लोग अचानक बेहोश क्यों हो जाते हैं? डॉक्टर से जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय!

आम तौर पर, ऐसी बहुत सी सेहत स्थितियां होती हैं, जिनकी वजह से लोग अक्सर बेहोश या फिर एक दम से जमीन पर गिर जाते हैं। दरअसल, अक्सर यह देखने को मिलता है, कि कुछ लोग अचानक से चलते-चलते या फिर बैठे बैठे बेहोश होकर जमीन पर गिर जाते हैं। पर, क्या आपने इसके बारे में जानने की कोशिश की है, कि लोग इस तरह अचानक से बेहोश होकर आखिर क्यों गिर जाते हैं? अक्सर लोग इस तरह की स्थिति को आम समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं, पर समय पर ध्यान न देने पर कई बार इस तरह की स्थिति सेहत के लिए काफी ज्यादा ख़तरनाक साबित हो सकती है। इसलिए, इस तरह समस्या  बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। 

इस तरह की स्थिति को देखते हुए कई लोग जानना चाहते हैं, कि आखिर ऐसे अचानक से कुछ लोगों के बेहोश होने के कारण, लक्षण और इससे बचाव के क्या उपाय हो सकते हैं? दरअसल, कई लोगों में यह समस्या आम हो सकती है, पर ध्यान न देने पर यह गंभीर भी हो सकती है। इसके कई कारण हो सकते हैं, जिसमें इसके आम से लेकर गंभीर और अन्य स्थितियाँ शामिल हो सकती हैं। इसके अलावा, भीषण गर्मी में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाना, देर तक धूप में काम करना, कुछ भी खाए -पिए बिना दिन के सारे काम करना, गर्मी से शरीर से काफी ज्यादा पसीना निकलना, मिर्गी का दौरा पड़ना, दम घुटना, हार्ट अटैक आना और किसी तरह का सदमा लगने की वजह से भी लोग बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ते हैं। इसके लक्षणों में चेहरे का रंग पीला पड़ जाना, शरीर का ठंडा हो जाना, पसीना आना, दिमाग का ठीक से काम न कर पाना और बेहोश व्यक्ति के होश में आने पर कुछ भी याद न रहना जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं। इसके बचाव के बहुत से उपाय हो सकते हैं, जिसमें पीड़ित व्यक्ति को शांत करना, सांस न आने पर उसको आर्टिफिशियल सांस देने की कोशिश करना और साथ में उसके कपड़ों को ढीला करना शामिल हो सकता है। आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि इस तरह की समस्या में अचानक बेहोश होकर एक दम से जमीन पर गिरने से पीड़ित व्यक्ति के न केवल शरीर पर चोट लग सकती है, बल्कि उसकी हड्डियां भी फ्रैक्चर हो सकती हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

बेहोश होने के क्या कारण हो सकते हैं?

आम कारण 

  1. लंबे समय तक खड़े रहना। 
  2. शरीर में पानी की कमी होना। 
  3. व्यक्ति के शरीर का ज़्यादा गरम होना। 
  4. रोजाना शराब या फिर नशीली दवाओं का सेवन करना। 

गंभीर कारण 

  1. दिल से जुड़ी समस्याएं होना। 
  2. स्ट्रोक या दौरे पड़ना। 
  3. एनीमिया होना 
  4. खून की  कमी होना। 

अन्य स्थितियां

  1. गर्भावस्था की स्थिति होना। 
  2. माइग्रेन होना 
  3. कैरोटिड साइनस सिंड्रोम का होना 

मूर्छित या फिर बेहोश होने के लक्षण क्या होते हैं?

वैसे तो, बेहोश या फिर मूर्छित होने के बहुत से शारीरिक संकेत और लक्षण  नज़र आ सकते हैं, इसमें से कुछ निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. पीड़ित व्यक्ति का रंग पीला पड़ जाना। 
  2. शरीर का एक दम से ठंडा पड़ जाना। 
  3. काफी ज्यादा पसीना आना। 
  4. दिमाग का ठीक तरीके से काम न कर पाना। 
  5. पीड़ित व्यक्ति को होश आने के बाद कुछ भी याद न रहना। 
  6. बेहोशी में आँखों के आगे काफी ज्यादा अंधेरा छाने लगना। 
  7. इस दौरान सब कुछ धुंधला-सा नज़र आने लगना। 
  8. पीड़ित व्यक्ति की नाड़ी और हृदय की गति धीमी पड़ना। 
  9. इस दौरान सांस का काफी धीरे चलना। 
  10. बेहोशी से पहले काफी तेज चक्कर आना। 
  11. इसके बाद बेहोश होकर एक दम से जमीन पर गिर जाना।   

बेहोशी से बचाव के क्या उपाय हो सकते हैं?

दरअसल, बेहोशी से बचाव के बहुत से उपाय हो सकते हैं। पर इससे पहले अगर आपके आसपास कोई भी व्यक्ति अचानक से बेहोश होकर जमीन पर गिर जाता है, या फिर बेहोशी की हालत में नीचे बैठ जाता है, तो इस तरह की स्थिति में उसकी मदद करना काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इस तरह की समस्या के बचाव के उपाय निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि 

  1. पीड़ित व्यक्ति को सबसे पहले शांत करें। 
  2. उसको एक हवादार जगह पर उठाकर लिटाएं। 
  3. बेहोशी में उसकी सांस चल रही है या फिर नहीं इसको चेक करें। 
  4. सांस के रस्ते में आने वाली किसी भी तरह की रुकावट को दूर करें।  
  5. पीड़ित व्यक्ति के कपड़ों को ढीला करें। 
  6. बेहोश हुए व्यक्ति की कमर, गर्दन और छाती से कपड़ों को हटाएँ। 
  7. बेहोशी में पीड़ित व्यक्ति को जूता या फिर मौजा बिल्कुल भी न सुंघाएं। 
  8. चेहरा लाल पड़ने पर गर्दन को ऊपर की तरफ उठा कर रखें। 
  9. चेहरे का रंग पीला पड़ने पर उसके पैरों को ऊंचा उठाकर रखें। 
  10. बेहोश होने पर व्यक्ति के सिर पर ठंडे पानी से छींटे मारें। 
  11. बेहोशी की हालत में कुछ भी पिलाने की कोशिश ना करें।
  12. व्यक्ति के होश आने पर, उसे दूध या फिर पानी पिलाएं। 
  13. बेहोशी में सांस सही से न चलने पर उसको आर्टिफिशियल सांस देने की कोशिश करें। 

