?

  • पुरुषों में कमर दर्द के कारण बहुत हो सकते है, तो चलिए इसके एक-एक कारण के बारे में जानते है, तो इसके पहले कारण में रीढ़ की हड्डी में संक्रमण है, इसलिए शायद आपके कमर दर्द होता है। इसलिए रीढ़ की हड्डी के किसी भी तरह के संक्रमण को कृपया नज़रअंदाज़ न करें। 
  • गठिया या जोड़ो की सूजन, जिससे पीठ के निचे का हिस्सा प्रभावित होता है। बहुत से मामलों में गठिया रीढ़ की हड्डी के आसपास की जगह को संकुचित कर सकता है, जो दर्द का कारण बनते है।
  • ज्यादा वजन उठाने से या एकदम शरीर पर खिंचाव डालने से रीढ़ की हड्डी के स्नायुबंधन और पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव आ सकते है। वहीं पीठ पर दबाव डालने से मांसपेशियों में दर्द होता है। जिसके कारण आपके कमर में दर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
  • रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर तंत्रिका पर दबाव पड़ने के कारण पीठ दर्द हो सकता है।
  • जिन पुरुषों को नींद संबंधी विकार होता है, उन्हें पीठ दर्द का अनुभव होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • डिस्क के अंदर का नरम पदार्थ टूटने से तंत्रिका पर दबाव पड़ता है। डिस्क रीढ़ की हड्डी के बीच कुशन का काम करती है। जो उसे आराम देती है।
  • कुछ संक्रमण नसों को प्रभावित करते है, जिसके कारण भी आप कमर में दर्द की समस्या का सामना कर सकते है।

पुरुषों को कमर दर्द से बचाव के लिए कौन-से घरेलू बातों का ध्यान रखना चाहिए !

  • अगर आप कमर दर्द की समस्या से बहुत ज्यादा परेशान है, तो इससे बचाव के लिए आपको गर्म और ठंडे हीटिंग पैड का चयन करना चाहिए, जिससे आपको कमर दर्द की समस्या से निजात मिल सकें।
  • अगर आपके कमर में दर्द बहुत ज्यादा है, तो ऐसे में आपको दर्द निवारक क्रीम को लगाना चाहिए।
  • कमर दर्द होने पर आपको योग, टहलना, व्यायाम, का सहारा लेना चाहिए।
  • अनुचित मुद्रा में काम करने के कारण भी आपको कमर दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए जरूरी है की अगर आप काफी देर से एक ही मुद्रा में बैठे है तो उसे बदले।
  • जो जूते फिट न हों और पैर, पीठ व गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव पैदा कर रहे हो, तो उन्हें बदले। वहीं पैरों को सहारा देने वाले जूतों को आपको पहनना चाहिए।

कमर दर्द के दौरान किस तरह के संकेत दिखाई देते है ! 

  • अगर पेट में और कमर में सूजन महसूस हो ये कमर दर्द के संकेत हो सकते है 
  • पुरुषों को कभी-कभी बुखार आने के कारण या गलत पोजीशन में सोने के कारण भी कमर दर्द हो सकता है। 
  • पेशाब में कठिनाई होने के कारण भी पुरुषों को कमर में दर्द हो सकता है। 
  • कमर में चोट लगने के कारण पुरुषों को कमर में दर्द महसूस हो सकता है। 
  • मलाशय में दर्द या किडनी से संबंधित समस्या होने पर भी पुरुषों को कमर में दर्द के संकेत दिख सकते है। 
  • इंफेक्शन के कारण पुरुषों को दर्द की शिकायत हो सकती है।
  • पुरुषों को रीढ़ की हड्डी में कोई विकार महसूस हो तब भी कमर में दर्द की समस्या हो सकती है। 
  • भारी वर्कआउट करने के कारण भी पुरुषों को दर्द की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

पुरुषों में कमर दर्द का इलाज क्या है ?

