आज हर किसी के पास स्मार्ट फ़ोन मौजूद है, चाहे वो कोई बच्चा हो या फिर कोई बजुर्ग हो आज हर कोई स्मार्ट फोन का इस्तेमाल अपने सभी कामों को करने के लिए कर रहा है। मानों, जैसे कि यह हमारी जिन्दगी का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, जिससे अब पीछा छुड़ाना और इसके बिना रहना आसान नहीं है। इसी वजह से लोग सुभह उठते हैं तो अपना फ़ोन चेक करते हैं और सोते हैं, तो भी अपना फ़ोन अक्सर देख कर ही सोते हैं। यह आज के लोगों में बहुत आम देखने को मिल सकता है। हालांकि, यह आदत ठीक नहीं है, पर लोग इसके बिना अब रहना बिल्कुल भी पसंद नहीं करते हैं। क्योंकि, सोशल मीडिया ने बहुत से ऐसे लोगों से मिलवाया है, जिनको शायद ढूंढ़ना हमारे लिए बहुत ही ज्यादा मुश्किल था। पर, इससे दिमाग पर भी भारी प्रभाव पड़ सकता है। क्योंकि, एक दूसरे के साथ संपर्क करने के चक्कर में हम सभी सारा दिन मोबाइल पर कुछ न कुछ करते और देखते रहते हैं, जिससे कि हमारा दिमाग बुरी तरीके से प्रभावित हो जाता है। कई बार यह चिंता का कारण भी बन सकता है। जैसे कि आप सभी ने कई बार बहुत से लोग को देखा होगा, कि वह बिना किसी कारण के काफी ज्यादा चिड़चिड़ापन, बेचैनी, थकान और ध्यान की कमी को महसूस करते रहते हैं। इसका कारण मोबाइल की स्क्रीन के अंदर ही छिपा हुआ होता है और हम कई बार इन समस्याओं का कारण बाहर ढूंढ़ने लग जाते हैं। इसके अलावा, यह भी सच है, कि सोशल मीडिया पर ज्यादा वक्त बिताने से एंग्जायटी का खतरा भी काफी ज्यादा बढ़ सकता है, जिससे कि मेंटल हेल्थ बुरी तरीके से प्रभावित हो जाती है। इसमें तनाव बढ़ना, डिप्रेशन का खतरा बढ़ना, नींद में गड़बड़ी होना, ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल होना जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं। इसलिए, इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए डिजिटल डिटॉक्स करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।
सोशल मीडिया का मेंटल हेल्थ पर क्या प्रभाव पड़त है?
दरअसल, अगर सोशल मीडिया का सीमित और सही इस्तेमाल किया जाये, तो यह दिमागी सेहत के लिए नुक़सानदायक नहीं हो सकता है, पर अगर इसका इस्तेमाल हद से ज्यादा किया जाये और एक आदत सी बन जाये, तो फिर यह नुक्सानदायक हो सकता है और इसके कारण समस्याएं हो सकती हैं। NIH की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया के कारण लोगों की मेंटल हेल्थ काफी ज्यादा प्रभावित हो रही है, जैसे
- तनाव का बढ़ना
दरअसल, सोशल मीडिया पर, लाइक्स, कमेंट्स और फॉलोअर्स को लेकर लोगों में एक रेस लग जाती है, जिससे कि सेल्फ कॉन्फिडेंस कम और तनाव बढ़ने लग जाता है।
- डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाना
इसमें किसी भी तरह का कोई शक नहीं है, कि सोशल मीडिया डिप्रेशन का कारण बन सकता है, क्योंकि आधे से ज्यादा लोग दूसरों की बढ़ती और खुशहाल जिंदगी को देखकर अपने आप को कमजोर और कम देखने लग जाते हैं, जिससे कि डिप्रेशन का खतरा खुद-ब-खुद बढ़ने लगता है।
- फोकस में कमी होना
ऐसे में, बार-बार अपने फ़ोन को चेक करना और सोशल मीडिया पर ज्यादा से ज्यादा एक्टिव रहना दिमाग को फोकस करने से रोक सकती हैं।
- नींद की परेशानी होना
दरअसल, हम में से ज्यादातर लोग सोने से पहले अपने फ़ोन को देखते हैं, जिससे कि हमारा दिमाग एक्टिव रहता है। इसके कारण नींद नहीं आती है और नींद की गुणवत्ता भी काफी खराब हो जाती है।
डिजिटल डिटॉक्स कैसे किया जा सकता है?
दरअसल, डिजिटल डिटॉक्स करने के लिए आप निम्नलिखित उपायों को अपना सकते हैं, जैसे कि
- खाना खाते वक्त या फिर परिवार के साथ बैठते वक्त फोन से दूर रहें।
- सोने के एक घंटा पहले फोन साइलेंट पर रखें।
- हर वक्त आने वाले नोटिफिकेशन को बंद करें।
- हफ्ते में एक दिन सोशल मीडिया से पूरी तरह ब्रेक जरूर लें।
निष्कर्ष: सोशल मीडिया पर ज्यादा वक्त बिताने से चिंता हो सकती है और इससे मेंटल हेल्थ प्रभावित हो सकती है। रोजाना डिजिटल डिटॉक्स करना जरूरी है, क्योंकि इससे टेंशन कम होती है और मेंटल हेल्थ भी ठीक रहती है। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए और दिमाग से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!
- प्रश्न 1. एंग्जायटी क्या होती है?
एंजाइटी जिसे चिंता भी कहा जाता है, जिस से लगभग सभी लोग कभी न कभी प्रभावित हो ही जाते हैं। यह एक मानसिक सेहत स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को छोटी सी बात पर चिंता, घबराहट, डर, बेचैनी और तनाव जैसी परेशानियों का अनुभव होता है। इस में व्यक्ति एक छोटी सी बात पर काफी ज्यादा चिंतित हो जाते हैं।
- प्रश्न 2. एंग्जायटी को दूर करने के क्या-क्या उपाय हो सकते हैं?
वैसे तो, एंग्जायटी एक आम समस्या है, पर ध्यान न देने पर यह समय के साथ गंभीर भी हो सकती है। एंग्जायटी मतलब, कि चिंता को कम करने के लिए कई तरह के उपायों को अपनाया जा सकता है, जिसमें रोजाना गहरी सांस लेने वाले व्यायाम करना, नियमित योगासन करना, मेडिटेशन करना, पर्याप्त मात्रा में पानी और नींद लेना और साथ में संतुलित आहार का सेवन करना जैसे कई उपाय कारगर साबित हो सकते हैं।
- प्रश्न 3. क्या सिर्फ सोशल मीडिया पर ज्यादा समय बिताने से एंग्जायटी हो सकती है?
दरअसल, हाँ सोशल मीडिया पर हद से ज्यादा समय बिताने से एक व्यक्ति में एंग्जायटी का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ सकता है।
- प्रश्न 4. क्या सेहतमंद लोग भी एंग्जायटी की चपेट में आ सकते हैं?
हां, इसमें किसी भी तरह का कोई भी शक नहीं है, कि सेहतमंद और शारीरिक रूप से फिट लोग भी इस तरह की समस्या की चपेट में आ सकते हैं।