निष्कर्ष: इस लेख के माध्यम से हमने आपको लोगों के अचानक बेहोश होने के कारणों से लेकर इसके बचाव के उपायों तक सभी के बारे में विस्तार से बताया है। यह समस्या बेशक कुछ लोगों में आम होती हैं, पर ध्यान न देने पर यह खतरनाक साबित हो सकती है। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने और  दिमाग से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या के समाधान के लिए आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके इलाज के  बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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    क्या रील देखने की लत से बढ़ सकता है तनाव? मानस‍िक स्‍वास्‍थ्‍य पर इसके नुकसानों के बारे में, जानें डॉक्टर से

    आजकल लगभग हर किसी के पास मोबाइल फ़ोन होता है। आम तौर पर, अगर किसी को मोबाइल की ज़रूरत नहीं भी होती, तो भी बहुत से लोग अपने पास मोबाइल फ़ोन रखते हैं। दरअसल, सिर्फ इतना ही नहीं आजकल तो ज्यादातर छोटे बच्चों के हाथों में भी मोबाइल फ़ोन देखा जा सकता है। इसके साथ ही, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जिस क‍िसी को भी देखो, वो फोन में ही व्‍यस्‍त नजर आता है। जैसे की वह फ़ोन बिना अब एक पल भी नहीं रह सकता है। जैसे मधुमखियां शहद के साथ चिपकी रहती है, वैसे ही ज्यादातर लोग अपने फ़ोन से चिपके हुए नज़र आते हैं। लोगों को फोन की लत लग चुकी है और यह लत ज्यादातर लोगों रील्‍स देखने की आदत से पड़ी है। पर कई लोगों को इसके बारे में, नहीं पता है, कि लगातार रील्‍स देखते रहने से तनाव में काफी ज्यादा बढ़ोतरी होती है। आम तौर पर, रील्‍स की लत लगने से एक व्यक्ति के ध्‍यान की क्षमता काफी ज्यादा कम हो जाती है और मानस‍िक तनाव काफी ज्यादा बढ़ जाता है। आपको बता दें, कि ज्‍यादा देर तक फ़ोन में बैठे रहने से और कुछ भी स्‍क्रॉल करते रहने से नींद की गुणवत्ता काफी ज्यादा प्रभावित होती है और इसकी वजह से एक व्यक्ति को द‍िनभर थकान, चिड़चिड़ापन और चिंता जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। ज्यादातर, लोगों को रील्स देखने की बुरी आदत से यह पता नहीं चल पाता है, कि यह धीरे-धीरे मानस‍िक स्‍वास्‍थ्‍य को काफी ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है। तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में, इस के डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि रील्स देखने की लत एक व्यक्ति के मानस‍िक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए कैसे हानिकारक हो सकती है? 

    मानस‍िक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए रील्स देखने के नुकसान

    लगातार रील्स देखने से मानसिक स्वास्थ्य को काफी ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है, जैसे कि 

    1. इससे एक व्यक्ति की ध्‍यान शक्ति कमजोर हो सकती है। 
    2. लगातार रील्स देखने की लत से मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर काफी ज्यादा कम हो जाता है, जिसकी वजह से नींद और एनर्जी का स्तर प्रभावित होता है। 
    3. इससे मानसि‍क थकान और स‍िर दर्द की समस्‍या में काफी ज्यादा बढ़ोतरी होती है। 
    4. आपको बता दें, कि ज़्यादा स्क्रीन टाइम होने से कोर्टिसोल हॉर्मोन में काफी ज्यादा बढ़ोतरी हो जाती है। जिसकी वजह से तनाव का स्तर काफी ज्यादा बढ़ सकता है। 
    5. आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि फोन में ज्यादा समय तक रील स्क्रॉल करने से सामाजिक दूरी बनती है। आम तौर पर, रोजाना ऐसा करने पर व्यक्ति अपने परिवार और दोस्तों से काफी ज्यादा दूर होता जाता है और वह एक टाइम पर अकेला महसूस कर सकता है। जिसकी वजह से उसका मानसिक तनाव काफी ज्यादा बढ़ सकता है और वह बीमार भी हो सकता है। 

    रील्स देखने की लत से छुटकारा कैसे पाएं?

    रील्स देखने की लत से छुटकारा पाने के लिए आप कई तरीकों को अपना सकते हैं, जिसमें शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

    1. इसके लिए आप सोशल मीड‍िया ऐप्‍स पर टाइमर सेट कर सकते हैं और जब भी अलर्ट आए तो आप ऐप बंद करके फ़ोन से छुटकारा पा सकते हैं। 
    2. आम तौर पर, हफ्ते में एक दिन रील्स स्क्रॉल न करने का डिटॉक्स प्लान को अपनाएं।
    3. आपके सोने के कुछ घंटे पहले इस बात का ख़ास ध्यान रखें, कि उस समय में आप फोन का इस्तेमाल बिलुकल भी न करें, वरना आपको अन‍िद्रा जैसी समस्‍या का सामना करना पड़ सकता है। 
    4. दरअसल, रील्स देखने की लत जैसी समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप 10 मिनट तक के लिए पार्क में घूम सकते हैं, वॉक कर सकते हैं, अपनी फैमिली के साथ टाइम स्पेंड कर सकते हैं और इसके साथ ही एक्‍सरसाइज को प्राथमिकता दे सकते हैं। इसके अलावा आप, इससे छुटकारा पाने के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज कर सकते हैं। इसमें से आप किसी एक हॉबी चुनें और ज्यादातर अपने लिए समय निकालें।
    5. आपको बता दें, कि रील्स की लत लगने जैसी समस्या से बचने के लिए आप फोन के नोटिफिकेशन्‍स को बंद करें, ताकि आप बार बार अपने फ़ोन को चेक न करें और बार-बार रील्‍स देखने पर फोकस न करें। 