  • कुछ दवाइयों का सेवन अक्सर डॉक्टर करने के लिए कहते है, जिससे मरीज़ को कमर दर्द की समस्या से आराम मिल सकें।
  • बोटॉक्स में ऐंठन आने पर मोच वाली मांसपेशियों को कमजोर बना दिया जाता है, जिससे दर्द को कम करने में मदद मिलती है। वहीं इस इंजेक्शन का असर 3 से 4 महीने तक रहता है। जिससे व्यक्ति को दर्द की समस्या से निजात मिल जाता है। 
  • कोर्टिसोन को रीढ़ की हड्डी के आसपास एपिड्यूरल स्पेस में लगाया जाता है। कोर्टिसोन तंत्रिका जड़ों के आसपास की सूजन को कम करता है। वहीं इंजेक्शन से दर्द पैदा करने वाले क्षेत्रों को सुन्न किया जाता है। वहीं आप चाहें तो लुधियाना में कमर दर्द का इलाज आसानी से करवा सकते है।

सुझाव :

कमर दर्द को नज़रअंदाज़ करना काफी बड़ी समस्या है इसको झुठलाया नहीं जा सकता है। लेकिन हां आप चाहें तो इस तरह की समस्या से खुद का बचाव कर सकते है। इसके अलावा गंभीर कमर दर्द, या कमर पर चोट लगी हो तो आप इस समस्या का इलाज न्यूरो सिटी हॉस्पिटल से जरूर करवाए। 

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    सिर दर्द, चक्कर आने और घबराहट की समस्या को विशेषज्ञों की मदद से करें हल !

    अगर सिर दर्द, चक्कर आने और घबराहट की समस्या आपकी भी रोजमर्रा की समस्या बन चुकी है, तो इससे घबराए न बल्कि इसके इलाज के लिए आपको किसी बेहतरीन न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर के पास जाना चाहिए। क्युकी इस तरह की समस्या से शिकार व्यक्ति अक्सर बेहतरीन मानसिक रोग विशेषज्ञ के सम्पर्क में आते है। तो चलिए जानते है की क्या है इस तरह की समस्या और इससे हम कैसे खुद का बचाव कर सकते है ;

    सिर दर्द, चक्कर आने और घबराहट की समस्या व्यक्ति को क्यों अपना शिकार बनाती है ?

    • ये तीनों समस्याएं आपस में इंटरकनेक्टेड है और ये सेहत का अच्छे से ध्यान न रखने की वजह से होता है।  
    • वहीं सिर दर्द की बात करें, तो ये व्यक्ति को अपना शिकार तब बनाती है, जब व्यक्ति के द्वारा बहुत ज्यादा चिंता की जाती है। 
    • चक्कर की समस्या भी इसी के कारण होती है, लेकिन जब हमारे द्वारा ढंग से खाना नहीं खाया जाता, तब भी व्यक्ति चक्कर आने जैसी समस्या का सामना कर सकता है। 
    • जब व्यक्ति बिना किसी बात के घबरा जाता है या उसको किसी बात की चिंता होती है, तो भी वो घबराने जैसी समस्या का सामना कर सकता है। 

    उपरोक्त में से किसी भी तरह की समस्या का अगर आप सामना कर रहें है, तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट का चयन करना चाहिए।

    सिर दर्द, चक्कर आने व घबराहट की समस्या से कैसे करें व्यक्ति खुद का बचाव ?

    • अगर आप इन तीनों समस्याओं से निजात पाना चाहते है, तो इसके लिए सबसे पहले आपको किसी अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट के सम्पर्क में आना चाहिए। 
    • और अगर आपको चक्कर आने जैसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो इससे बचाव के लिए आपको ताजा पानी पीना चाहिए, दिनभर जरूरी मात्रा में पानी पिएं.
    • ब्लैक-टी पिएं, इसमें तुलसी और अदरक का उपयोग भी आप कर सकते है, चक्कर आने पर आप चॉकलेट खाएं, केला खाएं, आइसक्रीम खाएं, ड्राइफ्रूट्स खाएं दही और चीनी का सेवन भी आप ऐसे में कर सकते है। 
    • यदि आप घबराहट और चक्कर आने की समस्या का सामना कर रही है, तो इससे बचाव के लिए आपको सुबह की पहली स्वच्छ हवा में टहलना चाहिए, जिससे आपके तनाव से लेकर सिर दर्द की समस्या से आपको निजात मिल सकें।

    अगर आपका सिर दर्द या आपको चक्कर आने की समस्या का सामना किसी गंभीर चोट के कारण पड़ रहा है, तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोसर्जन के सम्पर्क में आना चाहिए।

    सिर दर्द, चक्कर आने व घबराहट की समस्या के इलाज का बेस्ट हॉस्पिटल !

