आज हर कोई दिमाग से जुड़ी किसी न किसी समस्या से पीड़ित है, जिसमें भूलने की बीमारी सबसे आम है। इसे डिमेंशिया के नाम से भी जाना जाता है, जो धीरे-धीरे बहुत से लोगों को अपनी चपेट में ले लेती है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि डिमेंशिया केवल भूलने की ही बीमारी नहीं है, बल्कि यह एक इस तरह की मानसिक स्थिति है, जो धीरे-धीरे पीड़ित व्यक्ति को बुरी तरीके से प्रभावित कर देती है। इसमें एक व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता कमजोर होना, रोजाना के काम बुरी तरीके से प्रभावित होना और व्यवहार में बदलाव होना शामिल है।
डिमेंशिया मतलब कि भूलने की बीमारी जो ज्यादातर बुजुर्ग लोगों में ही देखने को ही मिलती है। पर, आज इस समस्या की चपेट में युवा भी आ रहे हैं। इसका कारण ज्यादातर काम में फोकस करके दिन रात सोचते रहना और तनाव लेना जैसी स्थिति शामिल है। हम में से ज्यादातर लोग इस समस्या को आम समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं और समय रहते डॉक्टर के पास नहीं जाते हैं। इसी के कारण यह समस्या आगे चलकर एक गंभीर बीमारी का रूप धारण कर लेती है।
आम तौर पर, ऐसा ही हम अपने बुजुर्ग माता-पिता के साथ करते हैं। दरअसल, इस समस्या के शुरुआती संकेतों को हम उम्र से जुड़ी समस्या समझ कर ऐसे ही नजरअंदाज कर देते हैं और सब कुछ ऐसे ही चलने देते हैं। पर, ऐसा करना बुजुर्ग लोगों की दिमागी सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं होता है। इसलिए, वक्त रहते इस समस्या के शुरूआती लक्षणों पर ध्यान देना अति आवश्यक होता है, ताकि डिमेंशिया जैसी समस्या से पीड़ित व्यक्ति को सही और समय पर इलाज मिल सके और किसी बड़ी समस्या का शिकार होने से बच सके। दरअसल, डिमेंशिया के शुरुआती लक्षणों में, याद रखने की क्षमता कम होना, चीजों को रख कर भूल जाना, गलत जगहों पर सामान रखना, चिड़चिड़ापन बढ़ना, बिना किसी कारण के तनाव लेना, रास्ता भूल जाना, मूड में बदलाव होना और सामाजिक गतिविधियों से दूरी बनाना जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं, जिनको नजरअंदाज करना एक व्यक्ति की सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। आगे चलकर यह किसी बड़ी बीमारी का कारण बन सकता है, इसलिए डॉक्टर से मिलना आवश्यक होता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।
डिमेंशिया के शुरुआती लक्षण
दरअसल, डिमेंशिया के शुरुआती लक्षण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जिनको लोग उम्र से जुड़ी समस्या समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं:
- याद रखने की क्षमता कम होना
लोगों की उम्र बढ़ने के साथ-साथ किसी भी चीज को याद रखने की क्षमता भी कम होने लग जाती है। यह आम हो सकती है, पर इस पर गौर करना अति आवश्यक होता है, क्योंकि यह डिमेंशिया का शुरुआती संकेत होता है, जो बढ़ने पर गंभीर भी हो सकता है।
- गलत स्थानों पर सामान रखना
बार-बार और लगातार गलत जगहों पर चीजों को रखना डिमेंशिया का लक्षण हो सकता है, जो आम नहीं होता है।
निष्कर्ष: डिमेंशिया जिसे भूलने की बीमारी कहा जाता है, जो ज्यादातर बुजुर्ग लोगों को प्रभावित करती है। पर, आज यह समस्या युवाओं में भी देखने को मिल सकती है। डिमेंशिया के लक्षण अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, क्योंकि इसके लक्षण शुरुआत में मामूली नजर आते हैं, जो आगे चलकर किसी बड़ी और गंभीर समस्या का कारण बनते हैं। इसलिए, इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने की बजाए इन पर ध्यान देना अति आवश्यक होता है। इसके शुरुआती लक्षणों में रोजाना आने जाने वाले रास्तों को भूल जाना, चीजों को कहीं पर रख कर भूल जाना, चीजों को गलत जगह पर रख देना, व्यवहार में बदलाव होना और तनाव आदि होना शामिल हो सकता है। याद रहे, अगर परिवार के किसी भी मेंबर में इस तरह के लक्षण दिखाई देते हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए और समस्या बढ़ने से पहले ही कंट्रोल में करनी चाहिए। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और दिमाग से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. डिमेंशिया रोग सबसे ज्यादा किसको प्रभावित करता है?
डिमेंशिया रोग ज्यादातर 65 साल से भी ज्यादा उम्र के बुजुर्ग लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। हालंकि, जैसे-जैसे एक व्यक्ति उम्र बढ़ती जाती है, वैसे -वैसे इस समस्या का खतरा भी बढ़ता जाता है।
प्रश्न 2. डिमेंशिया रोग कैसे होता है?
डिमेंशिया रोग जिसे भूलने की बीमारी भी कहा जाता है। इस समस्या का निर्माण दिमाग के सेल्स डैमेज या फिर खत्म होने की वजह से होता है। यह समस्या विशेष तौर पर उम्र बढ़ने, जेनेटिक्स या फिर स्ट्रोक जैसी मेडिकल स्थितियों से भी जुड़ी हुई होती है।
प्रश्न 3. क्या डिमेंशिया का कोई इलाज है?
दरअसल, वर्तमान में डिमेंशिया का ऐसा कोई भी इलाज नहीं है, जो इस समस्या को पूरी तरीके से खत्म कर सके। केवल दवाओं, थेरेपी और इलाज की सहायता से इस समस्या के लक्षणों को कंट्रोल में किया जा सकता है।
प्रश्न 4. किस कमी के कारण दिमाग कमजोर हो सकता है?
शरीर में विटामिन बी12, विटामिन डी, आयरन और ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी के कारण दिमाग कमजोर होने साथ-साथ व्यक्ति की याददाश्त भी काफी ज्यादा कम हो सकती है। शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी के कारण नर्वस सिस्टम काफी ज्यादा कमजोर हो जाता है, जिसकी वजह से एक व्यक्ति को फोकस में कमी, सुस्ती और भूलने जैसी समस्यायों का सामना करना पड़ सकता है।
प्रश्न 5. डिमेंशिया के लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है?
डिमेंशिया जैसी समस्या के लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए नियमित शारीरिक और मानसिक व्यायाम करना, नियमित जांच करवाना, सेहतमंद आहार का सेवन करना, समाज से संपर्क बनाए रखना और नशीली वस्तुओं से दूरी बना कर रखना जैसे कुछ उपायों का इस्तेमाल कर सकते हैं।