    निष्कर्ष: ज्यादातर लोग अपने मनोरंजन के लिए रील्स देखते हैं। रील्स को मनोरंजन का एक जरिया माना जाता है। पर रील देखने की लत, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरीके से प्रभावित कर सकती है। इससे छुटकारा पाने के लिए केवल एक सिमित समय तक फोन का इस्तेमाल करें, रील को स्क्रॉल करें और नींद, फोकस और अपनी मानसिक सेहत को प्राथमिकता दें। इससे आपका तनाव कम और आप मानसिक तौर से ठीक महसूस करेंगे। अगर आपको भी इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करनी है, या फिर अगर आपको भी दिमाग से जुड़ी किसी भी तरह की कोई समस्या है, जिसे आप काफी ज्यादा परेशान रहते हैं और आप इसका इलाज चाहते हैं, तो आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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      बोलने में बदलाव से लेकर चलने में दिक्कत तक, क्या ये लक्षण हो सकते हैं दिमाग की बीमारी के संकेत? डॉक्टर से जानें

      दरअसल, शरीर के सभी अंगों में से दिमाग काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आम तौर पर, दिमाग के बीमार होने पर हमारा पूरा शरीर बीमार हो जाता है और हम कुछ भी नहीं कर पाते हैं। आपको बता दें, कि  दिमाग हमारे शरीर का मुख्य  प्रोसेसिंग यूनिट होता है, जिसके बिना हमारा शरीर एक खोखले ढांचे की तरह बन जाता है, आम तौर पर, जिसका फिर कोई भी काम नहीं रहता है। दरअसल, दिमाग शरीर के सभी अंगों के काम काजों को चैनलाइज करता है। इस तरह की स्थिती में, जब दिमाग में किसी भी तरह कोई गड़बड़ी उत्पन्न होती है, तो इसका असर हमारे पुरे शरीर पर पड़ता है, चाहे वो हमारी सोच हो, हाथ पैर हों, नसों का कामकाज हो या फिर आपके बातचीत करने की शक्ति हो। पर, दुर्भाग्य की बात यह है, कि हममें से ज्यादातर लोग दिमाग को होने वाली बीमारी को शुरुआत में समझ नहीं पाते हैं, और जब इसमें बहुत ज्यादा देर हो जाती है, तो स्थिति हमारे हाथों में से निकल सकती है। आम तौर पर, इस तरह की स्थिति में, यह जानना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है, कि हम अपने दिमाग की बीमारी को कैसे पता कर सकते हैं? क्या समस्या के शुरुआती लक्षणों से समस्या की पहचान की जा सकती है? तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि बोलने में बदलाव से लेकर चलने में दिक्कत तक, क्या ये लक्षण दिमाग की बीमारी के संकेत हो सकते हैं? 

      दिमाग की बीमारी को कैसे पहचाना जा सकता है?

      दरअसल, इस पर डॉक्टरों का कहना है, कि दिमाग की बीमारियों में कई तरह की समस्याएं शामिल हो सकती हैं, जो आम तौर पर, किसी भी व्यक्ति के दिमाग की संरचना, काम या फिर केमिस्ट्री पर बुरा प्रभाव डालती हैं। आम तौर पर, इस तरह की समस्याओं का पता लगाना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है, क्योंकि, यह जानने से आपकी समस्या का जल्दी इलाज हो सकता है जिससे आपको बेहतर नतीजे प्राप्त हो सकते हैं। आपको बता दें, कि जैसे ही दिमाग की बीमारी के इलाज में देरी होती है, तो इलाज अच्छे नतीजों को प्रदान नहीं करता है, विशेष रूप से बढ़ते न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के लिए। हालांकि, खास बीमारी के आधार पर लक्षण काफी ज्यादा अलग-अलग हो सकते हैं, पर इसके साथ ही, कुछ आम संकेत हैं, जिनको बिलकुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जैसे कि 

      1. आवाज या फिर बातचीत में बदलाव का होना। 
      2. अचानक से चीजों को भूल जाना या फिर भ्रम होना। 
      3. चलने-फिरने में काफी ज्यादा दिक्कत और संतुलन से जुड़ी समस्याओं का होना। 
      4. व्यक्तित्व या फिर व्यवहार में बदलाव होना। 
      5. कुछ भी देखने और सुनने से जुड़ी समस्याओं का होना। 
      6. किसी भी समय और कहीं पर भी दौरे पड़ना। 

      निष्कर्ष : दिमाग शरीर का सबसे ज्यादा अहम हिस्सा है। अगर आपको या फिर आपके किसी जानने वाले को लेख में बताये गए इनमें से कोई भी संकेत नज़र आता है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। न्यूरोलॉजिकल जांच, ब्रेन इमेजिंग जैसे एमआरआई या फिर सीटी स्कैन और ब्लड टेस्ट के जरिये समस्या के शुरू में ही पता लगने पर, उसका इलाज और स्थिति को बेहतर तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है। समस्या के लक्षण शुरू में ही दिखने पर डॉक्टर को दिखाएं। अगर आपको भी ऐसी कोई समस्या है और आप इसका इलाज चाहते हैं, तो आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल में जाकर विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी ले सकते हैं।

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        दिमाग के लिए कैसे फायदेमंद होती है रेगुलर एक्सरसाइज? डॉक्टर से जानें इसके 2 कारण

        सेहतमंद रहने के लिए रोजाना कसरत करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। असल में, हमारे जीवन में कसरत किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि इसकी मदद से हमारा शरीर एक्टिव रहता है और इससे हमारे शरीर में खुशी के हार्मोन पैदा होते हैं। रोजाना की कसरत आपके शरीर को फिट रखती है। अगर आपका शरीर फिट रहता है, तो आप अपने आप को स्वस्थ महसूस करते हैं और जब आप अपने आप को हर जगह से स्वस्थ महसूस करते हैं, तो आप काफी ज्यादा खुश रहते हैं। कसरत हमारे शरीर के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद होती है। पर आम तौर पर, ज्यादातर लोगों के मन में कसरत का नाम सुनते ही बॉडी बिल्डिंग और सिक्स पैक एब्स की तस्वीर आने लग जाती हैं। दरअसल, यह बात वाकई में सच है, कि रोजाना कसरत करने से आपकी बॉडी फिट और टोन हो जाती है। इसके साथ ही व्यक्ति की बॉडी की शेप में काफी ज्यादा सुधार आता है। पर आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि कसरत जितनी जरूरी हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होती है, उतनी ही ये हमारे दिमाग के लिए भी लाभदायक होती है। दरअसल, रोजाना कसरत करने से आपके दिमाग को कई इस तरह के फायदे प्राप्त होते हैं, आम तौर पर, जिनके बारे में आप शायद ही जानते होंगे। तो आइये इस लेख के माध्यम से इस के डॉक्टर से इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं, कि कसरत हमारे दिमाग को किस तरीके से फायदा पहुंचा सकती है। 

        कसरत आपके दिमाग के लिए कैसे फायदेमंद होती है?