    अगर वाकई में आपको उपरोक्त समस्या का सामना करना पड़ रहा है तो इससे बचाव के लिए आपको न्यूरो सिटी हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए। वहीं इन समस्याओं के लिए कोशिश यहीं करें की आपको सर्जरी का सहारा न लेना पड़े।

    सुझाव :

    अगर आपके दिमाग या शरीर के किसी भी हिस्से में सामान्य सी भी समस्या आए तो इससे बचाव के लिए आपको डॉक्टर का सहारा लेना चाहिए और ध्यान रहें किसी भी तरह के उपाय को अपनाने से एक बार डॉक्टरी सलाह बहुत जरूरी है।

    निष्कर्ष :

    खुद का और अपने सेहत का अच्छे से ध्यान रखें ताकि किसी भी तरह की समस्या का आपको सामना न करना पड़े और सिर दर्द, चक्कर आने और घबराहट की समस्या से निजात पाने के लिए डॉक्टरी सलाह तो बहुत जरूरी है।

    अकसर पूछे जाने वाले प्रश्न :

    बार-बार होने वाले गंभीर सिर दर्द के साथ चक्कर आने का क्या कारण हो सकता है?

    इसके सटीक कारणों का पता लगाना थोड़ा मुश्किल है, तो वहीं कुछ डॉक्टरों का कहना है की अकसर व्यक्ति सिर दर्द के साथ चक्कर आने की समस्या का अनुभव तब करता है, जब वो बहुत ज्यादा तनाव में खुद को महसूस करता है।  

    मैं सिर दर्द को चक्कर आने से कैसे अलग करूं?

    इसको अलग करना ज्यादा मुश्किल नहीं बस इसके लिए आपको ज्यादा सोचना बंद करना होगा और तनाव से दुरी बनानी होगी। इसके अलावा स्थिति ज्यादा गंभीर होने पर आप डॉक्टर का सहारा भी लें सकते है।

    दवा के बिना चिंता के कारण होने वाली मतली और चक्कर से छुटकारा पाने के कुछ तरीके क्या है ?

    दवा के बिना तो किसी भी बीमारी का हल मिल पाना मुश्किल है, फिर चाहे आपकी बीमारी होती हो या बड़ी लेकिन हां अगर बीमारी की अभी शुरुआत हुई है, तो इसके लिए आप चॉकलेट खाएं, केला खाएं, ड्राइफ्रूट्स खाएं, दही-चीनी खाएं जिससे आप मतली और चक्कर आने की समस्या से खुद का बचाव कर सकते है।

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      मस्तिष्क पर चोट लगने के क्या है कारण, लक्षण, बचाव व उपाय ?

      मस्तिष्क पर लगी चोट इंसान के दिमाग को पूरी तरह से हिला कर रख देती है, इसलिए जरूरी है की इंसान को कही भी आने, जाने के वक़्त बहुत सतर्कता बरतनी चाहिए। दिमाग पर लगी चोट से इंसान को और क्या नुकसान होते है इसके लक्षण क्या है, इसके कारण क्या है और इससे हम कैसे खुद का बचाव कर सकते है इसके बारे में आज के लेख में चर्चा करेंगे ;

      दिमाग की चोट के क्या कारण है ?

      • दिमाग की चोट आम तौर पर बच्चों और बूढ़ों में देखने को मिलती है। 
      • ब्रेन इंजरी के कारणों में रोड पर होने वाले एक्सीडेंट या किसी दीवार आदि पर सिर टकराना भी हो सकते है। 
      • खेलते समय सिर पर आने वाली चोट, बॉक्सिंग, फुटबॉल और बेसबॉल के समय सिर पर मुक्का या बॉल लगना भी दिमागी चोट के कारणों में शामिल है।

      दिमाग में चोट के गंभीर कारण होने पर जल्द लुधियाना में बेस्ट न्यूरोसर्जन के संपर्क में आए।

      क्या है सिर पर चोट का लगना ?

      • सिर पर चोट लगने के कारणों की बात करें, तो इसमे हमारे द्वारा की गई लापरवाही नज़र आती है। 
      • सिर पर लगी चोट इंसान को पागल बना देती है। 
      • कई दफा तो ये चोट इंसान के मौत का कारण भी बन जाती है। 
      • सिर पर चोट कई बार लग जाती है और हमे पता ही नहीं लगता, इसलिए जरूरी है की किसी भी तरह की चोट अगर इंसान को लग जाए तो उसे जल्द डॉक्टर के संपर्क में आना चाहिए।

      अगर आपके दिमाग में हल्की सी चोट लगी है, तो इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट के संपर्क में आए।

      लक्षण क्या है दिमाग में चोट लगने के ?

