इस बात को कोई भी झुठला नहीं सकता है, कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि एक महिला की प्रेगनेंसी केवल शरीर में होने वाले बदलाव ही नहीं होते हैं, बल्कि यह महिला के मानसिक और भावनात्मक बदलावों का भी एक बहुत ही महत्वपूर्ण समय होता है। जिसमें महिला को एक नहीं, बल्कि शरीर से जुड़े कई तरह के बदलावों का सामना करना पड़ता है। आम तौर पर, इस दौरान महिला को कई बातों का डर सताता रहता है, जिसके कारण उसको और भी ज्यादा समस्या झेलनी पड़ती है। दरअसल, इस तरह की स्थिति में एक महिला द्वारा सोची गई हर बात का प्रभाव उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत पर भी पड़ता है। इसलिए, इस दौरान महिलाओं को और भी ज्यादा सावधान रहने की काफी ज्यादा जरूरत होती है।
दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि गर्भावस्था के दौरान आधे से ज्यादा महिलाओं को चिंता, डर और एंग्जायटी जैसी समस्या का अनुभव होता है। ऐसे में, महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव भी होते हैं, जिसके कारण उनके स्वभाव में भी कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। ऐसे में, महिलाओं को किसी न किसी बात का डर बना ही रहता है, जिसमें कभी डिलीवरी को लेकर डर बना रहना, कभी बच्चे के स्वास्थ्य को लेकर डर बना रहना, कभी उसके विकास के बारे में डर बना रहना आदि जैसे कई डर और चिंताएं शामिल होती हैं। आम तौर पर, ऐसे में बहुत सी महिलाओं के मन में एक सवाल आता है, कि क्या गर्भावस्था के दौरान होने वाली एंग्जायटी का प्रभाव बच्चे की दिमागी सेहत पर भी पड़ सकता है?
दरअसल, डॉक्टर का इस पर कहना है, कि हाँ गर्भावस्था के दौरान होने वाली एंग्जायटी का प्रभाव बच्चे की दिमागी सेहत पर भी पड़ सकता है। आम तौर पर, इस दौरान अक्सर ही हल्की चिंता को काफी सामान्य माना जाता है, पर अगर यही चिंता यानी कि एंग्जायटी महिला को काफी लंबे वक्त से परेशान करती आ रही है, या फिर काफी लंबे समय से बनी हुई है, तो ऐसे में यह एक बहुत ही बड़ा चिंता का विषय हो सकता है। क्योंकि, गंभीर एंग्जायटी मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए काफी ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकती है, इससे न केवल माँ की दिमागी सेहत प्रभावित होती है, बल्कि इसके कारण बच्चे के दिमाग पर भी काफी ज्यादा बुरा प्रभाव पड़ता है। आम तौर पर, अगर इस तरह की स्थिति में इस समस्या को वक्त रहते कंट्रोल न किया जाए और अगर यह और भी ज्यादा गंभीर हो जाए, तो इसके कारण बच्चे का मानसिक विकास रुक भी सकता है, जिसके कारण बच्चे की सेहत को भारी नुक्सान झेलना पड़ सकता है। इसलिए, गर्भावस्था के दौरान जितना हो सके चिंता करने से बचना चाहिए। आम तौर पर, अगर ऐसे में आपको समस्या और बगही ज्यादा गंभीर नजर आती है, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।
गर्भावस्था के दौरान आखिर क्यों बढ़ जाती है एंग्जायटी?
यह तो सभी जानते ही होंगे, कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में कई तरह के शारीरिक और मानसिक बदलाव देखने को मिलते हैं, जो इस दौरान शरीर में होने वाले कई तरह के हार्मोनल बदलाव के कारण होते हैं। इसी के चलते महिलाओं के मूड में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इसके अलावा, इस दौरान कई और भी कारण हैं, जिसकी वजह से महिलाओं में चिंता की समस्या बढ़ती है, जिसमें से कुछ निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि
- आर्थिक तनाव होना।
- घर परिवार या फिर रिश्तों में तनाव की स्थिति होना।
- पहली बार मां बनने का डर होना।
- नींद पूरी न होना।
- पहले हो चुके मिसकैरेज का अनुभव होना।
- लगातार और हद से ज्यादा थकान महसूस होना।
- सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम डरावनी जानकारी मिलना।
एंग्जायटी का बच्चे की दिमागी सेहत पर किस तरह का प्रभाव पड़ता है?
आम तौर पर, जब एक गर्भवती माँ काफी लंबे समय तक तनाव या फिर चिंता जैसी समस्या में घिरी रहती है, तो इस दौरान उसके शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल का निर्माण हद से ज्यादा होने लग जाता है। जो कि यह हार्मोन गर्भ में पल रहे बच्चे तक प्लेसेंटा के माध्यम से पहुंचता है, जो बच्चे की दिमागी सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक साबित नहीं होता है। इस पर डॉक्टर का कहना है, कि अगर गर्भवती महिला के शरीर में कोर्टिसोल का स्तर काफी लंबे वक्त तक बढ़ा हुआ रहता है, तो इसके कारण बच्चे का दिमागी विकास काफी ज्यादा प्रभावित हो जाता है। अध्ययन के अनुसार, अगर कोई बच्चा काफी ज्यादा तनाव वाली जैसी स्थिति में जन्म लेता है, तो ऐसे में आगे चलकर उस बच्चे को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिस में से कुछ निम्नलिखित अनुसार हो सकती हैं, जैसे कि
- इस तरह के बच्चों को ध्यान लगाने में काफी समस्या होना।
- हद से ज्यादा रोना।
- काफी ज्यादा चिड़चिड़ापन आ जाना।
- किसी भी चीज को सीखने में दिक्कत महसूस होना।
- नींद न आने की समस्या होना।
ऐसे में, कौन सी चिंता सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जाती है?
दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि जीवन में ली गई हर चिंता इतनी ज्यादा नुकसानदायक नहीं होती है, मतलब कि हल्का तनाव काफी ज्यादा सामान्य माना जाता है। पर अगर, गर्भवती महिला में निम्नलिखित लक्षण काफी लंबे समय से बने हुए हैं, तो यह गंभीर एंग्जायटी की तरफ इशारा हो सकता है, ऐसे में तुरंत डॉक्टर के पास जाने की सलाह प्रदान की जाती है।
- हर वक्त किसी न किसी बात को लेकर मन में डर बना रहना।
- बिना किसी बात के और बिना किसी वजह के घबराहट महसूस होना
- दिल की धड़कनों की रफ़्तार तेज होना।
- बार-बार रोने का मन करना।
- नींद न आने की समस्या होना।
- नकारात्मक सोच में बढ़ोतरी होना।
- किसी भी काम में मन न लगना।
एंग्जायटी को किस तरह कंट्रोल में किया जा सकता है?
आम तौर पर, अगर आप अपनी एंग्जायटी की समस्या को कंट्रोल में करना चाहती हैं, तो इसके लिए आप कुछ निम्नलिखित उपायों को अपना सकती हैं, जैसे
- पर्याप्त मात्रा में नींद लें।
- रोजाना हल्की एक्सरसाइज या फिर ध्यान करें।
- इंटरनेट पर उपलब्ध गलत जानकारी से अपना बचाव करें।
- रोजाना संतुलित भोजन का सेवन करें।
- अपने परिवार, पार्टनर या फिर किसी करीबी दोस्त को अपने मन की बात शेयर करें।
निष्कर्ष: गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं, जिसमें हल्की चिंता को एक सामान्य समस्या माना जाता है। पर, अगर यह एंग्जायटी गंभीर हो और काफी समय तक बनी रहे, तो यह माँ और बच्चे दोनों की दिमागी सेहत के लिए काफी ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकती है। इसके कारण बच्चे के व्यवहार में बदलाव और दिमागी विकास में रुकावट पैदा हो जाती है।
ऐसे में, अगर महिला को पैनिक अटैक, सांस लेने में परेशानी, लगातार घबराहट, काफी उदासी या फिर खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे विचारों के बारे में सोचती है, तो ऐसे में आपको तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। इसके अलावा, सही समय पर समस्या की गंभीरता की पहचान, परिवार का प्यार और डॉक्टर की सलाह से एंग्जायटी को कम करने में मदद मिल सकती है। ऐसे में, जो माँ करती है, उसका प्रभाव बच्चे की सेहत पर भी पड़ता है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान मां का मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बच्चे के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए आप आज ही न्यूरो सिटी हॉस्पिटल के विशेषज्ञों से मिल सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!
प्रश्न 1. गर्भावस्था के दौरान दिमाग को किसी भी तरह की चिंता से दूर रखना क्यों महत्वपूर्ण होता है?
आम तौर पर, गर्भावस्था के दौरान एक महिला के लिए अपने दिमाग को किसी भी तरह की चिंता से दूर रखना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दौरान ज्यादा चिंता करना न केवल माँ के लिए, बल्कि होने वाले बच्चे के लिए भी काफी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। दरअसल, इस दौरान अगर गर्भवती महिला काफी ज्यादा तनाव लेती है, या फिर किसी बात की हद से ज्यादा चिंता करती है, तो इसके कारण बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास बुरी तरीके से प्रभावित हो सकता है।
प्रश्न 2. क्या गर्भावस्था के दौरान माँ और बच्चे के दिमाग का कनेक्शन जुड़ा हुआ होता है?
दरअसल, आपको बता दें, कि गर्भावस्था के दौरान एक माँ और बच्चे का दिमाग हैरानीजनक और बहुत ही जटिल जैविक तंत्र के जरिए, एक बहुत ही गहराई के साथ जुड़ा हुआ होता है।
प्रश्न 3. क्या गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को चिंता होना आम बात होती है?
दरअसल, हाँ गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों की वजह से इस दौरान उनको चिंता और तनाव होना बहुत ही ज्यादा आम होता है। इस दौरान महिलाओं को अपनी सेहत का महत्वपूर्ण रूप से ख्याल रखने की काफी ज्यादा जरूरत होती है। इस दौरान उन को दिमागी टेंशन से दूर रहने की सलाह प्रदान की जाती है।
प्रश्न 4. क्या गर्भावस्था के दौरान लिया गया तनाव बच्चे के दिमागी विकास को रोक सकता है?
दरअसल, हाँ गर्भावस्था के दौरान लिया काफी लंबे समय तक या फिर काफी ज्यादा तनाव बच्चे की दिमागी सेहत को बुरी तरीके से प्रभावित कर सकता है और इसके कारण दिमागी विकास धीमा भी हो सकता है।