        दरअसल, कसरत कई तरीकों से दिमाग के लिए फायदेमंद हो सकती है, आम तौर पर, जिस में शामिल हो सकते हैं, जैसे कि 

        1. दिमाग को मिलती है ज्यादा ऑक्सीजन

        आम तौर पर, कसरत के दौरान सभी इस बात को जरूर नोटिस करते हैं, कि इस तरह की स्थिति में, लोगों के दिल की धड़कन काफी ज्यादा तेज हो जाती है। दरअसल, इस तरह की स्थिति में, एक व्यक्ति के दिल की धड़कन की रफ्तार तेज होने पर उसकी सासें काफी ज्यादा फेज हो जाती है, या फिर सांसे फूलने लग जाती हैं, जिससे कि उसके फेफड़ों में ऑक्सीजन काफी ज्यादा मात्रा में पहुँचती है। आम तौर पर, यही ऑक्सीजन खून में मिलकर पूरे शरीर में सप्लाई होती है। आपको बता दें कि हमारे दिमाग को जिन्दा रहने के लिए ऑक्सीजन की काफी ज्यादा जरूरत होती है। आम तौर पर जब आप कसरत करते हैं, तो इससे आपके पुरे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह होता है, जिससे आपके दिमाग को भी काफी ज्यादा ऑक्सीजन पहुंचती है। इससे काफी कुछ होता है, जैसे कि दिमाग की कोशिकाएं सेहतमंद और डैमेज टिशूज की मरम्मत होती है और इसके साथ ही हमारे दिमाग में नई खून की नसों का निर्माण होता है। 

        1. नई मस्तिष्क कोशिकाएं का निर्माण होता है 

        असल में, दिमाग हमारे शरीर का एक ऐसा अंग होता है, जो काफी लम्बे समय तक हमारा साथ निभाता है। अगर हमारा दिमाग काम करना बंद कर दे, तो हमारे शरीर का कोई भी अंग अच्छे तरीके से काम नहीं करेगा। इसलिए अपने दिमाग को सेहतमंद रखने के लिए रोजाना कसरत करना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है, इससे दिमाग एक्टिव रहता है। इसके साथ ही इसके लिए समय-समय पर पुरानी डैमेज सेल्स की मरम्मत करना और नई दिमाग की कोशिकाओं का निर्माण करना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। बता दें, कि यह सभी काम तब पुरे होते हैं, जब आप एक अच्छी नींद में सो रहे होते हैं। दरअसल, रोजाना की कसरत आपको एक अच्छी नींद प्रदान करती है और साथ ही इसकी मदद से नई दिमाग की कोशिकाओं का निर्माण होता है। 

        निष्कर्ष

        रोजाना कसरत करने से सिर्फ हमारे शरीर को ही नहीं बल्कि हमारे दिमाग को भी काफी ज्यादा फायदा प्राप्त होता है। अगर आपको इसके बारे में जानकारी लेनी है, या फिर आपको दिमाग से जुड़ी कोई भी समस्या है जिसका आप इलाज चाहते हैं, तो आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके बारे में जानकारी ले सकते हैं।

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          जो लोग कंफ्यूज रहते हैं उनमें कमजोर होती हैं ये तंत्रिका कोशिकाएं, ब्रेन का कौन सा पार्ट होता है तुक्का मारने में जबरदस्त, जाने डॉक्टर से

          दिमाग हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हमारे हर फैसले को लेकर अलग -अलग तरह की प्रक्रियाओं को करता है। इन पर्किर्यायों में आपकी प्रतिक्रियाशीलता को अलग-अलग गति से रिकॉर्ड करना शामिल है। आम तौर पर, इस तरह तरह की स्थिति के कारण, हम कुछ लोगों को एक्टिव और कुछ लोगों को स्लो समझा बैठते हैं, जबकि इस में उनकी किसी भी तरह की कोई गलती नहीं होती है। आम तौर पर, इसी तरह हमारा दिमाग भी फैसला लेने में एक महत्वपूर्ण भूमिका को निभाता है। आपको बता दें, कि हाल ही में आये एक शोध में, जो लोग ज्यादातर फैसला लेने में और कंफ्यूज रहते हैं, उनके दिमाग के बारे में एक खास खुलासा हुआ है। आम तौर पर, अगर इस शोध पर विश्वास किया जाये, तो डिसीजन मेकिंग यानी कि हमारे फैसला लेने की शक्ति और गति असल में, हमारे दिमाग के न्यूरॉन की फायरिंग दर की गति के साथ जुड़ा हुआ है। वो कैसे? तो आइये इस लेख के माध्यम से इस शोध के बारे में इस के डॉक्टर से विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं। 

          यह शोध फैसला लेने के बारे में क्या कहती है?

          आपको बता दें, कि जर्मनी की बॉन विश्वविद्यालय ने इस विषय पर ख़ोज की है, जो आम तौर पर, बायोलॉजी करेंट जर्नल में प्रकाशित हुई है। दरअसल, इस खोज में बताया गया है, कि किस तरीके से तंत्रिका कोशिकाओं की पहचान की जाती है, जो आम तौर पर, इस प्रक्रिया के लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं। इसके साथ ही, इस खोज में पाया गया है, कि फैसला लेने में विश्वास का स्तर, दरअसल न्यूरॉन की फायरिंग दर की गति के साथ जुड़ा हुआ होता है। आम तौर पर, ख़ोज बताती है, कि दिमाग के टेम्पोरल लोब के न्यूरॉन्स में बिजली की तरंगों की बड़ी हुई आवृत्ति फैसला लेने की शक्ति की गति को किस तरीके से तेज करती है। वहीं इसकी सहायता से एक व्यक्ति को फैसला लेने में काफी ज्यादा मदद प्राप्त होती है। 

          क्या तंत्रिका कोशिकाएँ आपके फैसला लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं?