      सिर पर लगे चोट के लक्षणों की बात करें तो ये इंसान को चोट लगने के 48 घंटे बाद नज़र आती है, जैसे ; 

      • सिर में दर्द की समस्या। 
      • अत्यधिक मानसिक और शारीरिक थकान का मेहसूस होना। 
      • पक्षाघात की समस्या। 
      • कमजोरी का महसूस होना। 
      • भूकंप के झटके का लगना। 
      • चोरी की हुई चीज का बरामद होना, वो भी दिमागी तौर से ग्रस्त इंसान के पास।  
      • प्रकाश की संवेदनशीलता का महसूस होना। 
      • नींद संबंधी विकार का सामना करना आदि।

      दिमाग पर लगें चोट से कैसे करें खुद का बचाव ? 

      • गाड़ी चलाते समय सीट बेल्ट का प्रयोग करें।
      • बाइक या साइकिल चलाते वक़्त हर समय हेलमेट जरूर पहनें।
      • शराब पी कर ड्राइविंग बिलकुल न करें।
      • ऐसे कार्पेट घर में न लाएं जिनसे आप फिसल कर नीचे गिर सकते है।
      • गीले फ्लोर पर चलने से बचें।
      • नियमित रूप से अपनी आंखों का चेक अप करवाते रहें।
      • बाथरूम में जाते समय अपना खास ख्याल रखें।
      • अगर नहाने के बाद कपड़े पहन रहे है, तो एक हाथ से किसी चीज को पकड़ लें ताकि फिसलने का रिस्क कम हो सके।

      दिमागी चोट से बचाव के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

      • अगर आपके दिमाग में गहरी चोट लग गई है तो इससे बचाव के लिए आपको फिजिकल और ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट की जरूरत होगी। 
      • अगर आप इस तरह की थेरेपिस्ट का चयन करना चाहते है, तो इसके लिए आपको न्यूरो सिटी हॉस्पिटल का चयन करना चाहिए।  
      • वहीं इस हॉस्पिटल में मरीज़ का इलाज आधुनिक उपकरणों की मदद से किया जाता है। 
      • और तो और यहाँ के स्टाफ की बात करें तो उन्हे भी अपनी फील्ड का काफी सालों का अनुभव है।

      सुझाव :

      किसी भी तरह के नशीली चीजों का सेवन करके कृपया वाहन न चलाए, वर्ना चोट के साथ जान जानें का खतरा भी हो सकता है।

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        जानिए रीढ़ की हड्डी को कैसे मस्तिष्क संबंधी विकार के साथ जोड़ा जा सकता है ?

        रीढ़ की हड्डी की बात करें तो इसका सीधा संबंध हमारे दिमाग के साथ होता है, वहीं ये हड्डी बहुत सारी कोशिकाओं की मदद से आपके दिमाग तक बहुत सारे विचारों का आदान-प्रदान भी करती है। तो रीढ़ की हड्डी हमारे दिमाग के साथ क्या भूमिका निभाती है, इसके बारे में आज के लेख में चर्चा करेंगे ;

        रीढ़ की हड्डी का दिमाग के साथ कैसे घनिष्ठ संबंध है !

        • रीढ़ के हड्डी की बात करें तो इसका संबंध हमारे दिमाग के साथ सीधा होता है, क्युकी रीढ़ की हड्डी में भी छोटा सा दिमाग होता है जो हमे किसी भी जगह पर गिरने से बचाता है। 
        • मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी आपके शरीर का केंद्रीय तंत्रिका तंत्र है। मस्तिष्क आपके शरीर के लिए कमांड सेंटर है, और रीढ़ की हड्डी मस्तिष्क द्वारा शरीर को और शरीर से मस्तिष्क तक भेजे गए संदेशों का एक मार्ग है।
        • मानव मस्तिष्क की तरह ही रीढ़ की हड्डी में भी तीन भाग होते है। इसे हम छोटे-छोटे पतले पर्दे के रूप में देख पाते है। मतलब बहुत कुछ एक समान होता है रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क में। 
        • इसके अलावा कई दफा आपने देखा भी होगा कि कुछ लोगों को रीढ़ की हड्डी में चोट लग जाती है जिसकी वजह से वो ठीक से बोल नहीं पाते या बोलना कुछ चाहते है और मुंह से आवाज कुछ और ही निकल जाती है। 

        रीढ़ की हड्डी का दिमाग के साथ संबंध कैसे होता है इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट का चयन करना चाहिए।

        रीढ़ की हड्डी को स्वास्थ्य रखने के लिए किन बातों का ध्यान रखें ? 