          आम तौर पर, इस खोज ने दिखाया है, कि किस तरीके से कुछ लोगों का दिमाग, असल में, कई चीजों को याद रख कर और उन चीजों का तुरंत जवाब देने में किस तरीके से बेहतर होता है, जबकि इसके उल्ट कुछ लोगों का दिमाग कंफ्यूज और कमजोर होता है। असल में, इस दौरान इस खोज ने खुलासा किया है, कि कुछ न्यूरॉन्स में बिजली की नब्जों कि आवृत्ति, या केवल उनकी फायरिंग दर, फैसला लेने को काफी ज्यादा प्रभावित कर सकती है। आम तौर पर, उदाहरण के लिए, जिन लोगों में न्यूरॉन्स की फायरिंग दर बहुत ज्यादा तेज़ होती है, तो उनका दिमाग काफी तेजी से काम करने में सक्षम होता है और वहीं जिन लोगों में न्यूरॉन्स की फायरिंग दर कम होती है, वो असल में कंफ्जू होने वाली स्थिति में बार बार पहुंच जाते हैं। इसके अलावा, जो लोग दोनों के बीच में मध्यम गति वाले होते हैं, तो उनका दिमागी बैकअप काफी ज्यादा अच्छा होता है, इस तरह के लोग तुक्कों में चीजों को सही काफी ज्यादा सही बताते हैं। 

          निष्कर्ष:

          इस प्रकार, यह खोज बताती है कि कैसे प्रभावित न्यूरॉन्स और दिमाग का यह क्षेत्र मानसिक गतिविधियों को करने और फैसला लेने में एक महत्वपूर्ण भूमिका को निभाते हैं। आम तौर पर, इसके साथ ही यह याददाश्त प्रक्रियाओं, जैसे कि अपने दिमाग में चीजों को याद रखना और साथ ही एक सही फैसला लेने, में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका को निभाते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस विषय पर और भी ज्यादा खोज करने की जरूरत है। पर तब तक आपको अपने मानसिक स्वास्थ्य को बना कर रखना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है। अपने मानसिक स्वास्थ्य को सही रखने के लिए आपको रोजाना व्यायाम करना चाहिए। अगर आपको भी इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करनी है, या फिर दिमाग से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का इलाज चाहते है, तो आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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            Trigeminal Neuralgia vs Dental Pain: Why Facial Pain Can Be Misleading
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            Trigeminal Neuralgia vs Dental Pain: Why Facial Pain Can Be Misleading

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            दिमाग की चोट के कारण, लक्षण और रोकथाम के उपाय, जाने डॉक्टर से

            असल में, दिमाग हमारे शरीर का सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण और एक मुख्य अंग होता है। आपको बता दें कि अपने शरीर को सेहतमंद रखने के लिए अपने दिमाग को सेहतमंद रखना बहुत ही ज्यादा जरूरी होता है। कुछ इस तरह की स्थिति, जिसमें अगर आपका दिमाग ही बीमार और स्वस्थ नहीं रहता है, तो इसकी वजह से आपको शरीर में महत्वपूर्ण कमी और यहां तक कि विकलांगता का भी अनुभव हो सकता है। आम तौर पर, इसलिए आपको दिमाग पर लगी चोट (ब्रेन इंजरी) को बिलकुल भी नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए, उसका जल्द से जल्द इलाज कराना चाहिए, ताकि आपके जीवन की गुणवत्ता और भी ज्यादा बेहतर हो सके। यह तो आप जानते ही होंगे, कि अक्सर हर साल कई लोग किसी दुर्घटना की वजह से दिमाग पर लगी चोट के कारण अपनी जिंदगी को खो देते हैं। इसलिए इस दौरान दिमाग पर लगी हलकी या फिर बड़ी, किसी भी प्रकार की चोट को हलके में नहीं लेना चाहिए, इसके लिए आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए और इसका इलाज करवाना चाहिए। ताकि आगे चलकर आपको किसी बड़ी समस्या या फिर जटिलता का सामना न करना पड़े। तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके डॉक्टर से, दिमाग की चोट के कारण, लक्षण और रोकथाम के उपायों के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। 

            दिमाग पर चोट (ब्रेन इंजरी) के कारण 

            डॉक्टर के अनुसार, सिर पर किसी भी तरह की चोट लगने की वजह से दिमागी चोट लग सकती है। आम तौर पर, ज्यादातर इस तरह कि दिमागी चोट बच्चों और बूढ़ों में देखने को मिलती है, जैसे कि 

            1. बेड से गिरना और किसी चीज से सिर टकराना। 
            2. सीढ़ी से पैर फिसलने से दीवार या जमीन पर सिर लगना। 
            3. किसी ऊंचाई से नीचे गिरना। 
            4. रोड पर होने वाले एक्सीडेंट। 
            5. दीवार आदि पर सिर टकराना।
            6. बॉक्सिंग, फुटबॉल और बेसबॉल खेलते समय सिर पर मुक्का या बॉल लगना। 

            दिमाग पर चोट (ब्रेन इंजरी) के लक्षण

            दरअसल, दिमाग पर चोट लगने के कारण आपको कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। आम तौर पर, इस तरह के लक्षण चोट लगने के तुरंत बाद या फिर चोट लगने के एक हफ्ते बाद नज़र आ सकते हैं, जैसे कि 

            1. सिर दर्द होना। 
            2. कुछ भी बोलने में अक्षमता महसूस होना। 
            3. कुछ स्थितियों में खुद को संतुलित न कर पाना। 
            4. चल पाने में दिक्कत महसूस होना। 
            5. ज्यादातर चक्कर आना। 
            6. लाइट के प्रति सेंसिटिविटी होना। 
            7. कुछ भी सुनने में परेशानी होना। 
            8. धुंधला दिखाई देना। 
            9. अपने होश खो बैठना। 
            10. किसी दुविधा में फंसे रहना। 
            11. मानसिक रोग जैसे डिप्रेशन, चिंता होना। 
            12. तनाव में रहना। 
            13. उंगलियों में कमजोरी आना। 
            14. मूड स्विंग होना। 
            15. उल्टियां होना। 
            16. जी घबराना। 

            दिमाग पर चोट (ब्रेन इंजरी) का उपचार

            आम तौर पर, आपको इस तरह के लक्षणों से छुटकारा पाने के लिए और साथ ही अपने आम जीवन में लौटने के लिए, फिजिकल और ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट की जरूरत होती है। दरअसल, इस दौरान थेरेपिस्ट पहले आपको अपनी रोजाना की गतिविधियों में और साथ में चीजों को याद रखने में सहायता प्रदान कर सकते हैं। इसके साथ ही, आपकी कई प्रकार की गतिविधियों जैसे कि चलने और बैलेंस रखने में फिजिकल थेरेपिस्ट आपकी काफी ज्यादा सहायता कर सकते हैं। इसके अलावा, वह आपके बोलने और सुन पाने में भी सहायता प्रदान कर सकते हैं। 