        • रीढ़ की हड्डी को मजबूत रखने के लिए हरी सब्जियों का सेवन करें। 
        • रीढ़ की हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ बनाए रखने के लिए बेरीज (गोल, मुलायम, रस और छोटे फल है जो नीले, लाल, बैंगनी रंगो का समूह है) का सेवन करें, बेरीज में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स होते है, जो रीढ़ को मजबूत और स्वस्थ रखने में असरदार हो सकते है। 
        • रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने के लिए आप फिश ऑयल का सेवन भी कर सकते है, क्युकि फिश ऑयल में ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो आपकी नसों को सुरक्षित रख सकता है, साथ ही यह विटामिन-डी का भी अच्छा स्त्रोत माना जाता है, जो आपकी हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है।
        • नट्स का सेवन करके भी आप अपनी रीढ़ की हड्डी को मजबूती प्रदान कर सकते है। 
        • इसके अलावा आप रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने के लिए उसे भरपूर आराम दे, क्युकी पूरे दिन के काम के बाद इसे भी आराम की जरूरत होती है, इसलिए जरूरी है की आप रीढ़ को आराम देने के लिए अच्छे गद्दे और तकिए का इस्तेमाल करें। 
        • रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने के लिए नियमित रूप से कोर एक्सरसाइज या जिसे कोर स्ट्रेंथनिंग और टोनिंग एक्सरसाइज भी कहा जाता है, इसे जरूर करें।
        • रीढ़ की हड्डी को मजबूती देने के लिए अच्छे किस्म के जूतों को पहने ताकि आपको चलने के दौरान किसी परेशानी का सामना न करना पड़े और आपकी रीढ़ की हड्डी भी सुरक्षित रहें। 
        • नियमित रूप से पीठ की मालिश कराएं, ताकि आपको पीठ या रीढ़ की हड्डी में दर्द का अनुभव न हो। 
        • लंबे समय तक एक पोजीशन में न बैठें, क्युकी अगर आप ऐसा करते है तो आपको रीढ़ की हड्डी में दर्द का सामना करना पड़ सकता है। 

        इन रीढ़ की हड्डी के बचाव के तरीको को तो आपको जरूर करने चाहिए, लेकिन इन सबके करने के बाद भी आपको कोई फर्क नज़र न आए तो इसके लिए आप लुधियाना में बेस्ट न्यूरोसर्जन से जरूर सलाह लें।

        रीढ़ की हड्डी के बचाव के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

        अगर आप वाकई अपने रीढ़ की हड्डी को स्वास्थ्य रखना चाहते है तो इसके लिए आपको न्यूरो सिटी हॉस्पिटल के सम्पर्क में आना चाहिए और किसी भी तरह की परेशानी होने पर यहाँ के डॉक्टर या न्यूरोलॉजिस्ट से जरूर सलाह लें। 

         

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          किस तरह का सिरदर्द होने पर न्यूरोलॉजिस्ट का करें चयन !

          सिर में दर्द या सिर का रह-रह कर दर्द होना भी काफी गंभीर समस्या है, क्युकि सिर का दर्द हमारे काम के साथ साथ हमारे शरीर पर भी बुरा असर डालता है। वही ये समस्या क्यों होती है, या किस तरह के सिर दर्द में हमे न्यूरोलॉजिस्ट के पास जाना चाहिए के बारे में आज के आर्टिकल में बात करेंगे तो अगर आप भी यह सोच कर परेशान रहतें है की किस तरह के सिर दर्द के लिए न्यूरोलॉजिस्ट के पास जाए तो आर्टिकल के साथ अंत तक बने रहें ;

          सिरदर्द में किस तरह के लक्षण दिखने पर न्यूरोलॉजिस्ट का करें चयन ?

          • आपको न्यूरोलॉजिस्ट का चयन तब करना चाहिए, जब आपका सिरदर्द एक या दो दिन से अधिक समय तक लगातार बना हुआ है। 
          • आपका सिरदर्द अचानक होने लगता है। 
          • तनाव से आपके सिर का दर्द और बढ़ जाता है। 
          • आपका सिरदर्द सुबह से ही शुरू हो जाता है। 
          • आपको देखने में परिवर्तन का अनुभव हो रहा है। 
          • आपको सिरदर्द के साथ दौरे पड़ने की समस्या भी उत्पन्न हो गई है आदि। 

          उपरोक्त लक्षण अगर आपमें नज़र आए तो आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।

          सिर में दर्द की समस्या क्यों होती है?

          • सिर में दर्द की समस्या ज्यादातर दवाइयों का सेवन करने, मांसपेशियों में तनाव, हार्मोन में बदलाव या फिर पानी की कमी के कारण हो सकता है। 
          • वही कुछ मौकों पर मानसिक तनाव, गलत तरीके से उठने-बैठने की आदत, शराब का सेवन, नींद की कमी या समय पर भोजन ना करने की वजह से भी इस प्रकार का दर्द हो सकता है।
          • इसके अलावा कई बार हमारे सिर में गंभीर चोट लग जाती है जिस वजह से भी हमे सिर में दर्द की समस्या का सामना करना पड़ता है।

          अगर सिर में चोट की वजह से आपको सर्जरी करवाने की जरूरत पड़े तो इसके लिए आपको लुधियाना में बेस्ट न्यूरोसर्जन का चयन करना चाहिए।

          सिर दर्द का इलाज क्या है ?

          • सिर दर्द के इलाज के लिए विभिन्न विकल्प मौजूद है। हालांकि इलाज आमतौर पर उसके कारण के मुताबिक किया जाता है। जैसे कि नेज़ल स्प्रे और कुछ अन्य दवाइयों के माध्यम से दर्द को दूर किया जाता है। 
          • वही ज़रूरत पड़ने पर आपका न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर आपकी डाइट में भी बदलाव भी ला सकते है। इसके अलावा कुछ ऐसी थैरेपी भी है जो इन स्थितियों में फायदेमंद साबित होती है। यदि दर्द ज़्यादा है तो मसाज के माध्यम से भी राहत मिल सकती है।

          सिर दर्द के लिए डॉक्टर किस तरह का परीक्षण कर सकते है ?

          • सीटी स्कैन। 
          • एमआरआई स्कैन। 
          • ईईजी (मस्तिष्क तरंगों को मापने) का स्कैन आदि। 

          सिर दर्द की जाँच के लिए बेस्ट हॉस्पिटल !

          • अगर आपको उपरोक्त संकेत दिख रहें है सिर दर्द के दौरान तो आपको समय रहते न्यूरो सीटी हॉस्पिटल के अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर का चयन कर लेना चाहिए। इसके अलावा अगर आप किसी गंभीर समस्या का सामना कर रहें है तो इससे बचाव के लिए आपको यहाँ के डॉक्टरों के द्वारा अच्छे से गाइड भी किया जाता है।

          निष्कर्ष :

          • व्यक्ति के लिए सिर में दर्द का होना काफी खतरनाक है, वही ये समस्या क्यों उत्पन होती है, इसके बारे में जानने के बाद इसे नज़रअंदाज़ न करें। तो अगर आपको भी इस तरह की समस्या ने परेशान कर रखा है तो इससे बचाव के लिए समय रहते डॉक्टर के सम्पर्क में जरूर आए।

           

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            दिमाग की नसों के कमजोर होने के क्या है गंभीर लक्षण ?

            दिमाग का हमारे शरीर में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है अगर किसी कारणवश इनमें किसी भी तरह की समस्या आ जाती है तो कैसे हम इस समस्या से खुद का बचाव कर सकते है।

            क्युकि दिमाग की नसें जब कमजोर होती है तो हम बता नहीं पाएंगे की हममे क्या परेशानी है पर हां इसके गंभीर लक्षणों को देखकर इस समस्या का पता लगाया जा सकता है, तो जानते है की आखिर ऐसे कौन-से लक्षण है जिनको जानकर हम खुद का बचाव कर सकते है ;

            दिमाग की नसों के कमजोर होने के लक्षण क्या है ?