            निष्कर्ष:

            दिमाग हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण और आवश्यक अंग है, जिसकी वजह से हम सभी काम अच्छे तरीके से कर पाते हैं। दिमाग हमें चीजों को समझने में काफी मदद करता है, इसलिए दिमाग को स्वस्थ रखना बहुत जरूरी है। अगर आपका दिमाग बीमार है और स्वस्थ नहीं है, तो आपको काफी शारीरिक दुर्बलता और यहां तक ​​कि विकलांगता का भी अनुभव हो सकता है। इसलिए ब्रेन इंजरी को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति होने पर आपको तुरंत इसका इलाज करवाना चाहिए ताकि आपको आगे किसी परेशानी का सामना न करना पड़े। ब्रेन इंजरी होने पर, आपको कई गंभीर लक्षण भी नजर आ सकते हैं, ऐसा होने पर आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। अगर आप भी इसके बारे में अधिक जानना चाहते हैं और ब्रेन इंजरी जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं और आप किसी थेरेपिस्ट की मदद लेना चाहते हैं, तो आप आज ही न्यूरो सिटी अस्पताल में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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              MRI Vs. CT Scan: Which One is Better for an Emergency Scan?
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              Scheduled For An Image-Guided Biopsy: A Complete Step-by-Step Guide For Patients
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              Trigeminal Neuralgia vs Dental Pain: Why Facial Pain Can Be Misleading
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              Trigeminal Neuralgia vs Dental Pain: Why Facial Pain Can Be Misleading

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              Differentiating trigeminal neuralgia vs tooth pain might be difficult because the pain…

              सांस लेने में हो रही परेशानी के मुख्य कारण क्या है और इस दौरान क्या करना करना चाहिए ?

              सांस लेने में परेशानी होना स्वास्थ्य से जुड़ा एक आम समस्या है, जो कई लोगों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है | यह समस्या एक व्यक्ति को न केवल शरीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी प्रभावित कर सकता है | इसलिए इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति के लिए यह ज़रूरी होता है की वह सांस लेने में हो रही परेशानी को ठीक से समझें और अपनी समस्यों के उपचार को महत्ववपूर्ण दें | आइये जानते है इस विषय के बारें में विस्तारपूर्वक से :- 

               

              सांस लेने में परेशानी क्यों होती है और इसके मुख्य कारण क्या है ? 

              सांस लेने में परेशानी होने के विभिन्न कारक हो सकते है, जो हलके से लेकर गंभीर स्थितिओं को उत्पन्न कर सकती है | सांस लेने में हो रही कठिनाई के सामान्य लक्षणों में शामिल है :- 

               

              श्वसन संक्रमण 

              बदलते मौसम के साथ-साथ सामान्य सर्दी, फ्लू, ब्रोंकाइटिस या फिर निमोनिया जैसे संक्रमणों से वायुमार्ग में संकुचन और सूजन होने लग जाता है, जिसकी वजह से एक व्यक्ति के लिए सांस लेना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है | 

               

              अस्थमा 

              अस्थमा एक ऐसी समस्या है जिसकी वजह से सांस लेने में परेशानी होने लग जाती है, यह स्थिति पुरानी वायु मार्ग की सूजन और संकुचन के कारण बनता है, जो सांस लेने में तकलीफ, घरघराहट की आवाज़ और खांसी जैसे लक्षणों को उत्पन्न करता है | 

              सांस क्यों कठिन होती है और इसे कैसे प्रबंधित करें

              सीपीओडी यानी क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज      

              सीपीओडी यानी क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज फेफड़ों से जुडी एक आम बीमारी है, जिसकी वजह से सांस लेने में परेशानी होने लग जाती है | सीपीओडी में क्रोनिक ब्रोंकाइटिस और वातस्फीति जैसे स्थितियां शामिल होती है | 

               

              किसी चीज़ से एलर्जी होना 

              धूल के छोटे-छोटे कण, पालतू जानवरों के रुसी, पराग या फिर कुछ खाद पदार्थ से एलर्जी की प्रतिक्रिया श्वसन संबंधी लक्षण को उत्पन्न कर सकते है, जिससे आपको सांस लेने में समस्या हो सकती है |   

               

              अत्यधिक चिंता में रहना और घबराहट 

              तीव्र चिंता और घबराहट होने वाली स्थिति से आपको तेज़ी से सांस लेने, सीने में जकड़न होना और सांस लेने के लिए संघर्ष करने की अनुभूति हो सकती है | 

               

              हृदय से जुड़ी स्थितियां 

              हृदय के स्वास्थ्य से जुड़े कुछ स्थितियां जैसे की कार्डियक अरेस्ट, कोरोनरी धमनी रोग या फिर अतालता सहित विभिन्न समस्याएं हृदय के रक्त को पंप करने की क्षमता को प्रभावी ढंग से ख़राब कर देती है, जिसकी वजह से सांस फूलने लग जाता है | 

               

              वजन का अनियमतता से बढ़ना 

              कई मामलों में सांस फूलने की मुख्य वजह मोटापा भी होता है, क्योंकि अत्यधिक वजन श्वसन में दबाव डालते है, जिससे सांस लेने में काफी दिक्कत होती है |   

               

              पल्मोनरी अम्बोलिज़्म 

              फुफफुसीय धमनी में होने वाले रक्त के धक्के, जो फेफड़ों में रक्त की आपूर्ति करता है, वह रक्त प्रवाह में बाधा डाल सकता है, जिससे सांस लेने में परेशनी हो सकती है | 

               

              फेफड़ों से जुड़ा रोग 

              फेफड़ों का कैंसर, फुफफुसीय फाइब्रोसिस या फुफफुसीय के उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियां फेफड़ों की कार्यप्रणाली को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है | जिसके परिणामस्वरुप सांस लेने में परेशानी हो जाती है | 

               

              अन्य कारक 

              अधिक ऊंचाई, प्रदूषकों के संपर्क में आने से, धूम्रपान करने से, कुछ दवाएं और एनीमिया या फिर न्यूरोमस्कुलर से जुड़े कुछ विकार से भी सांस लेने में समस्या होने लग जाती है |       

               

              सांस लेने में हो रही परेशानी के मुख्य लक्षण क्या है ? 