            जब हमारे द्वारा अपने शरीर का अच्छे से ध्यान नहीं रखा जाता और ज्यादा सोचना भी दिमाग की नसों में कमजोरी की समस्या को उत्पन्न कर सकता है, इसके अलावा इसके लक्षणों को हम निम्न में प्रस्तुत करेंगे, जैसे;

            • दिमाग हमारे शरीर को अच्छे से कार्य करने की क्षमता को प्रोत्साहित करता है, लेकिन इसमें अगर कमजोरी आ जाए तो व्यक्ति को “चलने में दिक्‍कत” का सामना करना पड़ता है। 
            • इसके अलावा जब हमारे दिमाग की कोशिकाएं हद से अधिक प्रभावित होती है तो दिमाग को “स्टॉक” की समस्या का सामना करना पड़ता है।
            • तो वही जब हमारे दिमाग की नसें कमजोर हो जाती है तो अचानक “सिरदर्द” की समस्या उत्पन्न हो जाती है। 
            • शरीर में लगातार झुनझुनी का होना दिमाग की नसों की कमजोरी के लक्षणों में शामिल है।
            • जैसे की दिमाग हमारे पूरे शरीर को डायरेक्ट करता है लेकिन इनमे अगर कोई परेशानी आ जाए तो शरीर में “तालमेल को बैठाने में कमी” आ जाती है।

            अगर दिमाग में कमजोरी के लक्षणों ने आपको बहुत परेशान कर रखा है तो इससे निजात पाने के लिए आपको बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना के संपर्क में आना चाहिए।

            दिमाग की नसों में कमजोरी के कारण क्या है ?

            दिमाग की नसों के कमजोर होने के कई कारण है, जैसे ;

            • किसी गंभीर संक्रमण का होना। 
            • दिमाग में आघात की समस्या। 
            • स्ट्रोक की समस्या। 
            • डायबिटीज का होना भी इसके एक कारण में शामिल है।  
            • गठिया के कारण। 
            • दिमाग में ट्यूमर का कारण। 
            • और खराब ब्लड सर्कुलेशन आदि इसके कारणों में शामिल है।

            इसके अलावा अगर आपकी दिमाग की नसों में कमजोरी कैंसर की वजह से आई है, तो इससे बचाव के लिए आपको बेस्ट न्यूरोसर्जन लुधियाना से समय रहते दिमाग की सर्जरी को करवा लेना चाहिए।

            दिमाग की नसों की कमजोरी को ठीक करने के लिए बेस्ट हॉस्पिटल ?

            • अगर आपने दिमाग की नसों की कमजोरी के कारणों और लक्षणों के बारे में जान लिया है तो इन समस्याओं से बचाव के लिए आपको न्यूरो सीटी हॉस्पिटल के संपर्क में आना चाहिए। पर ध्यान रहे दिमाग में कोई खतरनाक समस्या उत्पन हो गई है और उसको ठीक करवाने के लिए सर्जरी की जरूरत पड़े तो इसके लिए आपको इसी हॉस्पिटल के अनुभवी न्यूरोसर्जन के संपर्क में आना चाहिए।
            • इसके अलावा इस हॉस्पिटल की बात करे तो यहाँ पर अनुभवी डॉक्टरों के द्वारा आधुनिक उपकरणों की मदद से मरीजों का इलाज काफी अच्छे तरीके से किया जाता है।

            निष्कर्ष :

            दिमाग के बिना व्यक्ति के शरीर का कोई भी अंग ठीक तरीके से कार्य करने में असमर्थ होगा इसलिए अगर इनमे किसी भी तरह की परेशानी आ जाए तो इससे बचाव के लिए आपको बेहतरीन डॉक्टर के संपर्क में आना चाहिए। और दिमाग के मामले में आपको जरा-सी भी लापरवाही नहीं बरतनी है।

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              न्यूरो संबंधी बीमारियां: लक्षण, कारण और निजात

              न्यूरो सम्बंधित समस्याओं का सामना करना काफी मुश्किल है, लोगों के लिए इसके अलावा इस समस्या से कैसे हम खुद का बचाव कर सकते है और किन बातो का ध्यान रखना इसमें जरूरी होता है इसके बारे में बात करेंगे इसलिए इसको जानने के लिए आर्टिकल के साथ अंत तक जरूर से बने रहें;

              क्या है न्यूरो सम्बंधित बीमारियां ?