              सांस लेने में हो रही परेशानी से आप कई तरह के लक्षणों से गुजर सकते है जैसे की सांस लेने के साथ-साथ घबराहट होना, दम घुटना, श्वास में कष्ट होने का अनुभव होना, सांस को अच्छी तरह से खींचने में परेशानी होना या फिर दर्द महसूस होना और सांस लेते समय सांस के फूलने का अनुभव करना आदि शामिल है |    

               

              सांस लेने में हो रही परेशानी के दौरान करें ? 

              यदि आप या फिर आपका कोई परिजन को सांस लेने में परेशानी में हो रही है, तो इस दौरान तुरंत करवाई करने की आवश्यकता पड़ सकती है | नीचे दिए उपायों के अनुसरण से आप सांस लेने में हो रही परेशानी को कम करने की कोशिश कर सकते है :- 

               

              • सबसे पहले शांत रहे, क्योंकि घबराने से सांस लेने में काफी परेशानी होती है, इसलिए शांत और केंद्रित रहने की कोशिश करें | 


              • यदि आपकी स्थिति गंभीर होती जा रही है या फिर इससे संबंधित लक्षण लगातार गंभीर हो रहे है तो बिना समय को व्यर्थ किए तुरंत आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करें या फिर अपने निकटतम आपातकालीन कक्ष में जाएं  | 


              • सीधा और थोड़ा आगे की ओर होकर बैठें | ऐसा करने से वायुमार्ग को खोलने और सांस लेने में सुविधा प्राप्त हो सकती है |


              • डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाओं का समय-समय पर सेवन करते है, क्योंकि यह सांस लेने में हो रही परेशानी को कम करने में मदद करता है |   


              • कोशिश करें थोड़े ढीले और आरामदायक कपडे को ही पहने | 


              • खुद को हाइड्रेट रखने के लिए पानी पीते रहे, क्योंकि शुष्क वायु मार्ग होने से भी सांस लेने में परेशानी होती है | 


              यह सब करने के बाद भले ही आपकी सांस लेने में हो रही परेशानी कम हो जाएं या फिर सुधार हो जाएं, फिर भी इसके अंतर्निहित कारणों को निर्धारित करने के लिए और उचित उपचार को प्राप्त करने के लिए चिकित्सा से मूल्यांकन ज़रूर करवाएं | इसके लिए आप न्यूरोसिटी हॉस्पिटल से परामर्श कर सकते है | इस संस्था के सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर विकेश गुप्ता पंजाब के बेहतरीन पुमोनोलॉजिस्ट में से एक है, जो आपकी समस्या का सटीकता से इलाज करने में मदद कर सकते है | इसलिए परामर्श के लिए नियुक्ति को बुक करने के लिए आज ही न्यूरोसिटी हॉस्पिटल को ऑफिसियल वेबसाइट पर जाएं | इसके अलावा आप वेबसाइट पर मौजूद नंबरों से भी बातचीत कर सकते है |

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                Trigeminal Neuralgia vs Dental Pain: Why Facial Pain Can Be Misleading
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                क्या है ब्रोंकोस्कोपी ? जाने कैसे करती है यह एक व्यक्ति को आसानी से साँस लेने में मदद

                न्यूरोसिटी हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर विकेश गुप्ता ने अपने यूट्यूब चैनल में पोस्ट एक यूट्यूब शॉर्ट्स में ये बताया की बदलती जीवनशैली और प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण अधिकतम लोगों को सांस लेने में काफी दिक्क्तों का सामना करना पड़ जाता है | कई मामलों में व्यक्ति को खांसी की समस्या काफी अधिक हो जाती है, जिसके चलते लगातार खांसी होने की समस्या उत्पन्न हो जाती है | यह समस्या उत्पन्न होने के कई प्रमुख कारण हो सकते है, जिन में से एक है फेफड़ों से जुडी किसी भी प्रकार के समस्या का उत्पन्न होना | इस समस्या का सही समय पर इलाज करना बेहद ज़रूरी होता है, नहीं तो यह आगे जाकर बहुत बड़ी बीमारी का विक्राल रूप धारण कर सकती है | 

                 

                डॉक्टर विकेश गुप्ता ने यह बीमारी को समझते हुए इसके इलाज में उपयोग किये जाने वाले प्रक्रिया के बारे में बताते हुए यह कहा की इस समस्या के इलाज के लिए एक प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है जो है ब्रोंकोस्कोपी | ब्रोंकोस्कोपी एक ऐसी प्रक्रिया होती है, जिसके उपयोग से एक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता किसी भी व्यक्ति के फेफड़ों के अंदर देख सकता है | इस प्रकिया में एक पतली और रौशनी वाली ट्यूब का इस्तेमाल किया जाता है | 

                 

                यदि आप भी साँस लेने में तकलीफ या फिर लगातार खांसी होने की समस्या हो रही है तो देरी न करें और जल्द ही किसी डॉक्टर के पास जाकर इस समस्या का अच्छे से इलाज करवाएं | इसके लिए आप न्यूरोसिटी हॉस्पिटल से परामर्श भी कर सकते है | इस संस्था के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर विकेश गुप्ता पुमोनोलॉजिस्ट में स्पेशलिस्ट है, जो इस समस्या से छुटकारा दिलाने में आपकी पूर्ण रूप से मदद कर सकते है | इसलिए आप ही  न्यूरोसिटी हॉस्पिटल नामक वेबसाइट पर जाएं और अपनी अप्पोइन्मेंट को बुक करें | आप चाहे तो वेबसाइट पर दिए गए नंबरों से भी संपर्क कर सकते है |

                इससे जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आप दिए गए लिंक पर क्लिक कर इस वीडियो को पूरा देख सकते है | इसके अलावा आप न्यूरोसिटी हॉस्पिटल नामक यूट्यूब चैनल पर भी विजिट कर सकते है | इस चैनल पर इस विषय संबंधी संपूर्ण जानकारी पर वीडियो प्राप्त हो जायेगी | 

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                  • September 29, 2026

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                  Differentiating trigeminal neuralgia vs tooth pain might be difficult because the pain…

                  स्लीप एपनिया क्या होता है ? जाने एक्सपर्ट्स से कैसे पाया जा सकता है इस समस्या से निज़ात