              • न्यूरोलोजी संबंधी बीमारियों में आमतौर पर बोलने में अंतर का आना, शारीरिक असंतुलन, शरीर में अकड़न, कमजोरी, याददाश्त में कमी, उठने, बैठने चलने में परेशानी, शरीर में कंपन, मांसपेशियों का कठोर होना निगलने में कठिनाई आदि लक्षण पाए जाते हैं। न्यूरो संबंधी अधिकांश बीमारियों का इलाज प्रारंभिक अवस्था में पाना संभव होता है।
              • तो तंत्रिका विकार या न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर आमतौर पर नर्वस सिस्टम को प्रभावित करने वाले वायरल, जीवाणु, कवक और परजीवी संक्रमण के कारण होते हैं, जिन्हें न्यूरो सम्बंधित बीमारियां की श्रेणी में शामिल किया जाता है तो वहीं नर्वस सिस्टम की बीमारियों में अल्जाइमर रोग, डिमेंशिया, मिर्गी, सेरेब्रोवास्कुलर बीमारियां जैसे माइग्रेन, स्ट्रोक और अन्य सिरदर्द शामिल होते हैं। 

              यदि आपको भी न्यूरो सम्बंधित समस्याओं या बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है तो इससे निजात पाने के लिए बेस्ट न्यूरोसर्जन लुधियाना का चयन करें।

              न्यूरो सम्बंधित समस्याओं के लक्षण क्या है ?

              • सिर, गर्दन, पीठ या शरीर के विभिन्न अंगों में दर्द का होना।  
              • अंगों का फड़कना, या झुनझुनी और कमजोरी का होना। 
              • आंखों की रोशनी का कमजोर होना, चक्कर आना और बोलने या निगलने में परेशानी का सामना करना। 
              • दौरे पड़ना, अंगों का मरोड़ना और बार-बार बेहोश होना। 
              • मांसपेशियों में अकड़न, कपकपी, याददाश्त या मानसिक क्षमता का कमजोर होना आदि।

              अगर आप भी इन लक्षणों से परेशान है तो समय रहते किसी बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट लुधियाना का चयन करें।

              न्यूरो सम्बंधित समस्याओं या बीमारियों से कैसे पाएं निजात ?

              • न्यूरोसर्जन मस्तिष्क की चोटों, ट्यूमर को हटाने और कार्पल टनल सिंड्रोम से निजात दिलवाते हैं। दोनों चिकित्सक अपने रोगियों के उचित इलाज के लिए मिलकर काम करते हैं, और आवश्यकतानुसार चिकित्सा और शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं को इकट्ठा करते हैं।
              • न्यूरोलॉजिकल डिस्ऑर्डर में रोगों के लिए कोई त्वरित (जल्दी) समाधान नहीं है, लेकिन रोगी की अच्छी देखभाल उसे लंबे समय तक स्वस्थ रख सकती है
              • प्रभावी उपचार के लिए एक अच्छे न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लें, वही न्यूरोलॉजिकल स्थिति को जानने के लिए न्यूरोलॉजिस्ट को कई तरह के परीक्षण करने पड़ सकते हैं। वही कुछ मामलों में, उन्हें गंभीर परिस्थितियों में ऑपरेशन करने के लिए न्यूरोसर्जन या इंटरवेंशनल न्यूरोलॉजिस्ट के मदद की जरूरत हो सकती है। 
              • एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि इस रोग में किसी को घबराना नहीं चाहिए और जरूरी भावनात्मक समर्थन और देखभाल की व्यवस्था करनी चाहिए, क्युकि ऐसे मामलों में कई बार लोग ठीक भी हो जाते हैं। 

              अगर आप भी न्यूरो सम्बंधित समस्याओं से छुटकारा पाना चाहते है तो इससे निजात पाने के लिए न्यूरो सीटी हॉस्पिटल से बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर का चयन का चयन करें। 

              निष्कर्ष :

              अगर आपको भी न्यूरो सम्बंधित समस्याओं ने परेशान कर रखा है तो इससे निजात पाने के लिए किसी अच्छे डॉक्टर का चयन करें क्युकी अगर आप इसके शुरुआती लक्षणों को ध्यान में रख के इसका उपचार कराएंगे तो आपको आपकी परेशानी का हल जल्दी मिल जाएगा। इसलिए इसके लक्षण को नज़रअंदाज़ न करें और किसी भी तरह की दवाई को लेने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह ले।

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