                  न्यूरोसिटी हॉस्पिटल के यूट्यूब चैनल में पोस्ट एक यूट्यूब शॉर्ट्स के माध्यम से यह बताया की स्लीप एपनिया एक ऐसी गंभीर समस्या है, जिस कारण इसस समस्या से पीड़ित व्यक्ति अक्सर नींद में साँस लेना बंद कर देता है | जहाँ आपका मस्तिषक पर्याप्त रूप से जागकर आपकी रक्षा करने का कार्य करता है, वही यह समस्या आपके आरामदायक और स्वस्थ नींद मे खलल बनने का कारण बनती है | स्लीप एपनिया जैसे गंभीर समस्या का सही समय पर इलाज करवाना बेहद ज़रूरी होता है, क्योंकि समय के साथ-साथ यह स्थिति गंभीर जटिलताओं के उत्पन्न होने का प्रमुख कारण बन सकती है | यदि आप निर्धारित उपचारों का पर्याप्प्त रूप से पालन करेंगे, तो स्लीप एपनिया जैसे गंभीर समस्या से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है, क्योंकि स्लीप एपनिया जैसी स्थिति को पूर्ण रूप से नियंत्रण किया जा सकता है | आइये जानते है स्लीप एपनिया जैसे स्थित के पउत्पन्न होने के प्रमुख कारण कौन-से है | 

                   

                  एक शोध से यह बात सामने आई है की स्लीप एपनिया स्थिति तब उत्पन्न होती है जब आपके वायु मार्ग में किसी कारण से रुकावट आ जाती है या फिर तब होती है जब आपका मस्तिष्क आपके साँस लेने के तरीके को सही तरीके से नियंत्रित करने में असमर्थ हो जाता है | जिसके परिणामस्वरूप आपके शरीर में ऑक्सीजन में आये कमी कारण यह एक जीवित प्रतिवर्त को  सक्रिय कर देती है, जो पर्याप्त रूप से आपको साँस लेने के लिए जगाये रखने का कार्य करती है | हालांकि यह प्रतिवर्त आपको जीवित तो रखता है लेकिन आपके नींद चक्र में बाधित बन जाता है | स्लिप एपनिया नींद के साथ-साथ शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित सकता है, जिसके संभावित रूप से परिणाम घातक हो सकते है | 

                   

                  इसलिए यदि आप भी स्लीप एपनिया जैसी गंभीर समस्या से पीड़ित है तो बिना समय को देरी किये आज ही न्यूरोसिटी हॉस्पिटल से इलाज के लिए परामर्श करें | इस संस्था के पास न्यूरोलॉजिस्ट में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की बेहतरीन टीम है, जो स्लीप एपनिया जैसी गंभीर समस्या से छुटकारा दिला सकता है | इसलिए आज ही न्यूरोसिटी हॉस्पिटल नामक वेबसाइट पर जाएं और अपनी अप्पोइन्मेंट को बुक करें | आप चाहे तो वेबसाइट में मौजूद नंबरों से भी संपर्क कर सकते है | 

                   

                  इससे जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आप न्यूरोसिटी हॉस्पिटल की यूट्यूब चैनल पर भी जा सकते है या फिर दिए गए लिंक पर इस वीडियो को पूरा देख सकते है | इस चैनल में इस विषय संबंधी संपूर्ण जानकारी पर वीडियो मौजूद है | 

                      

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                    माइग्रेन सिरदर्द के मुख्य लक्षण कौन-से है ? जाने एक्सपर्ट्स से कैसे पाएं माइग्रेन की समस्या से निजात

                    न्यूरोसिटी हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर एस.के. बंसल ने अपने यूट्यूब चैनल पर पोस्ट एक यूट्यूब शॉर्ट्स में यह बताया कि माइग्रेन मस्तिष्क से जुड़ी एक ऐसी समस्या है, जिससे पीड़ित लोगों के सिर एक हिस्से में काफी तीव्र दर्द होने लग जाता है | कई मामलों में लोगों को सिरदर्द के साथ-साथ जी मिचलना, उलटी और दस्त की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है | प्रकाश और शोर के प्रति व्यक्ति अत्यधिक सवेदनशील हो जाता है और इस सिरदर्द के कारण व्यक्ति के रोज़मर्रा जीवनशैली पर भी काफी बुरा असर पड़ता है | आमतौर पर माइग्रेन का अटैक का असर एक घंटे से 2-3 दिन तक भी रह सकता है | आइये जानते है माइग्रेन सिरदर्द के प्रमुख लक्षण कौन-से है :- 

                     

                    • माइग्रेन सिरदर्द के शुरुआती दिनों में व्यक्ति में कब्ज़, मूड में बदलाव, भूख न लगना, गर्दन में अकड़न आना, बार-बार पेशाब आने जैसे लक्षण दिखायी दे सकते है | 

                     

                    • कई मामलों में माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति को इस सिरदर्द से पहले या फिर इस सिरदर्द के दैरान औरा बनने का  आभास होने लग जाता है, जिससे उनके नर्वस सिस्टम काफी बूरा प्रभाव पड़ सकता है | 

                     

                    • माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति को आवाज़ और प्रकाश से संवेदनशील होने लग जाता है, जिस कारण उनके आंखों की दृष्टि में थोड़े समय के लिए धुँधलापन आ जाता है |

                     

                    • हाथ या पैर में सुई जैसा अनुभव होना, चेहरे के एक तरफ सुन्नता आना, बोलने के समय परेशानी होने जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते है | 

                     

                    यदि आप भी माइग्रेन सिरदर्द की समस्या से गुज़र रहे है और कई तरह के उपचार के अपनाने के बाद स्थिति में किसी भी तरह का सुधार नहीं आ रहा तो आप न्यूरोसिटी हॉस्पिटल से परामर्श कर सकते है | इस संस्था के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर एस.के. बंसल न्यूरोसर्जरी में स्पेशलिस्ट है, जो माइग्रेन जैसे सिरदर्द को कम करने में आपकी मदद कर सकते है | इसलिए आज ही न्यूरोसिटी हॉस्पिटल नामक वेबसाइट पर जाएं और अपनी अप्पोइन्मेंट को बुक करें | आप चाहे तो वेबसाइट पर दिए गए नंबरों से भी संपर्क कर सकते है | 

                    इससे जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आप न्यूरोसिटी हॉस्पिटल नामक यूट्यूब चैनल पर विजिट कर सकते है या फिर दिए गए लिंक पर क्लिक करें और इस वीडियो को पूरा देखें | इस चैनल पर आपको इस विषय संबंधी संपूर्ण जानकारी पर वीडियो प्राप्त हो जाएगी |    

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